DA Hike News: भोजन भत्ता महंगाई भत्ता में कब बदल गया, जानिए DA का इतिहास और भारत में कब से प्रारंभ हुआ...

DA Hike News: डीए महंगाई भत्ता है। जिसे सरकारी अधिकारी–कर्मचारियों व पेंशनर्स को देश में बढ़ रही महंगाई के अनुसार वेतन के अनुपात में सरकार प्रदान करती है। जिससे सरकारी कर्मी महंगाई का मुकाबला करते हुए जीवन स्तर जी सके।

Update: 2024-04-27 13:12 GMT

DA Hike News: एनपीजी। देश में अक्सर सरकारी कर्मचारियों के लिए डीए चर्चा में रहता है। डीए कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता है। यह नौकरीपेशा लोगों के लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं है। देश में बढ़ रही महंगाई से कर्मचारियों को राहत दिलाने व महंगाई के अनुरूप अपना जीवन स्तर उठाएं रखने के लिए कर्मचारियों को वेतन के अलावा महंगाई भत्ता दिया जाता है। महंगाई से आंकड़ों की तुलना कर उसी के अनुपात में वेतन के अनुसार डीए बढ़ाया जाता है।

महंगाई भत्ते का कॉन्सेप्ट द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शुरू किया गया था। तब इसे भोजन भत्ता के नाम से जाना जाता था। शुरुआत में डीए कर्मचारियों की वेतन संशोधन की मांगों के जवाब में दिया गया था। बाद में इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़कर दिया जाने लगा। भारत में साल 1972 में सबसे पहले महंगाई भत्ते की शुरुआत हुई। चौथे वेतन आयोग ने वर्ष में दो बार डीए भुगतान की सिफारिश की। सिफारिश के अनुसार 1 जनवरी और 1 जुलाई को डीए का भुगतान होना तय किया गया। महंगाई भत्ते को कर्मचारियों के लिए मुआवजे के एक रूप के आधार में मुद्रास्फीति के प्रभाव को संबोधित करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें कोई भत्ते का अनुपात तय नहीं किया गया है। बल्कि यह ग्राहक मूल्य सूचकांक के आधार पर बदलता रहता है।

महंगाई भत्ता ( डीए) है क्या? :–

डीए नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को मूल वेतन में एक अतिरिक्त भुगतान है। यह जीवनयापन की लागत का समायोजन है जो कर्मचारियों की सुविधा के लिए मुद्रास्फीति द्वारा निर्धारित किया जाता है। यह एक कर योग्य भत्ता है जो सकल वेतन के साथ आता है। यह केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों, राज्य सरकार के कर्मचारियों व सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों को ही मिलता है। इसके अलावा पेंशनधारियों को भी पेंशन के साथ डीए प्राप्त होता है। निजी क्षेत्रों के कर्मचारियों को डीए का भुगतान नहीं किया जाता। सरकार हर 6 महीने में एक बार डीए की गणना करती है।

महंगाई भत्ते की गणना:–

महंगाई भत्ते की गणना कर्मचारियों के मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में की जाती है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक ( सीपीआई) डीए ( महंगाई भत्ता) की गणना के लिए आवश्यक प्राथमिक कारक है। मुद्रास्फीति का मुकाबला करने के लिए कर्मचारियों के मुआवजे में एक महत्वपूर्ण समायोजन का प्रतिक डीए है। डीए देने के चलते जीवन यापन बढ़ती लागत के अनुसार कर्मचारियों की वास्तविक आय बढ़ जाती है।

सरकार हर 6 महीने में एक बार डीए की गणना करती है। केंद्र सरकार श्रम मंत्रालय की ओर से जारी एआईसीपीआई इंडेक्स के आंकड़े के आधार पर अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स के डीए– डीआर में साल में दो बार जनवरी और जुलाई ने समीक्षा करती है। चौथे केंद्रीय वेतन आयोग ने मूल वेतन (1986) के " प्रतिशत प्रणाली,पर डीए देने की सिफारिश की। जिसके बाद एक जनवरी व एक जुलाई को डीए बढ़ता है।

आधार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक या थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर डीए बढ़ता है। डीए को रिटेल यानी खुदरा महंगाई के आधार पर तय किया जाता है थोक महंगाई के आधार पर नहीं। खुदरा महंगाई उसे कहते हैं कि जो हम और आप किसी समान को खरीदने के बाद पेमेंट करते हैं।

आयकर के अंर्तगत आता है डीए:–

आयकर अधिनियम के अनुसार महंगाई भत्ता यानी की डीए कर योग्य होता है। यह कर्मचारी की कुल आय में शामिल होता है। कर्मचारियों को आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए फॉर्म 16 भरते वक्त डीए से प्राप्त आय की गणना करनी होती है।

अक्सर चार प्रतिशत ही क्यों बढ़ रहा डीए:–

एआईसीपीआई इंडेक्स के पिछले 6 महीनों के आंकड़े के आंकलन के आधार पर डीए बढ़ाया जाता है। यह सैलरी के अनुपात में बढ़ाया जाता। अक्सर आंकलन में महंगाई की दर एक समान बढ़ रही है। इसलिए महंगाई भत्ते में 4 फीसदी की बढ़ोतरी होती है। केंद्र सरकार अपने अधिकारी– कर्मचारियों व पेंशनरों को वर्तमान में 50% डीए प्रदान कर रहा है।

Tags:    

Similar News