श्रमिकों का सम्मान: भूपेश बघेल ने बोरे-बासी खाकर श्रमिकों का सम्मान बढ़ाया, बोरे-बासी को सुपर फूड का दिलाया मान
रायपुर 16 मई 2023 I खानपान और रहन सहन संस्कृति से जुड़ा मुद्दा है। छत्तीसगढ़ में कहावत है कि जैसे खाए अन्न वैसा होय मन। यह कहावत बिलकुल छत्तीसगढ़ में सही उतरती है। बोरे-बासी एक सरल और सहज भोजन है। बोरे बासी का नाम जुबां पर आते ही छत्तीसगढ़ के लोगों के जेहन में बोरे बासी के साथ आम की चटनी अर्थात अथान की चटनी, भाजी, दही और बड़ी-बिजौड़ी की सौंधी-सौंधी खुशबू से मन आनंदित हो जाता है। मुंह में पानी और चेहरे में बोरे बासी खाने की लालसा और ललक स्पष्ट दिखाई देती हैं। कुछ साल पहले तक यह सामान्य समझ थी कि बोरे बासी सिर्फ राज्य के मजदूर और किसानों का प्रिय आहार है, लेकिन अब हमारे राज्य के बोरे बासी को देश के साथ विदेशी लोग भी बड़े चाव से खा रहे हैं। दरअसल में बोरे बासी छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आहार का अभिन्न हिस्सा रहा है। यहां के मजदूर किसान गर्मी के दिनों में बोरे बासी खाकर ही काम में निकलते थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहचान जनकल्याणकारी और राज्य की कला-संस्कृति, को बढ़ावा देने के लिए अभिनव पहल के लिए हैं। उन्होंने राज्य की मूल संस्कृति और रीति-रिवाजों को संरक्षण एवं संवर्धन की दृष्टि से शुरू की गई। सभी योजनाओं और कार्यक्रमों को राज्य के सभी वर्ग के लोगों से पूरा समर्थन भी मिलते आया है। इसी कड़ी में बोरे-बासी भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अभिनव पहल में एक है, जिसें लोगों का पूरा-पूरा सहयोग मिल रहा है। पिछले साल और इस साल भी छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने श्रमवीरों के सम्मान में स्वयं बोरे बासी खाया। उन्होंने 1 मई श्रमिक दिवस को बोरे बासी तिहार के रूप में मनाने अपील की और लोगों ने उत्साह के साथ मनाया भी। बोरे-बासी तिहार से नई पीढ़ी के लोगों को भी छत्तीसगढ़ की परंपरा और संस्कृति से जुड़ने का मौका मिला है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रची-बसी बोरे-बासी यहां के लोकगायन ददरिया और नाटकों में भी बोरे बासी का विवरण मिलता है। 'बटकी म बासी अउ चुटकी म नून, मैं गात हंव ददरिया तैं कान देके सुन।' बहुत लोकप्रिय है।
क्या है बोरे-बासी
बोरे बासी वास्तव में फ़रमेंटेड चावल है। पके चावल को माड़ और पानी के साथ रात को भिगोकर रख दिया जाता है और सुबह इसका सेवन किया जाता है, इसे बोरे बासी कहते हैं। एक शोध के मुताबिक 100 ग्राम चावल में 3.4 मिलीग्राम आयरन होता है। अगर इसे 12 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखा जाए तो आयरन की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है, जो शरीर के लिए लाभदायक होता है। इसमें सोडियम के अलावा, पोटेशियम, कैल्शियम होता है। इस प्रक्रिया में चावल में कई स्वास्थ्य वर्धक गुणों का समावेश हो जाता है और यह नियमित सामान्य चावल की तुलना में अधिक लाभकारी हो जाता है। यदि कोई डायबिटिक पेशेंट है, तो सामान्य चावल की जगह कोदो चावल का प्रयोग कर सकते हैं और हाई ब्लड प्रेशर के पेशेंट सामान्य नमक की जगह कम मात्रा मे सेंधा नमक का प्रयोग करके बोरे-बासी खा सकते हैं। कुल मिलाकर बोरे-बासी एक सस्ता पौष्टिक सुपर फ़ूड है।
श्रम का प्रतीक बोरे और बासी
बोरे और बासी श्रम का प्रतीक है। कर्क रेखा के क्षेत्र में पड़ने वाले हमारे प्रदेश में कड़ी धूप में श्रम के लिए मेहनतकश लोगों को तैयार करने में बोरे-बासी से विशेष मदद मिलती है। गोंदली अर्थात प्याज के साथ बोरे बासी का स्वाद शरीर को ताजगी प्रदान करता है और डिहाइड्रेशन के खतरे को कोसों दूर रखता है। छत्तीसगढ़ में प्याज को लेकर मान्यता भी है कि इससे लू नहीं लगती। माताएं अपने बच्चों को घर से निकलते वक्त उनके जेब में प्याज रखा देती हैं। इस तरह गोंदली और बोरे बासी का संयोग लू से लड़ने की ताकत देता है।
