किसानों की बल्ले-बल्ले: चार साल में किसानों की संख्या 17 लाख से बढ़कर 24 लाख हुई
खेती का रकबा भी 25 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 30 लाख हेक्टेयर
रायपुर 29 नवंबर 2022 I धान के कटोरा यानी छत्तीसगढ़ में किसानों को देशभर में सबसे ज्यादा धान पर एमएसपी मिलता है। केंद्र सरकार द्वारा तय एमएसपी के बाद किसानों को प्रति एकड़ 9 हजार इनपुट सब्सिडी दी जा रही है। इसलिए हर साल धान बेचने वाले किसानों की संख्या बढ़ती जा रही है। 2018 से 2022 तक किसानों की संख्या 17 लाख से बढ़कर 24 लाख हो गई है। खेती का रकबा भी 25 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 30 लाख हेक्टेयर हो गया है। इस साल 95 हजार नए किसानों ने पंजीयन कराया है और सरकार ने भी रिकॉर्ड धान खरीदी का लक्ष्य रखा है। जाहिर है इस बार किसान मालामाल होंगे।
छत्तीसगढ़ के धान खरीदी केद्रों में लगातार धान की आवक बढ़ रही हैं। सभी धान खरीदी केन्द्रों में किसानों से धान खरीदनें के लिए सभी इंतजाम रखें गये हैं। किसानों को उनके बेचे गए धान का भुगतान भी उनके खातों में किया जा रहा हैं। 1 नवंबर से चालू धान खरीदी सीजन में 14 नवंबर तक 4 लाख 20 हजार 365 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। लगभग 1 लाख 33 हजार 620 किसानों ने धान बेचा है। धान के एवज में किसानों को बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत 854.98 करोड़ रुपये का भुगतान जारी कर दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष 110 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन अनुमानित है। समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए प्रदेश में 25.92 लाख किसानों का पंजीयन हुआ है, जिसमें लगभग 2.15 लाख नये किसान है। राज्य में धान खरीदी के लिए 2497 उपार्जन केन्द्र बनाए गए हैं। इस साल किसानों से सामान्य धान 2040 रूपए प्रति क्विंटल तथा ग्रेड-ए धान 2060 रूपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए धान का उठाव हो रहा है। अब तक 2 लाख 64 हजार 258 मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डी.ओ. जारी किए गए हैं। जिसके एवज में उपार्जन केंद्रों से 84 हजार 613 मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है।
110 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य
खरीफ वर्ष 2022-23 में किसानों से 110 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी प्रस्तावित है। इतना धान रखने के लिए 5 लाख 50 हजार गठान बारदाने की आवश्यकता होगी। धान खरीदी के लिए केंद्र सरकार की नई बारदाना नीति अनुसार 50:50 के अनुपात में नये एवं पुराने बारदाने में धान की खरीदी की जानी है। धान उपार्जन के लिए आवश्यक 2 लाख 97 हजार गठान में से 2 लाख 37 हजार गठान बारदाने जूट कमिश्नर से खरीदने की अनुमति केंद्र सरकार ने दी है।
16 जिलों में 28 नए धान खरीदी केंद्र
छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को धान बेचने में होने वाली परेशानी से बचाने के लिए प्रदेश के 16 जिलों में 28 नये केंद्र खोलने की अनुमति जारी कर दी है। इन केंद्रों पर धान खरीदी की सभी आवश्यक सुविधाएं करने को कहा गया है। अभी तक प्रदेश भर में दो हजार 497 केंद्रों पर धान की खरीदी की जा रही थी। प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी एक नवंबर से शुरू हुई है। करीब एक लाख पांच हजार किसानों ने 11 नवंबर तक 3.33 लाख टन धान बेचा है। इसके एवज में किसानों को बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत 653 करोड़ 77 लाख रुपए का भुगतान जारी कर दिया गया है। खाद्य विभाग के सचिव टोपेश्वर वर्मा के मुताबिक 11 नवम्बर को 22 हजार 333 किसानों से 71 हजार 712 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। इसके लिए किसानों को आज 29 हजार 375 टोकन जारी किए गए थे। इनमें "टोकन तुंहर हाथ' एप से 3 हजार 77 टोकन जारी किए। शनिवार की धान खरीदी के लिए राज्य में 27 हजार 353 टोकन तथा "टोकन तुंहर हाथ' एप के जरिये 3 हजार 667 टोकन जारी किए गए हैं। राज्य में धान खरीदी निर्बाध रूप से जारी है। अधिकारी धान की व्यवस्था पर निरंतर निगरानी बनाए हुए हैं। धान खरीदी को लेकर कहीं से किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं मिली है।
धान का उठाव भी शुरू
खाद्य सचिव टोवेश्वर वर्मा के मुताबिक पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए धान का उठाव भी शुरू हो गया है। अब तक 84 हजार 304 मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डी.ओ. जारी किए गए हैं। जिसके एवज में उपार्जन केंद्रों से 22 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है।
दूसरे फसलों की खेती को बढ़ावा दें: डॉ कमलप्रीत
कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने न्यू सर्किट हाउस में रायपुर और दुर्ग संभाग के जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली। कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा कि कृषि और उससे संबंधित क्षेत्र से किसानों को लाभान्वित करना और उनकी स्थिति को मजबूत बनाना मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्राथमिकता में शामिल है। किसानों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए राज्य में धान के साथ-साथ अन्य व्यवसायिक फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। अन्य फसलों की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही किसान न्याय योजना में खरीफ की सभी फसलों को शामिल कर इनपुट सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान किया गया है। राज्य शासन और केन्द्र शासन द्वारा दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं भी संचालित की जा रही है। किसानों को इसका लाभ सुनिश्चित कर दलहन और तिलहन की खेती के लिए उन्हें प्रेरित करें। कृषि उत्पादन आयुक्त ने पॉम प्लांटेशन को बढ़ावा देने तथा सिंचित क्षेत्रों में गेहूं की खेती को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस साल राज्य में हुई अच्छी बारिश हुई है। खेतों में अभी अच्छी नमी बनी हुई है, इसका फायदा उठाकर रबी फसलों का रकबा बढ़ाया जा सकता है। हम सबकी यह कोशिश होनी चाहिए कि किसान ऐसी फसलें उत्पादित करें जिसकी मार्केट में डिमांड हो, इससे किसानों को फायदा होगा। खरीफ वर्ष 2022 की समीक्षा तथा रबी सीजन 2022-23 के कार्यक्रम निर्धारण की गहन समीक्षा करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने बैठक में कृषि एवं संबंधित विभागों से संबंधित शासन की फ्लैगशिप योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। बैठक में रायपुर संभाग के कमिश्नर यशवंत कुमार, दुर्ग संभाग के कमिश्नर महादेव कांवरे और संचालक कृषि डॉ. अयाज तम्बोली, उद्यानिकी संचालक माथेश्वरन व्ही. सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
'लघु औद्योगिक इकाईयां स्थापित करें'
कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कहा कि इसके आंकड़े पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है। किसी भी स्थिति में फसल कटाई प्रयोग का गलत आंकड़ा फीड नहीं होना चाहिए यह संबंधित जिलों के कलेक्टरों की भी जिम्मेदारी है। शत-प्रतिशत किसानों का ई-केवायसी पूरा कराने एवं एक जिला-एक उत्पाद को प्रमोट करने के भी निर्देश दिए गए। कृषि उत्पादन आयुक्त ने गौठानों में आयमूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ वहां लघु औद्योगिक इकाईयों की स्थापना के कार्य को प्राथमिकता कराए जाने के भी निर्देश दिए। गौठानों में स्थानीय कृषि एवं अन्य उत्पाद के वैल्यू एडिशन की यूनिट लगाई जानी चाहिए। बैठक में अधिकारियों की रबी सीजन 2022-23 के लिए किसानों को बीज एवं उर्वरक वितरण का कार्य तेजी से कराने के निर्देश दिए गए। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि कृषि उत्पादकता में वृद्धि के लिए तीन बातों का विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है। किसानों को अच्छे किस्म का उन्नत बीज और समय पर उर्वरक उपलब्ध कराए जाने के साथ ही स्वायल हेल्थ टेस्टिंग और किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। बैठक में फसल बीज विक्रेताओं का अनिवार्य रूप से पंजीयन किए जाने के भी निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री की पैरादान की अपील
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के किसान भाईयों से गौठानों में गौमाता के चारे की व्यवस्था के लिए पैरा-दान करने की अपील की है। किसान भाईयों के नाम जारी अपनी अपील में मुख्यमंत्री ने कहा है कि आप सब को मालूम है कि राज्य के गांवों में पशुधन के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गौठान बनाए गए है। इन गौठानों में गोधन के चारे एवं पानी का निःशुल्क प्रबंध गौठान समितियों द्वारा किया गया है। पशुधन के लिए गौठानों में सूखे चारे का पर्याप्त प्रबंध हो सके, इसके लिए किसान भाईयों से आग्रह है कि धान की कटाई के बाद खेतों में पैरा को जलाने की बजाय अपने गांव की गौठान समिति को बीते वर्ष भांति इस साल भी पैरा-दान करें। इससे गोधन के लिए चारे का इंतजाम करने में समितियों को आसानी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी पूरे प्रदेश में धान कटाई और मिंजाई का काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने किसान भाईयों से धान की कटाई के बाद पराली जलाने के बजाय पैरा को अपने नजदीक के गौठान को दान करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि खेतों में पराली जलाने से प्रदूषण एवं स्वास्थगत समस्याएं पैदा होती है। पंजाब में पराली जलाने से वहां प्रदूषण एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि हम पराली जलाने के बजाय पैरे का दान करें, इससे हमारे राज्य की पशुधन को चारा का इंतजाम हो सके। उन्होंने कहा कि किसान भाईयों द्वारा दान किए गए पैरा को एकत्र करने एवं उसका परिवहन कराने के लिए राज्य के प्रत्येक गौठानों को 40 हजार रूपए दिए जा रहे है। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को किसानों द्वारा दान किए गए पैरा का संकलन एवं परिवहन कराकर गौठानों में लाने का अभियान संचालित करने को कहा है।