Bharat ka budget kaise pass hota Hai: संसद में कैसे पास होता है भारत का बजट? जानिए पूरी संवैधानिक प्रक्रिया!

Bharat ka budget kaise pass hota Hai: क्या आपको पता है कि संसद में बजट के पास होने की प्रक्रिया क्या है? आइए इस प्रक्रिया के बारे में जानते हैं जिसमें बजट को एक कानूनी रूप प्रदान किया जाता है।

Update: 2026-01-31 06:45 GMT

Bharat ka budget kaise pass hota Hai: बजट एक ऐसा दस्तावेज होता है जो किसी भी देश के लिए एक निश्चित अवधि में हुए आय और व्यय का अनुमानित खाका प्रस्तुत करता है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में बजट का काफी महत्व होता है क्योंकि यह सरकार की आर्थिक नीति और देश में होने वाले विकास की जानकारी भी देता है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां बजट संसद में हर साल वित्त मंत्री द्वारा पेश किया जाता है। बजट के प्रस्तुतीकरण के दौरान बताए गए वित्तीय लक्ष्य को प्राप्त करने के मार्गदर्शन और भविष्य में होने वाले खर्चों पर सबका ध्यान होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि संसद में बजट के पास होने की प्रक्रिया क्या है? आइए इस प्रक्रिया के बारे में जानते हैं जिसमें बजट को एक कानूनी रूप प्रदान किया जाता है।

भारतीय बजट को लेकर संविधान में दिए गए कानून

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भारतीय संविधान में ’बजट’ शब्द का कहीं उल्लेख नहीं किया गया है बल्कि इसके जगह पर अनुच्छेद 112 में इसे ’वार्षिक वित्तीय विवरण’ के रूप में दर्शाया गया है। जिसके तहत हर साल राष्ट्रपति को उस वित्तीय वर्ष के आय और व्यय की जानकारी संसद के दोनों सदनों के समक्ष देनी होती है। लेकिन व्यावहारिक तौर पर राष्ट्रपति द्वारा नहीं बल्कि वित्त मंत्री के द्वारा बजट को प्रस्तुत किया जाता है। संविधान में यह भी कानून है कि सरकार बिना किसी कानून के कर नहीं लगा सकती और ना ही कोई बड़ा व्यय कर सकती है। इसलिए सरकार को संसद में बजट पेश करने के बाद उसे पास भी करवाना पड़ता है। यदि बजट पास नहीं होता है तो सरकार गिरने की भी संभावना रहती है। आइए समझते हैं बजट के पास होने की प्रक्रिया।

बजट पास करने के 6 मुख्य चरण

1. बजट की प्रस्तुति/Presentation of Budget

बजट के पास होने का सबसे पहला चरण होता है बजट की प्रस्तुति। हर साल केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा 1 फरवरी को लोकसभा में बजट की प्रस्तुति होती है। इस दिन वित्त मंत्री अपना भाषण देते हैं और सरकार की प्रमुख नीतियों और विकास योजनाओं के बारे में पूरा विवरण भी प्रदान करते हैं। फिर संसद के अन्य सदस्यों को बजट का अध्ययन और इस पर अपनी प्रतिक्रिया तैयार करने के लिए भी समय दिया जाता है। बजट प्रस्तुत करने के एक दिन पहले वित्त मंत्रालय द्वारा आर्थिक सर्वेक्षण भी प्रस्तुत किया जाता है।

2. सामान्य चर्चा/General Discussion

बजट के प्रस्तुत होने के बाद उस पर सामान्य चर्चाएं होती हैं। होती है। यह चर्चा सदन के दोनों सदनों में लगभग तीन से चार दिनों तक चलती है। इस चरण में केवल सवाल–जवाब ही होते हैं, किसी प्रकार के मतदान और कट मोशन आदि पेश नहीं किए जाते। चर्चा के अंत में प्रमुख सवालों के जवाब वित्त मंत्री को देने होते हैं।

3. विभागीय स्थायी समितियां द्वारा जांच/Scrutiny by Departmental Committees

सामान्य चर्चाएं होने के बाद बजट को संसद की 24 विभागीय स्थायी समितियो के पास भेजा जाता है। इस दौरान दोनों सदनों को तीन से चार हफ्तों के लिए स्थगित कर दिया जाता है ताकि यह समितियां अपने मंत्रालय के अनुदान की मांगों (Demands for Grants) का विस्तृत जांच कर सकें। फिर ये समितियां संसद को अपने रिपोर्ट सौंप देती हैं।

4. अनुदान की मांग पर मतदान/Voting on Demands for Grants

स्थायी विभागीय समितियो के रिपोर्ट आने के बाद लोकसभा में हर मंत्रालय के अनुदान की मांग पर अलग-अलग मतदान किया जाता है। यह मतदान केवल लोकसभा में ही किया जाता है राज्यसभा में नहीं। इस दौरान लोकसभा के पास यह शक्ति होती है कि वह किसी भी मांग पर अपनी स्वीकृति या अस्वीकृति दे सकता है साथ ही वह बजट की राशि को भी कम या ज्यादा कर सकता है।

5. विनियोग विधेयक का पारित होना/Passing of Appropriation Bill

अनुदान की मांग को संसद में पारित करने के बाद विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) लाया जाता है। इसके बिना भारत की संचित निधि से धनराशि नहीं निकल जा सकती। इस विधेयक में भारत की संचित निधि पर भारित व्यय और अनुदान के मांग की राशि दोनों शामिल होती है और इस दौरान किसी भी संशोधन की मांग नहीं की जा सकती। अंत में राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक विनियोग अधिनियम बन जाता है।

6. वित्त विधेयक का पारित होना/Passing of Finance Bill

बजट पास होने की अंतिम प्रक्रिया में वित्त विधेयक पेश किया जाता है। जिसके तहत करो में हुए संशोधन या अन्य नियमों में हुए बदलावों को लागू किया जाता है। लोकसभा में पारित होते ही राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह विधेयक एक वित्त अधिनियम बन जाता है और इसी के साथ ही बजट के पास होने की प्रक्रिया पूर्ण होती है।

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