Home Temple Vastu Direction : क्या आपके घर का मंदिर ही बन रहा है मानसिक तनाव की वजह? सुख-समृद्धि के लिए आज ही बदलें ये स्थान
Home Temple Vastu Direction : हिंदू धर्म में घर का मंदिर (Pooja Ghar) केवल एक कोना नहीं, बल्कि पूरे घर की प्राण-शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत होता है।
Home Temple Vastu Direction : क्या आपके घर का मंदिर ही बन रहा है मानसिक तनाव की वजह? सुख-समृद्धि के लिए आज ही बदलें ये स्थान
Vastu Tips for Home Temple Location : हिंदू धर्म में घर का मंदिर (Pooja Ghar) केवल एक कोना नहीं, बल्कि पूरे घर की प्राण-शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत दिशा में रखा गया मंदिर आपके जीवन में अशांति, आर्थिक तंगी और भारी मानसिक तनाव का कारण बन सकता है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर का स्थान तय करते समय की गई एक छोटी सी चूक 'वास्तु दोष' उत्पन्न करती है, जिसका सीधा असर परिवार के स्वास्थ्य और खुशहाली पर पड़ता है।
Vastu Tips for Home Temple Location : ईशान कोण : ईश्वर का निवास और सकारात्मकता का द्वार वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को देवताओं का स्थान और सबसे पवित्र माना गया है। घर का मंदिर स्थापित करने के लिए यह सबसे श्रेष्ठ दिशा है। इस दिशा में पूजा घर होने से घर में शांति का वास होता है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। यदि ईशान कोण में स्थान न हो, तो आप विकल्प के तौर पर उत्तर या पूर्व दिशा का चुनाव कर सकते हैं। यह दिशाएं ज्ञान और समृद्धि की वाहक मानी जाती हैं।
इन 4 जगहों पर मंदिर रखना है खतरे की घंटी
अनजाने में हम घर की सजावट या जगह की कमी के कारण मंदिर ऐसी जगहों पर रख देते हैं, जो नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को आमंत्रित करते हैं: जैसे
सीढ़ियों के नीचे : कई लोग जगह बचाने के लिए सीढ़ियों के नीचे मंदिर बना लेते हैं। वास्तु के अनुसार, इसके ऊपर से गुजरना देवताओं का अपमान माना जाता है, जिससे परिवार की प्रगति रुक जाती है।
शौचालय के समीप : बाथरूम की दीवार से सटा हुआ या उसके ठीक ऊपर-नीचे मंदिर कभी न रखें। यह सबसे बड़ा वास्तु दोष है जो स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां लाता है।
बेडरूम में मंदिर : शयनकक्ष विश्राम और निजी जीवन का स्थान है। यहाँ मंदिर होने से वैवाहिक संबंधों में तनाव और अनिद्रा की समस्या हो सकती है। यदि स्थान न हो, तो मंदिर पर हमेशा पर्दा रखें।
रसोई में सिंक के पास : अग्नि और जल के बिल्कुल करीब मंदिर रखने से घर के सदस्यों में क्रोध और कलह बढ़ता है।
खंडित मूर्तियां और रौद्र रूप, बढ़ाते हैं अशांति
मंदिर में रखी गई मूर्तियों का चयन भी बेहद सोच-समझकर करना चाहिए: अगर कोई मूर्ति या तस्वीर थोड़ी भी टूट गई है, तो उसे तुरंत हटा दें। खंडित मूर्तियां ऊर्जा के प्रवाह को बाधित करती हैं। घर में हमेशा सौम्य और आशीर्वाद देने वाली मुद्रा वाली तस्वीरें लगाएं। रौद्र या युद्ध वाली मुद्रा की तस्वीरें तनाव पैदा करती हैं। एक ही भगवान की दो मूर्तियां एक-दूसरे के सामने मुख करके न रखें, इससे आय के स्रोत प्रभावित होते हैं।
पूर्वजों की तस्वीरें और पूजा की सही विधि
एक सामान्य गलती जो अक्सर लोग करते हैं, वह है मंदिर में ही पूर्वजों की फोटो लगाना। वास्तु के अनुसार, पितर पूजनीय हैं लेकिन वे देवताओं की श्रेणी में नहीं आते। उनकी तस्वीर हमेशा दक्षिण की दीवार पर अलग से लगानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए, जो एकाग्रता और आध्यात्मिक लाभ के लिए सर्वोत्तम है।
ऊर्जा का संतुलन ही है सफलता की कुंजी
वास्तु शास्त्र कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि दिशाओं और पंचतत्वों के संतुलन का विज्ञान है। यदि आपको लगता है कि कड़ी मेहनत के बाद भी घर में अशांति है, तो अपने पूजा घर के स्थान का निरीक्षण अवश्य करें। एक सही बदलाव आपकी सोच और जीवन की दिशा बदल सकता है।