Statue of Social Justice: विश्व में सबसे बड़ी बाबा साहब अंबेडकर की मूर्ति; जानिए भारत की चौथी सबसे ऊँची प्रतिमा स्टैचू ऑफ सोशल जस्टिस की पूरी कहानी!
Statue of Social Justice: बाबा साहब अंबेडकर के जाने के बाद हमारा भी फर्ज बनता है कि हम उन्हें न भूले और उनकी याद में कुछ करें। ऐसे में आंध्र प्रदेश सरकार ने उनकी एक भव्य प्रतिमा स्थापित की है, जो विश्व में सबसे बड़ी है जिसे स्टैचू ऑफ सोशल जस्टिस कहा जा रहा है। आईए जानते हैं इस मूर्ति की खासियत!
Statue of Social Justice: वर्तमान भारत की समृद्धि अनेक महापुरुषों और वीर बलिदानियों की ही देन है। द्वापर में श्री कृष्ण से लेकर कलयुग में भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और डॉ. अंबेडकर जैसे लोगों ने भारत के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया था। सभी महापुरुषों का योगदान अतुलनीय है लेकिन इन्हीं में कलयुगी महापुरुष बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर एक अलग ही सोच के व्यक्ति थे। इन्होंने दलित समाज और पिछड़ों के लिए जी–जान लगाकर लड़ाई की थी और उन्हें न्याय दिलाया था। उनके जाने के बाद हमारा भी फर्ज बनता है कि हम उन्हें न भूले और उनकी याद में कुछ करें। ऐसे में आंध्र प्रदेश सरकार ने उनकी एक भव्य प्रतिमा स्थापित की है, जो विश्व में सबसे बड़ी है जिसे स्टैचू ऑफ सोशल जस्टिस कहा जा रहा है। आईए जानते हैं इस मूर्ति की खासियत!
स्टैचू ऑफ सोशल जस्टिस की संरचना
इस विशाल प्रतिमा को आंध्र प्रदेश की सरकार ने विजयवाड़ा शहर के डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्वराज मैदान में स्थापित किया है। लगभग 18.81 एकड़ में फैले इस क्षेत्र को अंबेडकर स्मृती वनम भी कहते हैं। इस परियोजना का उद्घाटन आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने जनवरी 2024 में किया था। आधार से मूर्ति की ऊंचाई कुल 206 फिट है और सिर्फ मूर्ति की ऊंचाई 125 फिट है। जिस वजह से यह भारत की चौथी सबसे ऊंची प्रतिमा बन गई है।
निर्माण में हुआ है करोड़ों का खर्चा
इस पूरी परियोजना को तैयार होने में 404.35 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, जो की पूरी तरह से मेड इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है। इसे बनाने में लगभग 400 टन स्टील और 12 मीट्रिक टन पीतल का उपयोग किया गया है। इतनी बड़ी संरचना को स्थायित्व देने के लिए 539 पाइल्स का उपयोग किया गया है जो 30 मीटर तक नीचे गाड़े गए हैं। साथ ही राजस्थान से लाई गई बलुआ पत्थरो का उपयोग करके मूर्ति का निर्माण किया गया है।
परिसर में उपलब्ध सुविधाएं
स्टैच्यू ऑफ सोशल जस्टिस के परिसर में म्यूजियम, 2000 लोगों की क्षमता वाला सम्मेलन केंद्र और 8 हजार वर्ग फुट का प्ले पार्क भी बनाया गया है। परिसर के म्यूजियम में एक एलईडी स्क्रीन पर लगाई गई है जिसमें बाबा साहब के जीवन को दर्शाया गया है।परिसर में ही एक मिनी थियेटर, पुस्तकालय और म्यूजिकल वॉटर फाउंटेन भी बनाया गया है।
जानिए डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रोफाइल
- पूरा नाम– डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर
- जन्म– 14 अप्रैल 1891, महू(मध्यप्रदेश)
- पिता का नाम– रामजी मालोजी सकपाल
- माता का नाम– भीमाबाई सकपाल
- जाति– महार (अछूत माना जाने वाला)
- 14 अक्टूबर 1956– बौद्ध धर्म में शामिल(नागपुर में)
- पहली पत्नी– रमाबाई (इनसे 5 बच्चे)
- दूसरी पत्नी– सविता(शारदा)
- किताबें– 35000 विशिष्ट किताबों का संग्रह
- डिग्री– एल्फिंस्टन कॉलेज मुंबई से BA और कोलंबिया विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में PhD जैसी कुल 32 डिग्रियां और 9 भाषा के जानकार थे।
- अकेले व्यक्ति जिन्होंने तीनों गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।
- भारत के पहले कानून मंत्री बने।
- इन्हें भारतीय संविधान का पिता भी कहा जाता है।
- RBI और वित्त आयोग की स्थापना के साथ राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र को शामिल करवाया।
- मृत्यु– दिसंबर 1956, दिल्ली
- 1990– मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित