पारंपरिक खेलों की लहराई पताका

छत्तीसगढ़िया ओलिंपिक में युवा से लेकर बुजुर्ग तक उत्साह से हिस्सा ले रहे

Update: 2022-11-09 12:52 GMT

रायपुर 30 अक्टूबर 2022 I  मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों को भी तवज्जो देने और लोगों में खेल के प्रति जागरूकता लाने के लिए छत्तीसगढ़िया ओलिंपिक का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन से ग्रामीण अंचलों का खेल अब गांवों से निकलकर शहरों तक पहुंचेगा।

छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों के प्रति लोगों की रूचि बढ़ाने के लिए राज्य सरकार गांव, नगर, कस्बों में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन कर रही है। इस खेल महाकुंभ को लेकर बच्चों से लेकर युवा, पुरुषों और महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। हर वर्ग के लोग पारंपरिक खेलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।इसकी शुरुआत राजीव युवा मितान क्लब स्तर से हुई। इसके बाद जोन स्तर, फिर विकासखंड, नगरीय क्लस्टर स्तर, जिला, संभाग और अंतिम में राज्य स्तर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। 6 अक्टूबर 2022 से 6 जनवरी 2023 तक राज्य में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है। ओलंपिक में दलीय एवं एकल श्रेणी में 14 तरह के पारम्पिक खेल शामिल किए गए हैं। जिनमें गिल्ली डंडा, पिट्टूल, लंगड़ी दौड़, बांटी (कंचा), बिल्लस, फुगड़ी, गेड़ी दौड़, भंवरा की प्रतियोगिता शामिल हैं। छह स्तरों में होने वाली इस प्रतियोगिता में महिला और पुरुष के अलग-अलग वर्ग हैं। जाहिर तौर पर इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक के प्रतिभागी बन रहे हैं। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रत्येक आयु वर्ग के एकल और दलीय प्रतिस्पर्धा के लिए अलग-अलग पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। दलीय खेल विधा में प्रथम पुरस्कार 10 हजार रूपये, द्वितीय पुरस्कार 7 हजार 500 रूपये, तृतीय पुरस्कार 05 हजार रूपये से पुरस्कृत किए जाएंगे। इसी तरह एकल विद्या में प्रथम पुरस्कार 01 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 750 रुपये, तृतीय पुरस्कार 500 रूपए तय किए गए हैं।


लोग इन खेलों को भूल रहे थे: भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर के सरदार बलवीर सिंह जुनेजा इनडोर स्टेडियम में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की शुरुआत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सभ्यता और विशिष्ट पहचान यहां की ग्रामीण परंपराओं और रीति रीवाजों से है। इसमें पारंपरिक खेलों का विशेष महत्व है। पिछले कुछ सालों में छत्तीसगढ़ के इन खेलों को लोग भूलते जा रहे थे। खेलों को चिरस्थायी रखने, आने वाली पीढ़ी से इनको अवगत कराने के लिए छत्तीसगढ़ियां ओलंपिक खेलों की शुरूआत की गई है। छत्तीसगढ़ के ये खेल मनोरंजक होने के साथ साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक हैं।

आपको खेलते हम सब देखेंगे: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 'छत्तीसगढ़िया ओलंपिक' में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से अपील करते हुये कहा है– यदि आप भी 'छत्तीसगढिया ओलम्पिक' में भाग ले रहे हैं, तो आपको खेलते हुए हम सब देखेंगे। सभी खेलते हुए अपनी फोटो/वीडियो हैशटैग #CGOlympics2022, #KhelboChhattisgarh के साथ सोशल मीडिया पर साझा कर सकते है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल गतिविधियों को ग्रामीण क्षेत्र एवं नगरीय क्षेत्रों में प्रोत्साहित करने, प्रतिभागियों को मंच प्रदान करने, उनमें खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और खेल भावना का विकास करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने अपनी अपील में कहा कि प्रतिभागी मुझे @BhupeshBaghelCG/@BhupeshBaghel/@BhupeshBaghelinc टैग या फिर मेंशन कर सकते हैं।

जब खुद रैफरी बन गए सीएम

मुख्यमंत्री की सादगी, संजीदगी और स्थानीय संस्कृति के प्रति लगाव का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री खुद रेफरी की सीटी लेकर महिला कबड्डी खिलाड़ियों के बीच पहुंच गए और मैच में निर्णायक की भूमिका निभाने लगे। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने लंगड़ी, भौंरा, बाटी (कंचा) और पिट्ठुल जैसे खेलों मे खिलाड़ी के रूप में खुद भी हाथ आजमाया और अन्य खिलाड़ियों के साथ खुद को एक खिलाड़ी के रूप में प्रस्तुत किया और खिलाड़ियों का उत्साह वर्धन किया। अपने मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर स्थानीय लोगों को एक तरफ खेल का मंच मिलेगा वहीं उनमें खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और खेल भावना का भी विकास होगा।


हर उम्र के लोग दिखा रहे हुनर

इन पारंपरिक खेल प्रतिस्पर्धाओं में तो लोग हिस्सा ले ही रहे हैं, प्रतिभागियों का उत्साह और हौसला बढ़ाने के लिए खासी भीड़ भी जुट रही है। खेल मैदान में वृद्धजन नजर आ रहे है, जो बरसों से इन खेलों से दूरी बना रखे थे, लेकिन अब मैदान में उतरकर अपने पुराने दिनों की यादों को ताजा कर रहे हैं। यह आयोजन छह चरणों में होना है। अभी तक दो चरण में प्रतिस्पर्धाएं हो चुकी है। राज्य सरकार ने इस आयोजन के माध्यम से ऐसे लोगों को अपना खेल हुनर दिखाने का अवसर दिया है, जो खुद की खेल प्रतिभा से अंजान थे। राजीव युवा मितान क्लब एवं जोन स्तर पर खेल प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन हेतु प्रत्येक स्तर के लिए अलग-अलग विकासखंड नगरीय क्लस्टर स्तर पर आयोजन के लिए समिति का गठन किया गया है।

पारंपरिक खेलों के संवर्धन को प्रतिबद्ध सरकार

छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार जिस तरह से छत्तीसगढ़ी परंपरा विरासत और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को सहेजने में लगी है। उसी तरह से प्रदेश के पारंपरिक खेल कंचा, भंवरा, कबड्डी, खो-खो, लंगडी दौड़, 100 मीटर दौड़, कुर्सी दौड़, पिट्ठुल, गेड़ी दौड़, बिल्लस फुगड़ी, गिल्ली डंडा, लंबी कूद जैसे पारंपरिक खेलों को भी बचाए रखने के लिए प्रयासरत है। इन खेलों के प्रति लोगों में रूचि बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रदेश में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन कर रही है। मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ में पारम्परिक खेल गतिविधियों को ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में प्रोत्साहित करने के लिए पहल की गई है। छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक से प्रतिभागियों को एक ओर जहां मंच मिलेगा। वहीं दूसरी तरफ उनमें खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और खेल भावना का विकास होगा।

घरेलु महिलाएं भी आजमा रहीं हाथ

ग्रामीण क्षेत्र की ऐसी महिलाएं जो हमेशा घर के काम-काज में व्यस्त रहती हैं उन्हें भी छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के माध्यम से मैदान में उतरने का मौका मिला है। इस कारण महिलाएं उत्साहित हैं और एक दो नहीं, बल्कि कई खेल प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा ले रही हैं।

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