Mahakal Bhasm Aarti Live : उज्जैन से लाइव : सुबह की भस्म आरती में बाबा का मनमोहक श्रृंगार, उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, आप भी यहां करें दर्शन

Mahakal Bhasm Aarti Live : उज्जैन : आज 13 जनवरी 2026, मंगलवार की सुबह बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन आज एक अलग ही ऊर्जा से सराबोर हैं,

Update: 2026-01-13 01:34 GMT

Mahakal Bhasm Aarti Live : उज्जैन से लाइव : सुबह की भस्म आरती में बाबा का मनमोहक श्रृंगार, उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, आप भी यहां करें दर्शन

Mahakal Bhasm Aarti Live Aaj 13 Jan : उज्जैन : आज 13 जनवरी 2026, मंगलवार की सुबह बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन आज एक अलग ही ऊर्जा से सराबोर हैं, उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं के कारण सर्दी बहुत ज्यादा हैं, लेकिन महाकाल के भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा हैं ब्रह्म मुहूर्त में जैसे ही मंदिर के विशाल पट खोले गए, पूरा परिसर जय श्री महाकाल के जयकारो से गूँज उठा, ऐसा लगा मानो पूरी अवंतिका नगरी जाग उठी हो और साक्षात महादेव अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए गर्भगृह में विराजमान हो गए हो

Mahakal Bhasm Aarti Live Aaj 13 Jan : अलौकिक श्रृंगार चंदन का त्रिपुंड और फूलों की महक : सुबह के ठीक 4 बजे जब गर्भगृह के कपाट खुले, तो भक्तों का घंटों का इंतजार खत्म हुआ आज बाबा महाकाल का श्रृंगार इतना अलौकिक और अनोखा हैं की सभी भक्त बस त्रिकालदर्शी को निहारती ही रह गई, भोलेनाथ के मस्तक पर चंदन का दिव्य त्रिपुंड सजाया गया और सुगंधित लेपों से उनका अभिषेक हुआ, ताजे फूलों की मालाओं और स्वर्ण आभूषणों से सजे बाबा के इस रूप ने श्रद्धालुओं मन मोह लिया उनकी आँखों की चमक देख ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वो मुस्कुरा रहे हों।

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भस्म की वर्षा और डमरू का नाद भक्ति में डूबा जनसैलाब

आरती का मुख्य आकर्षण पवित्र भस्म, होता हैं , जिसे कपिला गाय के गोबर से बने कंडों और शुद्ध लकड़ियों की राख से तैयार किया गया हैं, जब पुजारी ने महीन सफेद कपड़े से छानकर बाबा पर भस्म अर्पित किया , तो पूरा वातावरण उसकी सोंधी सोंधी खुशबू से महक उठा, करीब दो घंटे तक चली भस्म आरती के दौरान जब वैदिक मंत्रों के साथ डमरू, झांझ और शंख की ध्वनि एक साथ गूंजी, तो वहां मौजूद हजारों भक्त भाव-विभोर होकर झूमने लगे, उस समय मंदिर के अन्दर की सकारात्मक ऊर्जा को सब्दो में बता पाना मुमकिन नही


पूरे दिन भक्ति भाव का सिलसिला

बाबा महाकाल के दरबार में सुबह की भस्म आरती के बाद , पूरे दिन भक्ति भाव का सिलसिला चलता रहता है, भस्म आरती संपन्न होने के बाद दद्योदक आरती होती है, फिर सुबह के समय ही भोग आरती की जाती है जिसमें बाबा को नैवेद्य अर्पित किया जाता हैं , इसके बाद दोपहर में भी भोलेनाथ की पूजा जी की जाती , और शाम को ढलते सूरज के साथ संध्या आरती का भव्य नजारा देखने को मिलता है, जिसमें बाबा का फिर से श्रृंगार होता है, अंत में, रात के समय शयन आरती होती है, जिसमें बाबा को मीठे भजनों के साथ विश्राम कराया जाता है, यानि सुबह से रात तक बाबा अलग-अलग रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने चाक-चौबंद व्यवस्था की है, आम दर्शनार्थियों को महाकाल लोक के रास्ते मानसरोवर गेट से प्रवेश दिया जा रहा है, जहाँ ठंड को देखते हुए बैठने और पीने के पानी के उचित इंतजाम हैं, इसके अलावा, जो श्रद्धालु समय की कमी के चलते जल्दी दर्शन करना चाहते हैं, उनके लिए 250 रुपये की रसीद वाली वीआईपी लाइन की भी अलग से व्यवस्था की गई है, ताकि सुरक्षा और सुगमता दोनों बनी रहे।

अधूरा है दर्शन, यदि नहीं गए जूना महाकाल

उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण परंपरा का पालन करना अनिवार्य माना जाता है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा महाकाल के दर्शन के बाद जूना महाकाल के दर्शन करना अत्यंत आवश्यक है, कहा जाता है कि जब तक भक्त जूना महाकाल दर्शन नही करते, तब तक उनकी उज्जैन की यह यात्रा संपूर्ण नहीं मानी जाती। जय महाकाल 

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