डॉक्टर रिकमंड करते हैं बोरे-बासी
महासमुंद से लगभग 40 किलोमीटर दूर ग्राम पटेवा के पास ग्राम रायतुम में एक ऐसा नेचर क्योर सेंटर है जहां डॉक्टर भी मरीज के डाइट में बोरे बासी को अनिवार्य और मुख्य आहार के रूप में शामिल करते हैं। यहां के डॉक्टरों का मानना है कि बोरे बासी में भरपूर विटामिन बी 12, कैल्शियम, पोटेशियम सहित अनेक पौष्टिक गुण के साथ हृदय रोग, स्किन रोग, डायरिया सहित अनेक रोगों से लड़ने की क्षमता है। ग्राम रायतुम में वर्ष 2018 से फाइव लोटस इंडो जर्मन नैचर क्योर सेंटर संचालित है जहां बोरे बासी अन्य डाइट के साथ इलाज का मुख्य माध्यम है। यहां की चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर रंजीता के मुताबिक बोरे बासी में चावल में पाए जाने वाले आर्सेनिक की मात्रा को कम करने की अद्भुत क्षमता है। इसके अलावा यह शरीर मे आयरन की कमी को दूर करता है, पेट को ठंडक पहुंचाता है और गर्मी में लू लगने से बचाता है। यहां तक कि यह पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।
प्रोबायोटिक्स से भरपूर बोरे-बासी
फ़र्मेंटेशन की प्रक्रिया इसमें से अतिरिक्त वसा को हटा देती है। बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन के, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम और सेलेनियम को बढ़ा देती है। फ़र्मेंटेशन की प्रक्रिया से बोरे बासी लैक्टोबैसिलस, लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया जैसे लाभकारी प्रोबायोटिक्स से भरपूर होते हैं। फर्मेंट करने की प्रक्रिया से प्रोबायोटिक बनते है जिससे पाचन मजबूत होता है और पाचन तंत्र की बहुत सी बीमारियों में लाभ मिलता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। बोरे-बासी को पचाना भी आसान है। शरीर में पानी की मात्रा को बनाए रखने के बासी भरपूर मदद करता है। गर्मियों में शरीर और मन दोनों को ठंडा ठंडा कूल कूल रखने में बोरे बासी मदद करता है। यदि स्वास्थ्य के अतिरिक्त लाभ की बात करें तो यह स्वादिष्ट होने के साथ साथ कम बजट पौष्टिक खाना है। जो ना केवल श्रमिकों के लिए एक एनर्जी फूड अपितु सभी लोगोँ के एक सुपर फूड है। बोरे-बासी के सभी प्रकारों में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, फ्राइबर, एनर्जी और विटामिन्स, मुख्य रूप से विटामिन बी-12, खनिज लवण जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। बोरे बासी, पिज्जा और मोमोस जैसे खाद्य पदार्थों से ज्यादा पौष्टिक,स्वादिष्ट और सेहदमंद है। लघु धान्य रागी 100 ग्राम में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व पाया जाता है, जिसे इस तरह समझा जा सकता है। प्रोटिन सौ ग्राम में 7.3 ग्राम, फैट 1.3 ग्राम, एनर्जी 328 ग्राम, फ्राईबर 3.6 ग्राम, मिनिरल्स 2.7 ग्राम, कैल्सियम 344 ग्राम, आयरन 3.9 ग्राम मिलता है।
बढ़ती है एकाग्रता और मेमोरी पॉवर
सप्ताह में यदि तीन बार भी बोरे बासी खाया जाए तो इससे मेमोरी पावर गेन होती है और एकाग्रता बढ़ती है। डॉक्टर रंजीता के मुताबिक बोरे बासी के सेवन से माउथ अल्सर के उपचार में भी मदद मिलती है। शिशुवती माताओं के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। बोरे बासी खाने से मां का दूध भी पर्याप्त मात्रा में बनता है उन्होंने कहा कि यहां बोरे बासी में अदरक, दही, हरी मिर्च, सेंधा नमक, काला नमक, प्याज मिलाकर और राई के छौंक लगाकर यहां भर्ती मरीजों को दिया जाता है। इससे इसका स्वाद भी बढ़ता है साथ ही मरीजों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है।
होटलों के मेन्यू में भी बोरे-बासी
छत्तीसगढ़ के रेस्टोरेंट और होटलों के मेन्यू में भी बोरे बासी को शामिल किया गया है। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बोरे बासी का शोध अमेरिका में भी किया जा चुका है। वहां इसका अंग्रेजी नाम होल नाइट वाटर सोकिंग राइस रखा है।