शंशय रूपी ताड़का का नाश राम रूपी ज्ञान से ही संभव, आचार्य हरि तिवारी महाराज

Update: 2022-10-31 17:08 GMT

श्री राम कथा आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी अजय साहू ने बताया कि भनपुरी में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम चरित्र मानस कथा के चौथे दिन अयोध्या से पधारे आचार्य श्री हरि तिवारी महाराज जी ने राम जन्मोत्सव एवं अहिल्या उद्धार की कथा सुनाते हुए कहा कि शंशय रूपी ताड़का का नाश राम रूपी ज्ञान से ही संभव है! संत तुलसी दास के पावन ग्रंथ का अवलोकन करने पर हम सब पाते हैं कि एक -एक चौपाई बहुत सोच समझकर अध्यात्म के साथ लिखी गई है! एक और श्री राम के प्रतिक ज्ञान मूर्तिमान स्वरूप है वही मां सीता शांति स्वरूपा है तथा लक्ष्मण वैराग्य है! श्री रामजन्मोत्सव कथा का श्रवण कराते हुए महाराज श्री ने कहा कि भगवान का प्रकट्य भक्तों के प्रेम से होता है! भगवान के लिए रावण वध कोई बहुत बड़ी बात नहीं है जिनके भिकुटी विलास से प्रलय हो जाता है,उनके लिए रावण वध बहुत छोटी बात है! वस्तुतः भगवान श्रीराम का जन्म शबरी माता जैसी भक्तिमति को दर्शन देना था तथा समस्त ऋषि-मुनियों को दर्शन देना ही मुख्य हेतु था! वही मनुष्य को यह भी सिखाना था कि हम सबको अपने अच्छे एवं बुरे कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है चाहे ईश्वर ही मनुष्य रूप क्यों ना अवतरित हुए हो! महाराज श्री ने प्रभु श्री राम की विशुद्ध बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए अनेक सुमधुर भजनों का गायन किया! महाराज श्री ने कहा कि माता अहिल्या का पतन रज के कारण हुआ था! प्रत्येक मनुष्य में सत,रज,तम प्रवति होती है! अहिल्या का पतन का रज के कारण हुआ था इसलिए उनका उद्धार प्रभु श्री राम के चरण रज से हुआ! स्वभाविक बात है जिस व्यक्ति का पतन चरित्र की कमजोरी से होता है उसका उद्धार वही व्यक्ति कर सकता है जिसका चरित्र बहुत उज्जवल हो! प्रभु श्री राम के बारे में संत तुलसी दास जी ने लिखा है ( सपनेहूं नहीं पर नारी निहोरी) जिस व्यक्ति का मन स्वपन में भी पराई स्त्री की ओर ना गया हो वह कितना बड़ा जीतेंद्री होगा! यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है! महर्षि वाल्मीकि ने भी भगवान राम के इन्हीं गुणों के चलते अपने रामायण का मुख्यपात्र चुना! कथा के पूर्व गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्रीं राम सुंदर दास जी, रायपुर ग्रामीण के विधायक सत्यनारायण शर्मा जी एवं समाजसेवी प्रेम तिवारी जी ने महाराज श्री का पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया!

आज की कथा में अध्यक्ष रूकुम लाल वर्मा, जीत सिंह, कमलेश मिश्रा, चंदन पाठक, राजेश मिश्रा, शेखर साहू, चेतन यादव, मनोज वर्मा, अमित सरकार, विपिन शुक्ला,रवि मिश्रा, दीनू साहू, पंडित सतानंद मिश्रा, हीरालाल कुर्रे, देवी शंकर तिवारी, सोमनाथ यादव, गायत्री सिंह, राखी मिश्रा, रजनी मिश्रा, गायत्री वर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे

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