Cherchera Punni 2026 kal : छत्तीसगढ़ के हर घरों में कल सुनाई देगी... ‘छेर छेरा माई कोठी के धान ला हेर हेरा’

Cherchera Punni 2026 kal : इस पर्व को किसान अपने खेतों में साल भर कड़ी मेहनत करने के बाद अपनी मेहनत की कमाई धान को दान देकर छेरछेरा पर्व मनाते हैं।

Update: 2026-01-01 16:05 GMT

छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्योहारों में से एक प्रमुख त्यौहार छेरछेरा पुन्नी तिहार 3 जनवरी को है. यह त्यौहार छत्तीसगढ़ में धान कटाई के बाद धान के कोठी तक आने के सफर के बाद मनाई जाती है. यानि की छेरछेरा पुन्नी घर में धान के फसल आने की ख़ुशी में मनाई जाती है.  


इस पर्व को मानते हुए बच्चों और बड़े बुजुर्गों की टोलियां दान लेते समय  ‘छेर छेरा माई कोठी के धान ला हेर हेरा’ कहते हैं और जब तक घर की महिलाएं अन्न दान नहीं देती, तब तक वे कहते रहेंगे ‘अरन बरन कोदो दरन, जब्भे देबे तब्भे टरन’. इसका मतलब ये होता है कि बच्चे कह रहे हैं, मां दान दो, जब तक दान नहीं दोगे, तब तक हम नहीं जाएंगे.




2026 में छेरछेरा पर्व कब है? Chherchhera Kab Hai 2026


  • छेरछेरा पर्व 03 जनवरी 2026, शनिवार
  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ होगी 02 जनवरी 2026, शाम 06:55 मिनट पर
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी 03 जनवरी 2026, दोपहर 03:44 मिनट पर


इस दिन मनाया जाता है 


छेरछेरा का पर्व छत्तीसगढ़ में पौष माह (दिसम्बर-जनवरी) में मनाया जाने वाला एक फसल उत्सव है। जो हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल पौष मास अथार्त जनवरी के महीने में मनाया जाता है। इस दिन दान करने का विशेष दिन माना जाता है इस दिन गाँव के बच्चे टोली बनाकर घर-घर छेरछेरा मांगने जाते हैं।  इस पर्व को किसान अपने खेतों में साल भर कड़ी मेहनत करने के बाद अपनी मेहनत की कमाई धन को दान देकर छेरछेरा पर्व मनाते हैं।

इस दिन भगवान शिवजी ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी




इस दिन दान देना महा पुण्य का कार्य माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिवजी ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी। ऐसी मान्यता है कि छेरछेरा पर्व में जो भी दान की गई वस्तु होती है उसको जनकल्याण में खर्च किया जाता है। छेरछेरा पर्व को छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से मनाया जाता है।


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