Teenage me bachiyan chhupati Hai ye baten: 16–17 साल की बच्चियां माता-पिता से क्या-क्या छुपाती हैं?हर पेरेंट्स को जाननी चाहिए टीनएजर्स की ये जरूरी बातें!
Teenage me bachiyan chhupati Hai ye baten: जब भी कोई बच्ची अपने किशोरावस्था में अर्थात 16–17 साल की उम्र में होती है, तो उसमें कई शारीरिक और मानसिक रूप से बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। यहां एक बात गौर करने वाली है कि बच्चे जब अपने बाल्यावस्था में होते हैं तो वे अपनी सारी बातें माता-पिता से कहते हैं, लेकिन जब ये अपने टीनएजम आते हैं तो वे बहुत सारी चीजें छुपाते है और कहने से भी घबराते है।
Teenage me bachiyan chhupati Hai ye baten: जब भी कोई बच्ची अपने किशोरावस्था में अर्थात 16–17 साल की उम्र में होती है, तो उसमें कई शारीरिक और मानसिक रूप से बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। यहां एक बात गौर करने वाली है कि बच्चे जब अपने बाल्यावस्था में होते हैं तो वे अपनी सारी बातें माता-पिता से कहते हैं, लेकिन जब ये अपने टीनएजम आते हैं तो वे बहुत सारी चीजें छुपाते है और कहने से भी घबराते है। यह अक्सर बच्चियों में अधिक देखा गया है। इनके मन में एक भय और चिंता बनी रहती है कि यदि वे अपने सीक्रेट्स पेरेंट्स को बताएंगी तो उनके माता–पिता उन्हें डांटेंगे और गलत समझने लगेंगे। आज हम आपको पेरेंटिंग के कुछ खास टिप्स बताने वाले हैं और साथ ही यह भी बताएंगे कि 16–17 साल की बच्चियां कौन सी बातें अपने माता-पिता से छुपाती है।
बच्चियां छुपाती है अपनी फिलिंग्स
बच्चियों में अक्सर देखा गया है कि वे बिना किसी बड़ी वजह के उदास और अकेला महसूस करने लगती हैं। इन्हें यह भी डर होता है कि वे अपनी फिलिंग्स घर वालों के साथ शेयर करेंगी तो कोई उसका मजाक न बना ले या गलत न समझ ले। इसी वजह से यदि उन्हें किसी प्रकार का भय भी होता है तो पर भी अपनी बातें शेयर नहीं करती।
सेल्फ इमेज और बॉडी लुक्स
बच्चियां जैसे-जैसे बड़ी होकर किशोरावस्था में पहुंचती हैं तो उनके शरीर, रंग और वजन में कई बदलाव होते हैं इसको लेकर वे असुरक्षा महसूस करती हैं और अपने शरीर के जुड़ी बाते माता पिता को नहीं बताती। इनके ऐसा महसूस करने के पीछे सोशल मीडिया भी एक बड़ा कारण है, क्योंकि इसमें एक खास तरह के सुंदर और परफेक्ट दिखने वाले शरीर को दिखाकर यह बताया जाता है कि यही आदर्श सुंदरता है, लेकिन यह सही नहीं होता।
बॉयफ्रेंड और रिलेशनशिप के बारे में
किशोरावस्था की उम्र में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण एक आम बात है। वर्तमान में इस उम्र की बच्चियों में बॉयफ्रेंड कल्चर और रिलेशनशिप अधिक देखी जाती है। इसे अकेलापन और समझ की कमी भी कह सकते है कि वे ऐसा करती है। वे सोचतीं है कि इन बातों को यदि माता-पिता को बताएं तो उसे डांट पड़ेगी और उसके चरित्र पर भी सवाल उठ सकते है, जिस वजह से वे शांत रहना ही पसंद करतीं हैं।
अपने करियर और पढ़ाई का डर
किशोरावस्था के बच्चों में अपने करियर को लेकर काफी चिंता बनी रहती है। कई बार पेरेंट्स भी उन पर पढ़ाई का इतना दबाव डाल देते हैं कि वे मानसिक रूप से रोगी हो जाते है। उन्हें लगता है कि वे अपने माता-पिता की बातों पर खरा नहीं उतर पाए। इसी चिंता की वजह से बच्चियां अपने आपको बोझ समझने लगती हैं और वे अपनी पर्सनल बातें शेयर नहीं करती।
पेरेंट्स को इन बातों का रखना चाहिए ध्यान
- सबसे पहले बच्चियों को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि आप उनकी किसी भी बात का बुरा नहीं मानेंगे और किसी प्रकार से जज नहीं करेंगे।
- बच्चों के कही हुई हर बात को मजाक में नहीं लेना है, उनकी बातें पूरी सुने उसके बाद अपना रिएक्शन दें।
- बच्चियों की प्राइवेसी(निजता) का पूरा ध्यान रखें। किसी जासूस की तरह उनके पीछे ना लग रहे, सबसे पहले उनका विश्वास जीते।
- आपको अपने बच्चों की तुलना किसी अन्य से नहीं करनी चाहिए। यह भाव उनके आत्मविश्वास को काफी प्रभावित करता है।