आधी आबादी पर सरकार का फोकस
महिलाओं के सशक्तिकरण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए भूपेश बघेल सरकार ने शुरु की नई योजनाएं
रायपुर 28 मार्च 2023 I महिलाओं के सशक्तिकरण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए भूपेश बघेल की सरकार ने कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं। पिछले साढ़े चार साल में सरकार की करीब आधी योजनाओं के फोकस में समाज की आधी आबादी ही रही। इसकी वजह ये कि महिलाओं के पास पैसा जाए और उनका आत्मविश्वास बढ़े। महिलाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए भूपेश बघेल की सरकार ने छोटी-छोटी योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी संचालन किया है। यही वजह है कि गांवों से लेकर शहरों तक महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है। आज वे सक्षम होकर कदम से कदम मिलाते चल रही हैं।
महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम होना जरूरी है। इसके लिए सरकार नई-नई योजनाएं लागू कर रही है। कोरोना काल में लोगों को राहत देने के लिए चावल वितरण के साथ मनरेगा के कार्य प्रारंभ किए गए। लोगों को आर्थिक रूप से सक्षम करने समूह के माध्यम से कार्ययोजना बनाई गई है। आज महिलाएं गौठानों में वर्मी कंपोस्ट,पेंट बनाने और साग सब्जी का उत्पादन कर आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो रही है। इसी तरह ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने रीपा की स्थापना की जा रही है। इससे पारंपरिक कार्यों के साथ नए कार्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा। समाज को आगे और आधुनिक समय के साथ कदम से कदम मिला कर चलने के लिए विधिक जानकारी दी जा रही है। माताएं-बहनें तेजी से तरक्की करें, इसके लिए राज्य सरकार ने न सिर्फ महिला समूहों का 13 करोड़ रूपए का कर्ज माफ किया, बल्कि महिला कोष से कम ब्याज पर ऋण देने की सीमा को भी बढ़ाकर 4 लाख रूपए कर दिया है, ताकि महिलाएं आगे बढ़कर ज्यादा से ज्यादा योजनाओं का लाभ लें। राज्य सरकार गोबर खरीद कर समूह के माध्यम से वर्मी कम्पोस्ट बनवा रही है। पहले इसकी आलोचना हुई लेकिन अब तक 200 करोड़ रूपए की गोबर खरीदी की जा चुकी है। इसका आधा पैसा महिलाओं को जा रहा है। महिलाएं गोबर से प्राकृतिक पेंट भी बना रही है। इस प्राकृतिक पेंट से सरकारी कार्यालयों में पोताई कराने के निर्देश जारी कर दिया है। इसी प्रकार महिलाएं वर्मी खाद, गमला, सब्जी उत्पादन जैसी कई गतिविधियों से जुड़ी हैं। रीपा में महिला उद्यमियों को भी लघु, कुटीर उद्योगों को प्रारम्भ करने जमीन, बिजली, पानी जैसी जरूरी सुविधाएं दी जा रही है। महिलाएं आजीविका के सभी क्षेत्रों में अपना योगदान दे रही है और आत्मनिर्भर बन रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंड़िया के मुताबिक मुख्यमंत्री के निर्देश पर महिला समूहों को दिए जाने वाले ऋण राशि को दोगुनी करते हुए उसकी सीमा 04 लाख रूपए तक बढ़ा दी गई है। सक्षम योजना में भी सीमा दोगुनी कर दी गई है। महिलाएं आगे बढ़े और योजनाओं का लाभ लें। राज्य सरकार महिलाओं के साथ है। महिला एवं बाल विकास विभाग की डायरेक्टर दिव्या मिश्रा बताती हैं कि कि सखी वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से 13 हजार से अधिक महिलाओं को आश्रय प्रदान किया गया है और 4 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 1 लाख से अधिक कन्याओं का विवाह कराया गया है। कौशल्या मातृत्व योजना के तहत 1171 महिलाओं और नोनी सुरक्षा योजना के तहत 72 हजार 375 बालिकाओं को लाभान्वित किया गया है। अब तक 39 हजार से अधिक समूहों को 92 करोड़ रूपए के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। सक्षम योजना से भी 3176 महिलाओं को 20 करोड़ से अधिक के ऋण दिए गए हैं। सभी को अपने अधिकार और दायित्वों की जानकारी हो यह जरूरी है, इसलिए राज्य महिला आयोग द्वारा मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ का संचालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ के माध्यम से लोगो को ऑन द स्पॉट नियमो की जानकारी के साथ न्याय भी दिलाया जा रहा है।
'आधी आबादी की भागीदारी बिना समग्र विकास नहीं' -भूपेश बघेल, मुख्यमंत्री
नारी शक्ति ने हर क्षेत्र में खुद को साबित किया है और अपनी क्षमता और प्रतिभा के बल पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनायी है। महिलाओं तक उनके अधिकारों को पहुंचाने, उनका सशक्तिकरण करने और लैंगिक समानता के उद्देश्य को लेकर हमारी सरकार काम कर रही है। महिलाओं ने अपनी क्षमता, योग्यता और हौसलों से हर क्षेत्र में अपना मुकाम बनाया है। उनकी भागीदारी के बिना हम समग्र विकास की कल्पना नहीं कर सकते। छत्तीसगढ़ में हमेशा महिलाओं का स्थान ऊंचा रहा है। लेकिन घर-परिवार और समाज में आर्थिक भागीदारी के मामले में वे पिछड़ गई थी, इसे देखते हुए राज्य सरकार ने महिलाओं को स्वावलम्बन से जोड़ने की रणनीति अपनाई। गौठानों और महिला समूहों से जोड़कर उनके लिए आर्थिक समृद्धि की नई राह तैयार की गई है। गौठान महिलाओं के लिए स्व-रोजगार के केन्द्र बन रहे हैं। गौठानों को रूरल इंडस्ट्रियल पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे बड़ी संख्या में महिलाओं को लाभ हो रहा है। आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं अपनी उद्यमिता और काबिलियत से पूरे देश में अपना नाम बना रही है।
'हर क्षेत्र में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही महिलाएं' -अनिला भेंड़िया, महिला एवं बाल विकास मंत्री
समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब हम आधी आबादी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं और उन्हें आगे बढ़ने का सुरक्षित और पूरा अवसर प्रदान करें। महिलाओं की बेहतरी के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। छत्तीसगढ़ में विकास के हर क्षेत्र में महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। महिलाओं की सेहत की देखभाल के लिए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान और दाई-दीदी क्लीनिक योजना जैसी अभिनव पहल की गई है। दाई-दीदी क्लीनिक योजना से गरीब बस्तियों की महिलाओं का इलाज हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट में महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कौशल्या समृद्धि योजना शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री कन्या विवाह में सहायता राशि को 25 हजार रूपए से बढ़ाकर 50 हजार रूपए करने का प्रावधान किया गया है। महिलाओं के पोषण और देखभाल में लगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मितानिनों के मानदेय में बढ़ोत्तरी की व्यवस्था भी बजट में की गई है।