Mahakal Bhasma Aarti Live : उज्जैन से महाकाल लाइव : दिव्य भस्म आरती में बाबा का अलौकिक श्रृंगार, घर बैठे करें साक्षात दर्शन

Mahakal Bhasma Aarti Live : नए साल 2026 के प्रथम रविवार यानी आज 4 जनवरी को बाबा महाकाल के दरबार में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

Update: 2026-01-04 01:11 GMT

Mahakal Bhasma Aarti Live : उज्जैन से महाकाल लाइव : दिव्य भस्म आरती में बाबा का अलौकिक श्रृंगार, घर बैठे करें साक्षात दर्शन

Mahakal Bhasma Aarti Live 4 January 2026 : उज्जैन। नए साल 2026 के प्रथम रविवार यानी आज 4 जनवरी को बाबा महाकाल के दरबार में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। महाकाल नगरी में आज तड़के 3:00 बजे मंदिर के पट खुलते ही जय महाकाल के उद्घोष से पूरा वातावरण शिवमयी हो गया। विशेष बात यह रही कि साल के पहले रविवार होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से अधिक रही, जिनके लिए मंदिर प्रशासन ने चाक-चौबंद व्यवस्था की थी।

Mahakal Bhasma Aarti Live 4 January 2026 : पंचामृत अभिषेक और दिव्य श्रृंगार भस्म आरती के मुख्य अनुष्ठान से पूर्व, भगवान महाकाल को जल से स्नान कराया गया। इसके पश्चात पुजारी और पुरोहितों द्वारा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के रस पंचामृत से बाबा का अभिषेक किया गया। आज बाबा महाकाल का विशेष भांग श्रृंगार किया गया, जिसमें सूखे मेवों और चंदन का लेपन कर उन्हें एक अत्यंत मनमोहक स्वरूप दिया गया। मस्तक पर त्रिपुंड और चंद्र अर्पित कर राजाधिराज का दिव्य रूप निखारा गया।

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महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म अर्पण

सुबह करीब 4:00 बजे भस्म आरती की मुख्य प्रक्रिया शुरू हुई। महानिर्वाणी अखाड़े के साधुओं द्वारा कपाल भांति और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच बाबा को ताजी भस्म अर्पित की गई। धूनी की भस्म से ढके बाबा महाकाल के इस स्वरूप के दर्शन मात्र से भक्त भावविभोर हो उठे। नगाड़ों, शंख और घंटों की ध्वनि ने मंदिर परिसर में एक अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।

भक्तों की भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था

रविवार की छुट्टी होने के कारण आज हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने चलित भस्म आरती के माध्यम से दर्शन किए। मंदिर समिति ने यह सुनिश्चित किया कि कतार में लगे अंतिम व्यक्ति को भी भगवान के दर्शन सुलभता से हों। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल और मंदिर के निजी सुरक्षाकर्मी हर पॉइंट पर तैनात रहे।

महाकाल मंदिर में दिनभर होने वाली अन्य प्रमुख आरतियाँ

भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में भस्म आरती के बाद भी भक्ति का सिलसिला थमता नहीं है। भस्म आरती के समापन के बाद बाबा का भव्य श्रृंगार उतारा जाता है और फिर से जल अभिषेक के साथ दिन की अन्य आरतियों की प्रक्रिया शुरू होती है। भस्म आरती के बाद जो अगली मुख्य आरती होती है, उसे दद्योदक आरती कहा जाता है। यह आरती सुबह लगभग 7:30 से 8:15 के बीच संपन्न होती है, जिसमें भगवान को दूध और दही का भोग लगाकर उनकी स्तुति की जाती है। इस समय मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहता है।

भोग आरती और बाबा का राजसी स्वरूप

दोपहर के समय बाबा महाकाल की भोग आरती का आयोजन किया जाता है। आमतौर पर यह आरती सुबह 10:30 बजे के करीब शुरू होती है। इस आरती की विशेषता यह है कि इसमें भगवान महाकाल को राजा के रूप में देखा जाता है और उन्हें विभिन्न प्रकार के पकवानों का नैवेद्य अर्पण किया जाता है। श्रद्धालुओं की जानकारी के लिए बता दें कि भोग आरती के दौरान बाबा का श्रृंगार बहुत ही भव्य होता है, जिसमें चांदी के आभूषणों और फूलों का विशेष प्रयोग किया जाता है। इस आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से भक्त उज्जैन पहुँचते हैं।

संध्या आरती और सायंकालीन पूजन

सूर्यास्त के समय महाकाल मंदिर में संध्या आरती की जाती है। शाम लगभग 6:30 बजे होने वाली यह आरती भक्तों के आकर्षण का केंद्र होती है। इस समय पूरे मंदिर परिसर को दीपों और रोशनी से जगमगाया जाता है। संध्या आरती के दौरान होने वाली डमरू और झांझ-मंजीरों की गूंज भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। इस आरती में भगवान का श्रृंगार विशेष रूप से गुलाल और रंगीन वस्त्रों से किया जाता है, जो देखने में अत्यंत अलौकिक प्रतीत होता है।

शयन आरती: दिन का अंतिम अनुष्ठान

दिनभर के पूजन और आरतियों के पश्चात, रात्रि में बाबा महाकाल की शयन आरती की जाती है। यह दिन की अंतिम आरती होती है जो रात करीब 10:30 बजे संपन्न होती है। इस आरती के माध्यम से भगवान को विश्राम कराया जाता है। शयन आरती में बहुत ही मधुर और शांत भजनों का गायन होता है। आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं और अगले दिन तड़के पुनः भस्म आरती से नए दिन की शुरुआत होती है। 

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