फूल-सब्जियों से महकी महिलाओं की जिंदगी
गेंदा फूल उत्पादन से महिलाओं के जीवन में आई खुशहाली
रायपुर 24 मार्च 2023 I परम्परागत खेती की जगह आधुनिक खेती छत्तीसगढ़ में फायदे का सौदा साबित हो रही है। इससे कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत तुड़गे के गौठान में काम कर रही महिलाओें की जिन्दगी भी अब महकने लगी है। शीतला स्व-सहायता समूह की इन महिलाओं ने तुड़गे के गौठान की महज चार डिसमिल भूमि में कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहयोग से पहली बार गेंदा फूल के टेनिस बॉल किस्म की खेती शुरू की है। पहली बार में ही महिलाओं को अच्छा मुनाफा हो रहा है। समूह की महिलाएं औसतन 100 रुपए प्रति किलो की दर से गेंदा फूल की बिक्री कर रही हैं। उन्होंने अब तक 150 किलोग्राम फूल बेच कर 15 हजार रुपए कमाए हैं। महिलाओं ने बताया कि करीब 300 किलोग्राम से अधिक फूलों का उत्पादन होने की संभावना है, जिससे समूह को अच्छी आमदनी मिलेगी। इस सफलता से इन महिलाओं के चेहरे की खुशी दोगुनी हो गई है। महिला समूह की सक्रिय सदस्य सुलोचना रावटे, शांति नेताम, मालती नरेटी, मंगतीन नेताम, बृजबत्ती, गिरजा बाई और विमला बताती हैं कि गौठान में वर्मी खाद उत्पादन के अलावा पहली बार ट्रायल के रूप में गेंदा फूल की खेती की जा रही है। खेती के लिए टेनिस बॉल नाम के गेंदा फूल की हाइब्रिड वैरायटी के बीज को मंगवाया गया है। इसके लिए पहले नर्सरी तैयार की गई तथा रोपाई के बाद फूलों की हार्वेस्टिंग की गई। उन्होंने बताया कि फूलों की खेती में खास बात यह है कि इससे कम पानी, कम लागत और कम मेहनत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। गेंदा फूल की मांग भी वर्षभर बनी रहती है। उन्होंने अपने नए रोजगार एवं हो रही आमदनी के लिए राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है।
मुनाफा और डिमांड ज्यादा
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया गया कि टेनिस बॉल गेंदा फूल पौधे की हाइट 3 से 4 फुट की होती है। तीन माह में फूल आना शुरू हो जाता है और पैदावार भी अधिक होती है। गेंदा फूल की खेती में अधिक मुनाफा है, इसकी डिमांड भी अच्छी है। उन्होंने बताया कि गोधन न्याय योजना के तहत बनाए गए गौठानों के माध्यम से स्व-सहायता समूहों के महिलाओं को आजीविका गतिविधियों एवं स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है। महिला समूह भी वर्मी-कम्पोस्ट खाद उत्पादन के साथ गेंदा फूल की खेती में काफी रूचि ले रही हैं।
सब्जी से सबल होती महिलाएं
छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ग्राम सुराजी गांव योजना ने गांवों में महिलाओं के जीवन में समृद्धि का नया अध्याय शुरू किया है। इससे न सिर्फ उनके लिए आय के नए रास्ते खुले हैं, बल्कि वे उन्नत तरीकों को समझकर खेती-किसानी के नए मापदण्ड स्थापित कर रही हैं। कांकेर जिले के बेंवरती गांव के जय बूढ़ी मॉ स्व-सहायता समूह की 10 महिलाओं ने ग्राम सुराजी योजना अंतर्गत गौठान में सब्जी उत्पादन कर एक साल में ही डेढ़ लाख की सब्जी विक्रय कर मुनाफा कमाया है। अब इस साल समूह की महिलाओं ने कृषि विज्ञान केन्द्र के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्नत किस्म के खुले परागण वाले सब्जियों के बीज उत्पादन का कार्य भी प्रारंभ किया गया है।
1 लाख 50 हजार रूपए की बेची सब्जी
जय बूढ़ी मॉ स्व-सहायता समूह की महिलाओं को कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर द्वारा पिछले साल उनकी आजीविका एवं आय में वृद्धि के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया गया। जिला खनिज संस्थान न्यास निधि मद से 02 एकड़ में टपक सिंचाई की व्यवस्था कराई गई। इससे महिलाओं द्वारा लगभग 01 लाख 50 हजार रूपये का सब्जी उत्पादन कर विक्रय किया गया। उनके द्वारा माह मई 2022 में खरीफ फसल के अंतर्गत जिमीकंद, हल्दी, अदरक, कोचई, भिण्डी एवं अमारी भाजी तथा चारा फसल अंतर्गत नेपियर घास इत्यादि का उत्पादन किया गया। साथ ही रबी मौसम में आलू, मटर, भिंडी, टमाटर, मिर्च, मूली, बरबट्टी, लौकी, परवल एवं बैगन इत्यादि सब्जी फसल बीज उत्पादन हेतु लगाई गई है। उनके द्वारा सब्जी बीज उत्पादन से आस-पास के किसानों को उन्नत किस्म के सब्जी बीज आसानी से उपलब्ध होगा, जिससे सब्जी उत्पादन बढे़गा। प्रति व्यक्ति सब्जियों की उपलब्धता बढ़ने से पोषण स्तर में भी सुधार आयेगा और महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होगी।