Bharat Ki Nadiyon Ke Naam Mahilaon Par Kyon Hai: क्यों हर नदी बन गई माँ! नदियों के नामों के पीछे छिपा ऐतिहासिक सच...
Bharat Ki Nadiyon Ke Naam Mahilaon Par Kyon Hai: आखिरी नदियों को स्त्री रूप में ही क्यों देखा गया? आईए जानते हैं नदियों के नाम से जुड़ी अनोखी बातें।
Bharat Ki Nadiyon Ke Naam Mahilaon Par Kyon Hai: पृथ्वी पर मानव सभ्यता के विकास के लिए सबसे बड़ी भूमिका नदियों ने निभाई है। भारत की प्रमुख नदियों में गंगा, यमुना, सरस्वती, भागीरथी, कावेरी, गोदावरी और भी कई अनगिनत नदियां है, जो प्राचीन काल से अब तक मानव सभ्यता को संरक्षण प्रदान किए हुए हैं। लेकिन क्या आपने इन नदियों के नाम पर कभी गौर किया है? लगभग अधिकतर नदियों के नाम को देखने पर पता चलता है कि यह सभी स्त्रियों के ही नाम है। आखिरी नदियों को स्त्री रूप में ही क्यों देखा गया? आईए जानते हैं नदियों के नाम से जुड़ी अनोखी बातें।
भारत में नदियों को है मां का दर्जा
भारत देश में आज से नहीं बल्कि हजारों सालों पहले से कई धर्मों और सनातन संस्कृतियों में नदियों को जीवन जीवनदायिनी माता के रूप में माना गया है। जिस प्रकार जन्म देने वाली माता अपने शिशुओं का पालन–पोषण और संरक्षण करती है ठीक उसी प्रकार नदियां भी हम सबको जीवन प्रदान करती हैं और पहले के समय में मनुष्यों का प्रकृति पर काफी निर्भरता थी इसी वजह से आज भी वनों को देवी स्वरूप और नदियों को माता की तरह पूजा जाता है।
यदि हम नदी शब्द के उत्पत्ति को जानने की कोशिश करें तो पता चलता है कि यह एक संस्कृत का शब्द है और स्वयं स्त्रीलिंग है। इसी वजह से प्राचीन ग्रंथो में भी नदियों के नाम संस्कृत भाषा के स्त्रीलिंग रूप में रख दिए गए, जो कि आज तक इन्हीं नामों से चली आ रही है।
नदियों में दिखता है स्त्रियों का स्वभाव
कई भारतीय ग्रन्थ में प्रकृति को शांत और सौम्य बताया गया है जो स्त्रीलिंग का स्वरूप है। इसके साथ ही कठोर और उग्र भी बताया गया है जो पुल्लिंग का बोध कराता है। नदियां स्वच्छंद पहाड़ों, जंगलों से बहती हुई और अपने रास्तों में आए सभी बाधाओं को हटाकर समुद्र में मिल जाती है। नदियों का यही विनम्र गुण उन्हें स्त्री स्वरूप से काफी करीब रखता है और इसके विपरीत पहाड़ जो अडिग खड़े रहते है, उन्हें पुल्लिंग माना गया है।
हालांकि कुछ ऐसे नदियों के नाम भी हैं जो पुरुषवाचक बताए जाते हैं। जिसमें ब्रह्मपुत्र, दामोदर और सोन जैसी नदियों को शामिल किया गया है। अतः यह कहा जा सकता है की नदियों के नामकरण में उनकी प्रकृति और स्वभाव को मुख्यतः देखा जाता था।