Sir ke juon ko kaise dur Karen: जूं की समस्या से है परेशान? जानिए सिर की जूं और लीख को जड़ से खत्म करने के 4 असरदार घरेलू उपाय!
Sir ke juon ko kaise dur Kare: बचपन में लगभग हर छोटे बच्चों को उनके माता-पिता द्वारा इस वजह से भी डांट पड़ती थी कि उनके बाहर खेलने जाने के बाद सिर में काफी जूएं(जूं) हो जाया करते थे। यह समस्या सिर्फ बच्चों की ही नहीं है बड़ों के सिर में भी काफी जूएं (Head Lice) हो जाते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसी देसी नुस्खे बताने वाले हैं जो आपके जुएं की समस्या को पूरी तरह खत्म कर देगी।
Sir ke juon ko kaise dur Kare: बचपन में लगभग हर छोटे बच्चों को उनके माता-पिता द्वारा इस वजह से भी डांट पड़ती थी कि उनके बाहर खेलने जाने के बाद सिर में काफी जूएं(जूं) हो जाया करते थे। यह समस्या सिर्फ बच्चों की ही नहीं है बड़ों के सिर में भी काफी जूएं (Head Lice) हो जाते हैं। जूं की यह समस्या शुरुआत में पता नहीं चलती और सामान्य ही लगती है लेकिन धीरे-धीरे यह छोटा सा जीव, मनुष्य के सिर को अपना घर बना लेते हैं और दिन रात अपनी संख्या बढ़ाते रहता है। बड़ों की तुलना में बच्चों के सिर में जुएं अधिक पाए जाते हैं क्योंकि बच्चे जब एक दूसरे के साथ खेलते हैं, विद्यालय जाते हैं तो एक दूसरे से इनका संपर्क अधिक होता है, जिस वजह से जुएं एक के सिर से दूसरे के सिर में चले जाते है। बच्चों में यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि उनका पूरा बाल ही उतारना पड़ जाता है। आज हम आपको कुछ ऐसी देसी नुस्खे बताने वाले हैं जो आपके जुएं की समस्या को पूरी तरह खत्म कर देगी।
जूएं आखिर हैं क्या?
यह एक प्रकार के परजीवी होते हैं जो हमारी सर की ऊपरी त्वचा पर सिर के बालों के बीच में रहते है वहीं से खून चूसकर जीवित रहते हैं। ये अपनी संख्या बहुत जल्दी बढ़ाते हैं और अपने अंडे बालों की जड़ों पर ही दे देते हैं, जिसे लीख कहा जाता है और यही लीख धीरे-धीरे विकसित होकर एक पूर्ण जुएं के रूप में तैयार हो जाती है। अगर समय रहते इसका जड़ से इलाज नहीं किया गया तो ये अपनी पूरी बस्ती बनाने में समय नहीं लगाते। खुद की सफाई का पूरा ध्यान रखने के बावजूद भी यह हमारे सिर में अन्य व्यक्तियों से या किसी दूसरे की टोपी पहनने और दूसरों के कंघी का उपयोग करने से भी फैल सकती है। जानिए इसे दूर करने के कुछ उपाय।
नारियल और नीम के तेल का चमत्कारी मिश्रण
कीड़े–मकोड़े और मच्छरों को भगाने के लिए नीम का उपयोग प्राचीन समय से ही चला रहा है। कई आयुर्वेद शास्त्रों में नीम को परजीवीनाशक भी बताया गया है। नीम का स्वाद भले ही कड़वा होता है लेकिन इस कड़वेपन के पीछे उसकी कई खूबियां छिपी हुई है। इस विधि को करने के लिए एक छोटी कटोरी में नारियल का तेल ले और उसे हल्की आंच पर गर्म करें फिर नारियल तेल में नीम के बीज डालें और दो से तीन दिनों तक इसे ऐसे ही रहने दें, ताकि बीजों का गुण तेल में अच्छी तरह घुल जाए। फिर इस मिश्रण को बालों पर लगना शुरू करें कुछ दिन बाद आप देखेंगे की आपके सिर से जुएं कम हो जाएंगे।
लहसुन और नींबू का करे इस्तेमाल
लहसुन के तीखे गंध और नींबू के खट्टे स्वाद में इन परजीवियों को मारने की पूरी शक्ति होती है। इस तरीके को अपनाने के लिए लगभग 8 से 10 लहसुन की कलियां लें और उन्हें अच्छी तरह पीसकर एक कटोरी में डालें साथ ही इसमें तीन से चार चम्मच नींबू का रस मिला लें। फिर इस बने हुए मिश्रण को बालों में लगाकर 25 से 30 मिनट तक रहने देना है। फिर समय पूरा होते ही गुनगुने पानी से सिर को अच्छे से धो लें। कुछ दिन यह प्रक्रिया अपनाने के बाद जुएं की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
प्याज के रस और हल्दी का उपयोग
जुओं की सफाई करने के लिए प्याज का रस भी एक रामबाण औषधि है। प्याज में सूक्ष्मजीवरोधी गुण विद्यमान होते हैं जो जूओं को मारने में सहायक हैं। इस रस के उपयोग से जुओं के साथ-साथ लीख का भी सफ़ाया हो जाता है। इस नुस्खे के लिए तीन से चार प्याज लें और उसे अच्छी तरह पीसकर रस निकाल लें और इस रस को एक कटोरी में रखकर इसमें हल्दी भी मिलाएं। इस बने हुए मिश्रण को शेर की त्वचा पर अच्छी तरह से लगाने के बाद 15 से 20 मिनट ऐसे ही छोड़ दें। फिर साबुन से अच्छी तरह बालों को साफ कर ले। इस प्रक्रिया को तीन से चार बार करने से जुएं जड़ से खत्म हो जाएंगे।
जैतून के तेल और कपूर का मिश्रण
कपूर की तीखी खुशबू और इसके औषधीय गुणों की वजह से इसे प्राकृतिक परजीवीनाशक की तरह उपयोग किया जाता है। साथ ही इसे पूजा और सर्दी खांसी के लिए भी उपयोग करते हैं। इस तरीके को करना काफी आसान है, इसके लिए जैतून या फिर नारियल के तेल का उपयोग करें। कपूर को पूरी तरह से पीसकर इन तेलों में मिला लें, फिर इस बने हुए मिश्रण को बालों में लगाकर रात भर ऐसे ही रहने दे और सुबह होते ही बालों को शैंपू से धो लें। कपूर की गंध और इन तेलों के प्रभाव से जुएं सांस नहीं ले पाते और नष्ट हो जाते हैं। यह तरीका हफ्ते में दो से तीन बार करने पर काफी असरदार परिणाम प्राप्त होते हैं।