Ram Lala Jagriti Aarti Live : अयोध्या से लाइव : रामलला की जागृति आरती से हुई नए दिन की शुरुआत, दिव्य दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु, आप भी यहां करें साक्षात दर्शन
Ram Lala Jagriti Aarti Live : नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में प्रभु रामलला की जागृति आरती जिसे मंगला आरती भी कहा जाता है अत्यंत गरिमामय और भक्तिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।
Ram Lala Jagriti Aarti Live : अयोध्या से लाइव : रामलला की जागृति आरती से हुई नए दिन की शुरुआत, दिव्य दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु, आप भी यहां करें साक्षात दर्शन
Ram Lala Jagriti Aarti Live Today 5 Jan 2026 : अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या में आज 5 जनवरी 2026 की सुबह एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ शुरू हुई। नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में प्रभु रामलला की जागृति आरती जिसे मंगला आरती भी कहा जाता है अत्यंत गरिमामय और भक्तिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। कड़ाके की ठंड और सुबह के कोहरे के बावजूद, भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था, जो अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए घंटों पहले से कतारों में खड़े थे।
Ram Lala Jagriti Aarti Live Today 5 Jan 2026 : जागृति आरती : प्रभु को जगाने की प्रक्रिया रामलला की जागृति आरती प्रतिदिन तड़के लगभग 4:00 से 4:30 बजे के बीच आयोजित की जाती है। इस आरती का मुख्य उद्देश्य प्रभु को निद्रा से जगाना होता है। परंपरा के अनुसार, सबसे पहले शास्त्रीय विधि से मंत्रोच्चार के साथ प्रभु को जगाया जाता है। इसके बाद उन्हें जल और दूध से प्रतीकात्मक स्नान कराया जाता है। जागृति आरती के समय मंदिर का वातावरण शंखध्वनि और घंटियों की गूंज से भर जाता है, जो भक्तों के भीतर एक नई चेतना जागृत करता है।
श्रृंगार और प्रथम दर्शन
जागृति आरती के पश्चात रामलला का विशेष श्रृंगार किया जाता है। आज सोमवार के अवसर पर प्रभु को सुनहरे रंग के रेशमी वस्त्र धारण कराए गए। रत्नों से जड़ित आभूषण, स्वर्ण मुकुट और ताजे पुष्पों की मालाओं से प्रभु का रूप अत्यंत अलौकिक लग रहा था। पुजारी द्वारा कपूर और घी के दीपकों से आरती उतारी गई। इस दौरान भय प्रगट कृपाला दीनदयाला के स्वर पूरे गर्भगृह में गूंजते रहे, जिससे वहां मौजूद हर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गया।
बाल स्वरूप की सेवा और भोग
क्योंकि अयोध्या में प्रभु राम अपने बाल स्वरूप में विराजमान हैं, इसलिए उनकी सेवा भी एक छोटे बालक की तरह ही की जाती है। जागृति आरती के समय उन्हें दूध और हल्के मिष्ठान का बाल भोग लगाया जाता है। आरती के बाद भक्तों को चरणामृत और प्रसाद का वितरण किया गया। सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भक्तों के लिए सुगम दर्शन की विशेष व्यवस्था की है, ताकि हर श्रद्धालु इस पावन पल का साक्षी बन सके।
जागृति आरती के बाद दिनभर चलती है प्रभु की सेवा
राम नगरी अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के बाद प्रभु रामलला की सेवा और अर्चना का क्रम बेहद खास और शास्त्रोक्त विधि से संचालित होता है। सुबह की 'जागृति आरती' के बाद दिन के अलग-अलग प्रहरों में प्रभु की पांच विशेष आरतियां और पूजन किए जाते हैं। आज 5 जनवरी 2026 को भी मंदिर ट्रस्ट द्वारा निर्धारित समय सारणी के अनुसार प्रभु की सेवा का अलौकिक क्रम जारी है।
श्रृंगार आरती: प्रभु का दिव्य राजसी स्वरूप
जागृति आरती के बाद सुबह लगभग 6:30 बजे श्रृंगार आरती की जाती है। इस पूजन में रामलला को भव्य वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है। यह आरती केवल दर्शन मात्र नहीं है, बल्कि यह प्रभु के सौंदर्य की उपासना है। इसमें उन्हें इत्र, पुष्प और दिव्य मालाएं अर्पित की जाती हैं। भक्तों के लिए यह दृश्य सबसे प्रिय होता है क्योंकि इसमें बाल स्वरूप रामलला का पूर्ण वैभव दिखाई देता है।
भोग आरती: बाल स्वरूप को अल्पाहार और भोजन
दोपहर 12:00 बजे राजभोग आरती का आयोजन होता है। चूंकि अयोध्या में प्रभु बालक रूप में हैं, इसलिए उन्हें समय-समय पर भोजन अर्पित किया जाता है। दोपहर की इस आरती में रामलला को छप्पन भोग या विशेष सात्विक भोजन का भोग लगाया जाता है। आरती से पहले कुछ समय के लिए पर्दा किया जाता है ताकि प्रभु शांति से भोजन ग्रहण कर सकें, जिसके बाद आरती के साथ दर्शन पुनः शुरू होते हैं।
संध्या आरती: गोधूलि बेला का आध्यात्मिक मिलन
सूर्यास्त के समय शाम लगभग 7:30 बजे संध्या आरती संपन्न होती है। इस समय मंदिर परिसर हजारों दीपों और झूमरों की रोशनी से नहा उठता है। वेद पाठी ब्राह्मणों द्वारा सस्वर मंत्रोच्चार किया जाता है और घी के दीपकों से प्रभु की नजर उतारी जाती है। दिनभर की थकान के बाद प्रभु की यह आरती भक्तों को असीम मानसिक शांति प्रदान करती है।
शयन आरती: प्रभु के विश्राम का समय
रात्रि 9:00 बजे दिन की अंतिम आरती यानी शयन आरती होती है। इस आरती के बाद प्रभु रामलला को विश्राम कराया जाता है। उनके लिए फूलों की शैया तैयार की जाती है और लोरी के रूप में मधुर भजनों का गायन होता है। शयन आरती के बाद मंदिर के पट अगले दिन तड़के तक के लिए बंद कर दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि अयोध्या में राम केवल भगवान नहीं, बल्कि घर के बालक की तरह पूजे जाते हैं।