Akbar Ka Makbara kaha hai: क्या आप जानते हैं अकबर की मृत्यु कैसे हुई और कहां बना है उनका मकबरा, जानिए मुगल साम्राज्य की एक अद्भुत विरासत के बारे में...

Akbar Ka Makbara kaha hai: इस लेख में हम आपको बताएंगे कि सम्राट अकबर की मृत्यु कैसे हुई और उनका मकबरा आज कहां बना हुआ है।

Update: 2026-01-27 13:42 GMT

Akbar Ka Makbara kaha hai: जब भी हम भारत देश के इतिहास में नजर डालते हैं तो हमें पता चलता है कि यहां अनेक राजा महाराजाओं ने शासन किया और अपना साम्राज्य भी बढ़ाया है। आज हम मुगल साम्राज्य के महान सम्राट अकबर के बारे में बात करने वाले हैं। वैसे तो मुगलों को कट्टर मुस्लिम मानते है, क्योंकि ये अपने साम्राज्य के हर नागरिक को मुस्लिम धर्म अपने के लिए प्रेरित करते थे लेकिन सम्राट अकबर के खूबी थी कि वे धर्मनिरपेक्ष की राह पर चले और उन्होंने सभी धर्म को अपने राज्य में शरण दी। आज भी उनके द्वारा बनाए गए किले और इमारत देखने को मिलते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि सम्राट अकबर की मृत्यु कैसे हुई और उनका मकबरा आज कहां बना हुआ है।

उत्तर प्रदेश में स्थित है अकबर का मकबरा

मुगल साम्राज्य में अकबर के शासनकाल को काफी महत्वपूर्ण माना गया है, ऐसे में जब उसकी मृत्यु हुई तो एक खास मकबरे का निर्माण किया गया जो कि उत्तर प्रदेश के आगरा शहर के सिकंदरा में स्थित है। यह मकबरा मुगल स्थापत्य कला का एक अद्भुत नमूना है। इस जगह के नाम के पीछे भी एक कहानी है कहते हैं कि सिकंदर लोदी ने एक युद्ध के दौरान अपनी सेना के साथ इसी जगह पर पड़ाव डाला था जिस वजह से इस क्षेत्र का नाम सिकंदरा पड़ा। इस जगह को स्वयं अकबर ने ही अपनी अंतिम सांसों के लिए चुना था।

मकबरे का निर्माण कैसे हुआ

कहा जाता है कि सम्राट अकबर ने खुद जीवित रहते हुए इस मकबरे का निर्माण शुरू करवाया था। इनका शासन काल 1556 से 1605 तक था। जब अकबर की मृत्यु पेचिश से 1605 में हुई तो इस मकबरे का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ था। इसे आगे बढ़ने का काम अकबर के पुत्र जहांगीर ने करवाया फिर जब 1613 में यह मकबरा पूरी तरह से बना तो जहांगीर ने अपने पिता अकबर की इच्छा का मान रखते हुए उसे मकबरे में स्थापित करवाया। इस मकबरे की पूरे निर्माणकार्य में लगभग 15 लाख रुपए का खर्च आया था।

कैसी है मकबरे की संरचना

इस मकबरे का परिसर 119 एकड़ भूमि में फैला हुआ है, जो भी काफी विशाल है। इसका आकार कटे हुए पिरामिड की तरह बनाया गया है जो की मुगल वास्तुकला की पहचान है। इसमें लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर का प्रयोग किया गया है। यह मकबरा चार मंजिला है और सबसे ऊपरी मंजिल पर संगमरमर से बनी छतरियां बनाई गई है। इसकी पहली मंजिल पर गलियारे और एक हॉल बनाया गया है जहां अकबर का मकबरा बना हुआ। इस मकबरे के आसपास एक बड़ा सा बगीचा भी बनाया गया है जिसे अकबर की पत्नी मरियम-उज़-ज़मानी ने बनवाया। इस मकबरे की दीवारों को कुरान के शब्द और चमकीले पत्थरों से सजाया गया है।

मकबरे के दक्षिणी द्वार पर 172 फीट के चार मीनारे भी बनाई गई है। मुख्य मकबरे के दोनों ओर पांच–पांच मेहराबदार कमरे बने हुए हैं। अकबर चाहता था कि उसके परिवार के जितने भी सदस्य की मृत्यु हो उन सभी को इसी जगह पर दफ्न किया जाए। जिस वजह से यही पर अकबर की दो बेटियों, शक्र-उन-निस्सा बेगम और आराम बानू बेगम के साथ उसकी पत्नी मरियम-उज़-ज़मानी के मकबरे भी हैं। यहां महिलाओं के कब्र पर फूल–पत्ती और पुरुषों के कब्र पर कलम के निशान बने हुए हैं। इसी परिसर में एक कांच महल बना है जिसे जहांगीर ने बनवाया था और यही सिकंदर लोदी का मकबरा भी स्थित था, लेकिन इसके बेटे इब्राहिम लोदी ने इस मकबरे को दिल्ली के लोदी गार्डन में स्थापित करवाया।

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