रायपुर I "We the people of India", हमारे संविधान के प्रस्तावना की यह पहली लाइन जिसमें वी शब्द का प्रयोग पूरे भारत के देशवासियों को एक साथ संबोधित करते हुए उन्हें एक सूत्र मे बांधता है, और उन्हें भारतीय होने का हक प्रदान करता है जिससे उन्हें कोई बाधित नहीं कर सकता। इसलिए भारत का हर निवासी शान से अपने आप को हिंदुस्तानी कहता है। भले ही यह संविधान हमारी आजादी के 3 साल बाद तैयार हुआ हो पर इसने हमारी आजादी की खुशबू को कभी फीका नहीं होने दिया। जब तक हमारी आज़ादी को और
ज्यादा दिशा प्रदान की जिससे हम अपनी आजादी को सही मायने में महसूस कर पा रहे हैं। आज भारत अमृत महोत्सव के रुप में अपनी आज़ादी की 75 वीं वर्षगांठ का जश्न मनाने जा रहा है। सभी देशवासियों के लिए ये विशेष अवसर है। दो सौ साल अंग्रेजों की गुलामी झेलने के बाद 15 अगस्त 1947 को हम भारतवासी इनकी गुलामी की जंजीरों से आजाद होगए थे। तब से लेकर अब तक
हम अपने भारत को जो पहले कभी सोने की चिड़िया हुआ करता था, उसे आज भी सोने की चिड़िया बनाने में तत्परता से लगे हुए है। आि भारत ने सांस्कृनतक, राजनीतिक, शासकीय, सैन्य, खेल, तकनीकी, तथा शिक्षा जैसे हर क्षेत्र की विकास यात्रा में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। जिसकी वजह से एक सशक्त राष्ट्र के रुप में गिने जाते हरैं। 75 साल में हमने पूरी दुनिया में अपना विशिष्ट स्थान स्थापित किया है। हमने अपनी अंदरूनी समस्याओं और चुनौतियों को इस प्रकार हल किया है कि हम दुनिया में अपना कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। जो भारत लोगों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है, इसका श्रेय भारत के उन तमाम भारतवासियों को जाता है, जिन्होंने इसे यहां पहुंचाने में काफी मेहनत की है। इस 75 सालों में हमने बहुत कुछ पाया भी है और बहुत कुछ खोया भी है। एक तरफ हमारे पास जश्न मनाने की वजह है, तो दूसरी ओर अफसोस करने की वजह भी है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जिस आजाद भारत की कल्पना करते थे और जिस तरह का आजाद भारत बनाना चाहते थे, क्या भारत आज उसी कल्पना के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। नागरिकों से समाज और समाज से देश बनता है। बेहतर नागरिक शिष्ट समाज का निर्माण करता है। एक सही समाज देश को उन्नति के रास्ते पर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करता है, पर क्या देश और व्यक्ति के रूप में हम खड़े हैं, वो देश को उन्नति के मार्ग पर ले जाने के लिए सही है। जब 75 साल पहले 15 अगस्त 1947 को हमारा भारत देश आजाद तो हो गया पर विभाजन के साथ जिससे एक देश पाकिस्तान अस्तित्व में आया। कहने को तो वो एक मुस्लिम देश है, पर है तो हमारे ही देश का हिस्सा। हमारे ही भारत का अंग जिससे हम जाने कब से कभी न खत्म होने लड़ाई लड़ रहे हैं। पहले कश्मीर, फिर अक्साई चीन में हमें अपने भारत की जमीन खोनी पड़ी। उसके बाद कारगिल की लड़ाई, उरी हमला जैसे विवाद भी समय समय पर बने रहे, जिसने हमारे भारत को बहुत नुकसान पहुंचाया। हालांकि समाज को अपने साथ जोड़े रखने में सरकार को कामयाबी हासिल हुई। कई राज्यों में अलगाववादी ताकतों, आतंकवाद की चुनौतियों से निपटने और सीमा पर पाकिस्तान से लोहा लेते हुए भारत ने देश की संप्रभुता पर आंच नहीं आने दी है। जो बोलते थे भारत फकीरों का देश है, हाथ फैलाकर आजादी तो मिल गई, लेकिन कुछ कर नहीं सके। जबकि उसी आजाद भारत ने अपना पहला मंगल मिशन अपने दम पर पूरा किया। कोरोना जैसी महामारी के समय अपने साहस और विवेक का परिचय देते हुए न सिर्फ देशवासियों की मदद की, बल्कि दूसरे देशों को भी दवाइयां और अन्य जरुरतें मुहैया कराने में पीछे नहीं हटे हैं। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। जो विरोधी विचारों का हमेशा से सम्मान करता रहा है। जिसके कारण आज हमने एक परिपक्व देश के रूप में अपनी पहचान बनाई है। हमारे भारत देश में सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष को भी उतना ही महरत्व दिया जाता है, जिसके कारण विभिन्न मुद्दों पर गंभीर मतभेद होने के बावजूद भी हमारा लोकतंत्र कभी कमजोर नहीं पड़ा, बल्कि और मजबूत होता गया। ये भारत की ताकत को दर्शाता है। जिस आजाद भारत की सरकार ने अपनी जनता को सशक्त करने के सलए अनेकों कल्याणकारी नीतियां और योजनाएं बनाईं। जिसका लाभ कमजोर और गरीब लोगों तक पहुंचाया गया। जिनमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, मनरेगा, हर घर बिजली, हर घर पानी जैसे कार्यक्रम और योजनाओं ने अधधकार, मनरेगा, हर घर त्रबिली, हर आम आदमी को सशक्त बनाया है। ये योजनाएं पूरी तरीके से लागू तो नहीं हो पाई पर फिर भी उसने विकास की गति को धीमा नहीं होने दिया। जिसने आम आदमी को गरीबी से थोड़ी राहत पहुंचाई है। देश में अब भी गरीबी और पिछड़ेपन की समस्या है। जिससे निपटने का काम अभी भी चुनौती है। लेकिन वह दिन दूर नहीं जब हम गरीबी को पूरी तरीके से मात देकर एक खुशहाल भारत की नींव रखेंगे।
1990 के दशक के बाद के उदारीकरण, वैश्वीकरण, और विनिवेशीकरण के बाद भारत ने तेजी से विकास के रास्ते मैं अपने कदम बढ़ाए हैं। आि हमारे भारत ने आर्थिक, सैन्य और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में सफलता की एक लंबी छलांग लगाई है। कोरोना जैसी महामारी के कारण भारत की अर्थव्यस्था में आई भारी गिरावट भी उसकी उपलब्धि के रास्ते की रुकावट नहीं बनी। भारतीय अर्थव्यवस्था सारी चुनौतियों को पार करके तेजी से आगे बढ़ी है। जैसे हम अमेरिका, चीन, रसिया के बाद चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरे हैं। सैन्य क्षेत्र में रूस के राफेल के बाद हम एक महाशक्ति बनकर सामने आए हैं। इसके अलावा परमाणु हथियारों से संपन्न भारत के पास दुनिया की चौथी सबसे बड़ी शक्तिशाली सेना है। मिसाइल तकनीक में हम किसी से कम नहीं रहे, रॉकेट प्रक्षेपण क्षमता की बदौलत भारत अंतरिक्ष
क्षेत्र में महारत हासिल करने वाले दुनिया के देशों में शामिल हो गया है। भारत को कभी किसानों का देश कहा जाता था। लेकिन आज भारत आईटी सेक्टर में अग्रणी बना हुआ है। जो भारत 75 साल पहले गुलामों और कमजोर देश की श्रेणी में आता था वो भारत देश आजादी के 75 साल बाद एक महाशक्ति बनकर उभरा है। हमारा भारत यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल का अस्थायी मेंबर बन चुका है। हमारे पास हाथ फैलाकर मांगने की बजाय दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है। परंतु इसके बावजूद हमारे देश के सामाजिक और नैतिक मूल्यों में बहुत गिरावट आई है। व्यक्ति से लेकर राजनीति तक हर क्षेत्रों में पैसा, सत्ता, पावर ने अपने लोगों को भ्रष्ट बना दिया है, जिसने भ्रष्टाचार को जन्म दिया है। जिससे हमारी शिक्षा भी अछूती नहीं रही है, और उसका भी पतन होता दिख रहा है। जहां हमारी संस्कृति का अध्ययन करनेलोग बाहर से पढ़ने आते हैं। आज हम भारत वासी अपनी उसी संस्कृति को भूलते जारहे हैं। इसके लिए कोई एक व्यक्ति, नेता जिम्मेदार नहीं है। इसके लिए पूरा समाज जिम्मेदार है। इसे बेहतर बनाने के लिए पूरे समाज को मिलकर प्रयास करना होगा। तभी हम एक बेहतर और एक नेक भारत का निर्माण कर सकते हैं। भारत देश को हम अपने पूर्वजों की कल्पना का भारत बना सकते हैं। जो एक भारत नेक भारत की कल्पना पर खरा उतरता है और जो भारत के नए इंडिया के सपने को साकार करने में मदद करेगा। जय हिंद, जय भारत।
नाम- प्रियंका गुप्ता
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