जन तक पहुंचती संवाद: गरीब कल्याण के लिए गांव-गांव, डगर-डगर लोगों की बात सुन रहे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
रायपुर 30 नवंबर 2022 I सोशल मीडिया के समय में, जब आभासी रूप से संपर्क और संवाद हमारी रोजाना की जिंदगी का हिस्सा बन गया है तब मुख्यमंत्री प्रत्यक्ष संपर्क और संवाद कर रहे हैं। पंचायत से लेकर संसद तक के जनप्रतिनिधि हैं और वे अपने मतदाताओं से संपर्क बनाए रखते हैं। ये जनप्रतिनिधि औपचारिक तथा अनौपचारिक रूप से सरकार को जनभावनाओं से परिचित कराते हैं किन्तु मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता से सीधा संवाद करना जरूरी समझते हैं।
छत्तीसगढ़ सभी आयामों में आगे बढ़ रहा है। गांव और शहर तरक्की की ओर अग्रसर हो रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से लेकर हर क्षेत्र में रोजगार पर सबसे ज्यादा काम किया जा रहा है। कोविड महामारी के कारण दो साल बड़ी चुनौतियां रहीं, जिसमें जनप्रतिनिधियों का जनता से सीधा संवाद नहीं हो पाया। अब यह दूरियां दूर हो गईं। मुख्यमंत्री जनता की बात सुनने और समाधान की तलाश में उनसे भेंट-मुलाकात करने पहुंच रहे हैं। जंगल, पहाड़, दुर्गम गांव और शहरी क्षेत्रों तक मुख्यमंत्री अपनी टीम के साथ जनता के बीच पहुंच रहे हैं। भेंट-मुलाकात के जरिए उनकी बातों, मांगों और सुझावों को सुन रहे हैं। समस्याओं का त्वरित निराकरण करने के साथ-साथ मौके पर ही फैसले ले रहे हैं, ताकि विश्वास की बयार बह सके। किसी भी देश-प्रदेश की जनता चाहती है कि उनके द्वारा चुना गया मुखिया उनकी सुनें कुछ ऐसा ही दृश्य छत्तीसगढ़ के हर विधानसभा क्षेत्र में अब देखने को मिल रहा है, जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जनता को सुनने उनके बीच जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्राम स्वराज के अंतर्गत सर्वाधिक महत्व किसान को दिया और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने का प्रयास किया है। अब जब सरकार अपने कार्यकाल के चार साल पूरे कर रही है तब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राज्य के सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में, विशेषकर दूर दराज के गांवों और वनांचलों में पहुंचकर, लोगों से "भेंट-मुलाकात" कर नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन की हकीकत से रू-ब-रू हो रहे हैं। राज्य में अधोसंचरना को सशक्त बनाने के लिए हर जिले में सैकड़ों करोड़ों रुपए से सड़क, पुल, स्कूल, अस्पताल आदि के निर्माण और नई तहसील, उपतहसील, उपसंभाग आदि कार्यालयों की स्थापना की घोषणा कर रहे हैं। इनके अतिरिक्त वे क्षेत्र और लोक विशेष को ध्यान में रखकर विभिन्न समाज कल्याण योजनाओं का भी विस्तार कर रहे हैं और व्यक्तिगत पीड़ा या सामूहिक कष्ट के निवारण के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध करा रहे हैं। और इससे कुछ अलग, किसी सभा में उपस्थित बच् यचे दि हेलीकॉप्टर में घूमने या राजधानी देखने जैसी बाल सुलभ इच्छा जाहिर करते हैं तो 'कका', घर के बुजुर्ग की भांति, उन बच्चों की मांग पूरी कर रहे हैं। कुल मिलाकर कोशिश यह है कि समाज के हर वर्ग की समस्या या शिकायत का समाधान हो और लोगों और सरकार के बीच की दूरियां यदि समाप्त न हों तो वे कम से कम हो जाएं और नजदीकियां बढ़ जाएं।
पेड़ की छांव होती हैं दिल खोलकर बातें
मुख्यमंत्री भेंट-मुलाकात में जब किसी पड़े की छांव या छप्पर के नीचे बैठकर लोगों से बात करते हैं तो गांव वालों को लगता है जैसे वे अपने किसी करीबी के साथ बैठकर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे वातावरण में सभी दिल खोलकर बात करते हैं, चाहे उनकी कोई समस्या हो या फिर कोई मांग हो। सरगुजा जिले के लुंड्रा विधानसभा के करजी-कतकालो गांव में जब वे आम के पेड़ों के बीच पारंपरिक रूप से बांस और पैरे से बनी छप्पर के नीचे बैठकर आमजनों से भेंट-मुलाकात कर रहे थे, तो स्कूली बच्चों ने भी उन्हें अपनी तकलीफ सुनाई। 11वीं की छात्रा मधुलिका प्रजापति बताती है कि कोरोनाकाल में स्कूल जब आधी उपस्थिति के साथ चल रहे थे, तो भी उनको एक क्लास में
क्षमता से दुगुनी संख्या में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि स्कूल में अतिरिक्त कमरों का निर्माण करवाया जाए। मुख्यमंत्री ने तत्काल बात मानते हुए हायर सेकेण्डरी स्कूल के लिए भवन निर्माण की घोषणा की। बच्चों-पालकों के बीच शिक्षा के प्रति ललक और जागरुकता को देखते हुए उन्होंने करजी में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलने का भी ऐलान किया। इसके अलावा यहां एसबीआई का एटीएम शुरू किया जाएगा।
संस्कृति और परंपरा को भी दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भेंट-मुलाकात में केवल विधानसभावार सरकारी योजनाओं की समीक्षा ही नहीं कर रहे हैं बल्कि इलाके की संस्कृति, परम्परा और आध्यात्मिक पहलुओं को भी दुनिया तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का स्वागत भी लोग पारंपरिक वस्त्रों, विभिन्न पगड़ियों, विशेष उत्पादों को भेंटकर और भोजन में स्थानीय व्यंजन परोसकर कर रहे हैं। इस दौरान कई ऐसे उदाहरण सामने आए, जब तत्काल कार्रवाई हुई है। खासतौर परजरूरतमंदों को आर्थिक मदद देने, शासकीय कार्यों में लेट-लतीफी की कमियां दूर करने, शिकायतों एवं समस्याओं के समाधान पर त्वरित कदम उठाए गए हैं। भेंट-मुलाकात लोगों से संपर्क, संवाद और समाधान का जरिया बन रहा है, जिसमें वे अस्पताल, स्कूल में जाकर मरीजों, बच्चों से सीधा संपर्क स्थापित करते हैं। वे आम लोगों की बातें, तकलीफों को सुनकर बड़े ही उदार भाव से तत्काल निराकरण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह अंदाज़ लोगों को भा रहा है। लोग बेझिझक मुख्यमंत्री से सीधे अपनी समस्याएं बता रहे हैं। भेंट-मुलाकात के क्रम में मुख्यमंत्री जहां भी जा रहे हैं, वहां स्थानीय उद्यम और नवाचार को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।