रायपुर 28 नवंबर 2022 I महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की कल्पना के अनुरूप ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही खेती-किसानी को लाभकारी बनाने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल से छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में आर्थिक तरक्की का रास्ता खुल रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के रास्ते को अपना कर छत्तीसगढ़ को आर्थिक मॉडल बनाया। छत्तीसगढ़ सरकार ने गौठानों में रूरल इण्डस्ट्रियल पार्क के जरिए युवाओं को रोजगार उद्यम से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में 300 नए रीपा तैयार किए जा रहे हैं। रीपा में गांव के युवाओं को गांव में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि 9500 गौठानों के साथ हम छत्तीसगढ़ की पुरानी परंपरा को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं। गौठानों से गांवों में आर्थिक विकास के लिए नये अवसर पैदा हो रहा है। किसानों को खेती-किसानी के लिए बेहतर माहौल के साथ ही पशुधन संरक्षण और संवर्धन के अलावा बड़ी संख्या में यहां ग्रामीण रोजगारमूलक गतिविधियों से जुड़ रहे हैं। आज किसान वर्मी कंपोस्ट के माध्यम से रसायन रहित खेती कर शुद्ध और जैविक फसल की प्राप्ति कर रहा है, जिससे उसका परिवार स्वस्थ जीवन जीएगा, शासन की योजनाओं से पशुधन भी सुरक्षित है। गौठान मॉडल के इन वर्मी कंपोस्ट खाद रूपी फैक्ट्री से आने वाले 2-4 सालों में आप देखेंगे कि छत्तीसगढ़ राज्य को डीएपी या अन्य रासायनिक खादों और कीटनाशकों की जरूरत पड़ेगी ही नहीं।
समावेशी विकास को सार्थक करता इको सिस्टम तैयार
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि हमने महात्मा गांधी जी के स्वावलंबन के रास्ते को अपनाकर ऐसा इको सिस्टम तैयार किया है जो समावेशी विकास को सार्थक करता है। स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल के माध्यम से आज बच्चे फर्राटेदार इंग्लिश बोल रहे हैं। अपनी माटी से उनका जुड़ाव बना रहे इसके लिए सप्ताह में एक दिन छत्तीसगढ़ी भाषा का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन संबंध में आए हुए ग्रामीण जनों से फीडबैक लिया और उनकी समस्याओं का समाधान भी किया।
साकार हो रही बापू के स्वावलंबी गांवों की परिकल्पना
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वावलंबी गांवों की परिकल्पना धीरे-धीरे साकार हो रही है। गोधन न्याय योजना के तहत गांवों में बनाए गए गौठानों में से 3089 गौठान स्वावलंबी हो गए हैं। 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2022 तक गौठानों में क्रय किए गए गोबर के एवज में भुगतान की गई राशि में से लगभग 50 प्रतिशत राशि का भुगतान स्वावलंबी गौठानों द्वारा किया गया है। यह एक बड़ा बदलाव है। स्वावलंबी गौठानों ने अब तक अपने संसाधनों से 24.15 करोड़ रूपए की गोबर खरीदी की है। गोबर विक्रेताओं को योजना के शुरू होने के बाद से अब तक 179.28 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है। इसी तरह अब तक गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 164.24 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। राज्य के 83 गौठानों में 4 रूपए लीटर की दर से अब तक 76 हजार 820 लीटर गौमूत्र क्रय किया जा चुका है। गौठानों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा 24,348 लीटर कीट नियंत्रक ब्रम्हास्त्र और 18,722 लीटर वृद्धिवर्धक जीवामृत तैयार किया गया है, जिसमें से 20,521 लीटर ब्रम्हास्त्र और 14,055 लीटर जीवामृत की बिक्री से कुल 15 लाख रूपए की आय हुई। इस गतिविधि को और बढ़ावा देना चाहिए।
गन्ना उत्पादकों को 68.90 करोड़ रूपए का भुगतान
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नवंबर महीने में राज्य के गन्ना उत्पादक कृषकों को गन्ना प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 68 करोड़ 90 लाख रूपए की बोनस राशि का ऑनलाईन अंतरण किया। इस राशि में वर्ष 2020-21 के बोनस की 11.99 करोड़ रुपए की बकाया बोनस राशि और गन्ना पेराई वर्ष 2021-22 की 56.91 करोड़ रूपए की प्रोत्साहन राशि शामिल है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि गन्ना उत्पादक किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे उन्हें खेती की लागत में भी राहत मिल रही है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना में गन्ना पेराई वर्ष 2021-22 में गन्ना उत्पादक कृषकों को प्रति एकड़ के मान से 10 हजार रूपए एवं शेष राशि गन्ना प्रोत्साहन योजना अंतर्गत दिये जाने का निर्णय लिया गया था। वर्ष 2020-21 में राशि 84.25 प्रति क्विटल की दर से 28.589 कृषकों को 59.14 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना था, जिसमें से 47 करोड़ 12 लाख का भुगतान किया जा चुका है। शेष राशि 11.99 करोड़ का भुगतान भारत सरकार द्वारा घोषित उचित एवं लाभकारी मूल्य के अतिरिक्त छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किया जा रहा है। इसी तरह गन्ना पेराई वर्ष 2021-22 में 79 रुपए 50 पैसे प्रति क्विटल की दर से कुल 31, 051 कृषकों को 76.24 करोड़ रुपए का भुगतान गन्ना प्रोत्साहन राशि के रूप में किया जाना है, परंतु राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत प्रदाय की गई आदान सहायता राशि का समायोजन करने के साथ ही अंतरिम रूप से गन्ना उत्पादन प्रोत्साहन राशि के रूप में 56.91 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा रहा है।
एथेलॉन प्लांट से गन्ना उत्पादकों को होगा फायदा
राज्य शासन द्वारा वर्ष 2019-20 में 355 रुपये प्रति क्विटल की दर पर गन्ना क्रय किये जाने का निर्णय लिया गया था, जिसके फलस्वरूप वर्ष 2019-20 में गन्ना कृषकों को 93 रुपए 75 पैसे प्रति क्विंटल की दर से 34,637 कृषकों को 73 करोड़ 56 लाख रूपए का भुगतान प्रोत्साहन राशि के तौर पर किया गया था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पण्डरिया, केरता और बालोद के गन्ना उत्पादक किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की और उन्हें बोनस वितरण के लिए बधाई दी। किसानों ने कहा कि एथेलॉन प्लांट शुरू होने से गन्ना उत्पादक किसानों को फायदा होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव अंकित आनंद, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. अय्याज एफ. तम्बोली, मिशन संचालक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अवनीश शरण, विशेष सचिव सहकारिता श्री हिमशिखर गुप्ता, संचालक पशुधन श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी, कृषि विभाग के उप सचिव सुश्री तूलिका प्रजापति भी उपस्थित थीं। विभिन्न जिलों से अनेक जनप्रतिनिधि और किसान भाई भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम से जुड़े थे।