Kalinga University: कलिंगा विश्वविद्यालय ने स्थानीय नवाचार और उद्यमिता के लिए, डेटा सशक्तिकरण पर बूट कैंप का किया आयोजन...
Kalinga University: बूट कैंप के उद्घाटन सत्र में कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने स्थानीय एवं सामाजिक चुनौतियों के समाधान हेतु डेटा-आधारित नवाचार और उद्यमिता के महत्व पर बल दिया।
Kalinga University: रायपुर। कलिंगा विश्वविद्यालय, रायपुर ने अपने आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के माध्यम से “स्थानीय नवाचार एवं उद्यमिता हेतु डेटा सशक्तिकरण” विषय पर एक पाँच दिवसीय बूट कैंप का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह बूट कैंप 27 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक सेमिनार हॉल, कलिंगा विश्वविद्यालय, नया रायपुर में संपन्न हुआ। इस बूट कैंप को उन्नत भारत अभियान (UBA) एवं आईआईआईटी हैदराबाद द्वारा प्रायोजित किया गया तथा इसका आयोजन संस्था नवाचार परिषद (Institution’s Innovation Council – IIC) के सहयोग से किया गया।
बूट कैंप के उद्घाटन सत्र में कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने स्थानीय एवं सामाजिक चुनौतियों के समाधान हेतु डेटा-आधारित नवाचार और उद्यमिता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सतत विकास एवं राष्ट्र निर्माण के लिए विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को डेटा साक्षरता और नवाचार कौशल से सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. विजयलक्ष्मी, निदेशक, आईक्यूएसी, कलिंगा विश्वविद्यालय ने गुणवत्ता-आधारित शैक्षणिक पहलों के महत्व पर जोर देते हुए इस प्रकार के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के आयोजन हेतु निरंतर संस्थागत सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि इस बूट कैंप का उद्देश्य प्रतिभागियों में नवाचार संस्कृति, उद्यमशील सोच तथा व्यावहारिक समस्या-समाधान कौशल को सुदृढ़ करना है।
बूट कैंप के अंतर्गत कलिंगा विश्वविद्यालय एवं संबद्ध संस्थानों से जुड़े अनुभवी शिक्षाविदों एवं पेशेवरों द्वारा विशेषज्ञ सत्रों का आयोजन किया गया। इन विशेषज्ञों में बूट कैंप के अंतर्गत अनुभवी शिक्षाविदों एवं पेशेवरों द्वारा विशेषज्ञ सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें शामिल रहे:
• नलिनी सोनी – रिसर्च असिस्टेंट, आईक्यूएसी, कलिंगा विश्वविद्यालय
• डॉ. अनुपा सिन्हा – सहायक प्राध्यापक, कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी संकाय
• डॉ. कमलेश कुमार यादव – सहायक प्राध्यापक, कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी संकाय
• आकांक्षा सोय – सहायक प्राध्यापक, कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी संकाय
• मोती रंजन टांडी – सहायक प्राध्यापक, कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी संकाय
• रूही खान – सहायक प्राध्यापक, कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी संकाय
• डॉ. अयाज़ अहमद फरीदी – सहायक प्राध्यापक, कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी संकाय
• अंजलि कडाओ – सहायक प्राध्यापक, कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी संकाय
• डॉ. सात्विक जैन – सहायक प्राध्यापक, वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय
• डॉ. निष्ठा शर्मा – विभागाध्यक्ष, वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय
• डॉ. कंचन ठाकुर – सहायक प्राध्यापक, वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय
• मानव गुप्ता – संस्थापक एवं प्रशिक्षक, स्पीकयात्रा
• अंकित कुमार पाटीदार – सहायक निदेशक, आईक्यूएसी
• डॉ. अनीता वर्मा – सहायक प्राध्यापक, भौतिकी विभाग एवं आईक्यूएसी समन्वयक
बूट कैंप में डेटा साक्षरता, डेटा संग्रह एवं विश्लेषण, डिजिटल भुगतान, सरकारी ई-सेवाएं, डिजिटल पहचान सत्यापन, वित्तीय समावेशन, बिजनेस मॉडल कैनवास, नवाचार ढांचे तथा सतत उद्यमिता जैसे व्यापक विषयों को शामिल किया गया।
बूट कैंप की सफलता आईक्यूएसी टीम के समर्पित प्रयासों से संभव हो सकी, जिसमें कार्यक्रम समन्वयक अभिषेक कुमार गुप्ता, अंकित कुमार पाटीदार, डॉ. अनीता वर्मा, नलिनी सोनी, अश्वन साहू, हेमंत कुमार, आदित्य विवेक वर्मा एवं पुष्पराज गेंढरे शामिल रहे।
बूट कैंप को छात्र स्वयंसेवकों का भी सशक्त सहयोग प्राप्त हुआ, जिनमें प्रियांशु सिंह, पीयूष श्रीवास्तव, सिम्पी कुमारी, वेदांत राज, मो. ताविस अंसारी, विशेश सतपथी, आशुतोष कुमार, गून शाह, चिलिकुरी शिवानी, मो. ऐमन शफी, लक्की कुमार तथा आदित्य शेखर शामिल थे। इनके सक्रिय योगदान से सत्रों का सुचारु संचालन, समन्वय एवं संपूर्ण कार्यक्रम प्रबंधन सफलतापूर्वक सुनिश्चित हो सका।
इस बूट कैंप में शिक्षकगण, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। प्रतिभागियों ने इंटरएक्टिव सत्रों, चर्चाओं एवं प्रायोगिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से सहभागिता की, जिससे डेटा-आधारित नवाचार एवं उद्यमिता की उनकी समझ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
समापन सत्र में कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. श्रीधर तथा डॉ. अंजनैयुलु बेंडी, उप अधिष्ठाता (शैक्षणिक कार्य) एवं प्रभारी अधिष्ठाता, विज्ञान संकाय की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की। कार्यक्रम के लिए कुल 80 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया। यह कार्यक्रम 31 जनवरी 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सत्रों, मूल्यांकन एवं प्रतिपुष्टि को सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले पात्र प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। यह पहल स्थानीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र एवं उद्यमशील क्षमताओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई, जिससे सामाजिक विकास को बढ़ावा मिला।