Dharti per Sona Kahan Se aaya: सोना धरती का नहीं, ब्रह्मांड का तोहफा है; जानिए धरती के अंदर सोना कहां से आया....
Dharti per Sona Kahan Se aaya: यह जानकर आपको हैरानी होगी कि हम जो सोना पहनते हैं वह धरती पर हमेशा से मौजूद नहीं था। आईए जानते हैं कि धरती के अंदर सोना(Gold) आया कहां से।
Dharti per Sona Kahan Se aaya: सोना अक्सर सभी को पसंद होता है, चाहे वह नींद वाला हो या धातु वाला। आज हम आपको सोना धातु(Gold) के बारे में कई ऐसी चीजे बताएंगे जिसको जानकर आपके होश उड़ने वाले हैं। वैसे तो सोना काफी कीमती होता है इसके आभूषण काफी महंगे दामों में खरीदे और बेचे जाते हैं। सोने को धरती से निकालना और उसके आभूषण बनाने में काफी समय और मेहनत लगती है चूंकि यह धरती पर बहुत ही कम मात्रा में है इस वजह से भी यह काफी महंगा हो जाता है। यह जानकर आपको हैरानी होगी कि हम जो सोना पहनते हैं वह धरती पर हमेशा से मौजूद नहीं था। आईए जानते हैं कि धरती के अंदर सोना(Gold) आया कहां से।
ब्रह्मांड ने पृथ्वी को दिया एक कॉस्मिक तोहफा
अक्सर कई लोगों को यह लगता है कि सोना भी बाकी रेयर अर्थ मेटल की तरह धरती के अंदर ही बना है, लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है। सोना हमारी धरती पर बना ही नहीं है। भले ही हम खुदाई करके सोने को निकलते जरूर हैं पर इसका संबंध पृथ्वी से बिल्कुल ही अलग है। यहां तक की सोने का निर्माण सूर्य की ऊर्जा भी नहीं कर सकती क्योंकि इसे बनाने में सूर्य की ऊर्जा से भी कहीं अधिक दबाव की आवश्यकता है। सूर्य अपने नाभिकीय संलयन से केवल हल्के तत्वों का ही निर्माण कर सकता है, जो सोने के लिए काफी नहीं है।
असल में सोने का निर्माण ब्रह्मांडीय प्रक्रियाओं के माध्यम से हुआ है। सोने का निर्माण तब होता है जब अंतरिक्ष में विशाल तारे सुपरनोवा विस्फोट करते हैं या फिर दो न्यूट्रॉन तारे आपस में टकराते हैं। इस विस्फोट से इतनी प्रचंड ऊर्जा बाहर निकलती है जो किसी भी साधारण तत्व को भारी धातुओं में बदल सकता है और जब दो न्यूट्रॉन तारे आपस में टकराते हैं तब भी सोना बनता है, इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में न्यूक्लियोसिंथेसिस कहते हैं। ऐसी घटनाएं ब्रह्मांड की सबसे भयावह टक्करो में शामिल की जाती है।
इस भयानक टक्कर से कैसे होता है सोने का निर्माण
यह टक्कर इतनी भीषण होती है कि इससे निकली ऊर्जा और दबाव के वजह से परमाणु आपस में जुड़कर भारी तत्व जैसे सोने, प्लैटिनम और भी कई कीमती धातुओं में बदल जाते हैं। विस्फोट के बाद बने यह धातु अंतरिक्ष में चारों ओर फैलने लगते हैं। यह प्रक्रिया स्टेलर अल्केमी(Stellar Alchemy) कहलाती है।
धरती में आखिर कैसे दबा यह सोना
वैज्ञानिकों के अनुसार सुपरनोवा टक्कर में इतने ज्यादा सोने का निर्माण हो सकता है कि बृहस्पति ग्रह से भी बड़ा ठोस सोने का गोला बनाया जा सकता है। जब अरबों–खरबों साल पहले सौरमंडल के साथ-साथ पृथ्वी का भी निर्माण हो रहा था तब अंतरिक्ष में उल्का पिंड और सोने के बड़े-बड़े मलबे मौजूद थे। इसी टक्कर के वजह से धरती और अन्य ग्रहों का भी निर्माण हुआ और इसी समय ही सोने के कुछ हिस्से धरती के अंदर दब गए, जिन्हें आज खुदाई करके निकल जाता है। इस तरह से कहा जा सकता है कि हम जो सोना(Gold) पहनते हैं वह करोड़ों साल पुराना ब्रह्मांडीय मालबा है।