Bharat ka rashtriya dhwaj ko kisne design Kiya Hai: भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का इतिहास; किसने किया डिजाइन, कैसे भारत की पहचान! 99% लोग तिरंगे के बारे में नहीं जानते ये बातें!

Bharat ka rashtriya dhwaj ko kisne design Kiya Hai: क्या आपको भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के इतिहास के बारे में पता है? आखिर यह तीन रंगों वाला यह ध्वज भारत का राष्ट्रीय ध्वज कब बना? आईए जानते हैं भारत के राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास।

Update: 2026-01-25 13:33 GMT

Bharat ka rashtriya dhwaj ko kisne design Kiya Hai: 26 जनवरी और 15 अगस्त यह दोनों दिन भारत के इतिहास की बहुत खास तिथियां है, क्योंकि 15 अगस्त को भारत आजाद हुआ था और 26 जनवरी 1950 को भारत एक गणतंत्र राज्य बना था और इसी दिन ही भारत ने अपने संविधान को भी अपनाया। तब से लेकर आज तक हम सभी भारतवासी इन दोनों तिथियो को खास बनाने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम करते है, जिसमें सबसे प्रमुख है ध्वजारोहण और इसी ध्वजारोहण के रूप में हम अपने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को फहराते हैं। लेकिन क्या आपको भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के इतिहास के बारे में पता है? आखिर यह तीन रंगों वाला यह ध्वज भारत का राष्ट्रीय ध्वज कब बना? आईए जानते हैं भारत के राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास।

राष्ट्रीय ध्वज को किसने किया है डिजाइन

राष्ट्रीय ध्वज को डिजाइन करने वाले व्यक्ति का नाम है पिंगली वेंकैया, जो आंध्र प्रदेश के मछलीपत्तनम के रहने वाले हैं। इनका जन्म 2 अगस्त 1876 को हुआ था। पिंगली वेंकैया ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मद्रास में ही पूरी की फिर उच्च शिक्षा के लिए कैंब्रिज विश्वविद्यालय चले गए। वे संस्कृत, हिंदी, उर्दू और जापानी जैसी भाषाओं के महान ज्ञाता थे साथ ही उन्हें कृषि और हीरो की खदानों के बारे में भी काफी जानकारी थी।

कैंब्रिज से लौटने के बाद वेंकैया ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी जॉइन कर ली। 1899 के आसपास आर्मी ज्वाइन करते ही इन्हें दक्षिण अफ्रीका में चल रहे हैं युद्ध में भाग लेने के लिए भेज दिया गया और वहां जाकर उनकी जिंदगी पूरी बदल गई, क्योंकि इसी समय महात्मा गांधी भी दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर थे और यही वेंकैया की मुलाकात महात्मा गांधी से हुई। गांधी के विचारों ने वेंकैया को काफी प्रभावित किया और वे जब भी ब्रिटिश झंडे के सामने सलामी देते तो उन्हें इस बात का ख्याल जरूर आता की भारत का भी अपना झंडा जरूर होना चाहिए।

सालों की मेहनत के बाद तैयार हुआ तिरंगा

दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के बाद वेंकैया और उनके दो अन्य साथी एस.बी. बोमान और उमर सोमानी ने नेशनल फ्लैग मिशन की स्थापना की जिसके तहत इन्होंने झंडे के 25 से अधिक डिजाइन तैयार किए और 1916 में ’भारत के लिए एक राष्ट्रीय ध्वज’ नाम से पुस्तिका भी प्रकाशित की गई जिसमें 30 से भी झंडों के डिजाइन तैयार किए गए थे और इस तरह वे हर बार कुछ ना कुछ नया तैयार करते ही रहे।

महात्मा गांधी ने दी झंडे के डिजाइन को अंतिम मंजूरी

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का जब विजयवाड़ा अधिवेशन 1921 में हुआ तब वेंकैया ने महात्मा गांधी को झंडे का डिजाइन दिखाया। जिसमें लाल और हरे रंग की दो क्षैतिज पट्टियां बनी हुई थी जो हिंदू और मुस्लिमों की एकता का प्रतीक था पर गांधी जी ने यह सुझाव दिया कि यह झंडा पूरे भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, इसलिए इन दोनों रंगों के बीच में एक सफेद रंग की पट्टी और लगा दी जाए। इस सुझाव पर अमल करते हुए वेंकैया ने एक सफेद पट्टी और लगा दी साथ ही बीच में चरखे का छाप बना दिया और इस झंडे को स्वराज ध्वज के नाम से जाना जाने लगा।

वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज का जन्म

सन 1931 में लाल रंग की जगह केसरिया को सबसे ऊपर रखा गया, जो साहस का प्रतीक था। उनके बाद सफेद रंग को, जो सत्य और शांति का प्रतीक था। फिर अंत में हरे रंग को जगह दी गई, जो विश्वास और समृद्धि के लिए जाना जाता है।

भारत के आजाद होने से कुछ समय पहले यानी 22 जुलाई 1947 को संविधानसभा की एक बैठक में फिर कुछ बदलाव किए गए। जिसमें चरखे की जगह अशोक चक्र को रखा गया जो न्याय का प्रतीक है और इसकी 24 तिल्लियां लगातार विकसित होते हुए भारत को दर्शाती है इसके साथ ही ध्वज के डिजाइन का एक अनुपात (लंबाई-चौड़ाई का अनुपात 3:2) भी तय किया गया। अंततः 36 साल के मेहनत के बाद 15 अगस्त 1947 को इसे राष्ट्रीय ध्वज के रूप में पहली बार लाल किले से फहराया गया।

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