छत्तीसगढ़ मॉडल की मची धूम

भूपेश बघेल सरकार की योजनाओं और नीतियों से अधोसंरचना के साथ हर वर्ग का विकास

Update: 2023-01-05 14:03 GMT

रायपुर 05 जनवरी 2023 I  करीब चार साल पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में अपनी सरकार बनाते ही यह स्पष्ट कर दिया था कि लोगों की बुनियादी और आजीविका आधारित जरूरतों पर सबसे पहले ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन अधोसंरचनाओं पर सबसे ज्यादा जोर दिया, जिससे रोजगार और बुनियादी सुविधाओं में इजाफा हो सके। सरकार ने डीएमएफ के फंड का भी इस्तेमाल ऐसी ही अधोसंरचनाओं पर करने पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया है। बुनियादी सुविधाएं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क, रोजगार और आजीविका संबंधी गतिविधियों से जुड़ी अधोसंरचनाओं को प्राथमिकता में शामिल किया गया है। सरकार ने डीएमएफ के खर्च नियमों में भी बदलाव किया गया, काम की प्राथमिकताओं के नियम बदले गए और नतीजा सबके सामने है। पिछले करीब साढ़े तीन सालों में रोजगार के आंकड़ों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और हर क्षेत्र में उत्पादन बढ़ रहा है। इससे आजीविका मजबूत होने के साथ-साथ हर वर्ग की आय में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। राष्ट्रीय औसत के मुकाबले जहां बेरोजगारी दर में सबसे ज्यादा कमी छत्तीसगढ़ में दर्ज की गई, वहीं किसानों, वनाश्रितों और ग्रामीणों की आय में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। सरकार के इन प्रयासों की वजह से ही देशभर में छत्तीसगढ़ मॉडल की लगातार सराहना हो रही है।

आत्मानंद विद्यालयों ने लाई क्रांति

स्वामी आत्मानंद विद्यालयों के माध्यम से प्रदेश में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक नयी क्रांति आयी है। गत वर्ष 51 स्कूलों से यह योजना प्रारंभ की गई थी, जो अब बढ़कर 279 स्कूलों तक पहुंच चुकी है। इनमें से 32 स्कूल हिन्दी माध्यम के हैं तथा 247 स्कूलों में हिन्दी के साथ अंग्रेजी माध्यम में भी शिक्षा दी जा रही है। इस वर्ष 2 लाख 52 हजार 600 बच्चों ने इन स्कूलों में प्रवेश लिया है, जिसमें 1 लाख 3 हजार बच्चे अंग्रेजी माध्यम

तथा 1 लाख 49 हजार 600 बच्चे हिन्दी माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं। इस योजना की सफलता को देखते हुए निर्णय लिया गया है कि अधिक से अधिक संख्या में स्कूलों को इस योजना के अंतर्गत लाया जाएगा। अगला शिक्षा सत्र प्रारंभ होने के पूर्व 422 और स्कूलों को स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम स्कूल बनाए जाएंगे, जिनमें से 252 स्कूल आदिवासी बहुल बस्तर एवं सरगुजा संभाग में होंगे। दंतेवाड़ा जिले के शत-प्रतिशत शासकीय हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों को स्वामी आत्मानंद स्कूल बनाया जाएगा।

आंगनवाड़ी केंद्रों में 5000 से ज्यादा बालवाड़ी

नवीन शिक्षा नीति के अनुरूप स्कूल शिक्षा विभाग के साथ समन्वय करते हुए 5000 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में बालवाड़ियां शुरू की गई हैं। इसके अलावा महिलाओं एवं बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में आधारभूत संरचना उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2022-23 में मनरेगा के जरिए 575 आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण के लिए 8.34 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

सिंचाई में 24.58 फीसदी की बढ़ोतरी

सरकार ने अधोसंरचना विकास के लिए परिणाममूलक नजरिया अपनाया, जिसके कारण सिंचाई क्षेत्र में बेहतर प्रबंधन से वास्तविक सिंचाई का रकबा 10 लाख 90 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 13 लाख 58 हजार हेक्टेयर हो गया। जलजीवन मिशन के अंतर्गत राज्य के 56 लाख ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से 55 लीटर पानी प्रति व्यक्ति, प्रतिदिन देने के लिए सितंबर 2023 की समय-सीमा तय की गई है और 13 लाख 8 हजार नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

लक्ष्य से 108 फीसदी मिला मनरेगा का काम

मनरेगा के तहत रोजगार को बढ़ावा देने के लिए 2021-22 में 16.92 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए थे, जो लक्ष्य से 108 फीसदी है। इसी तरह वन अधिकार के तहत 3,71,847 रजिस्टर्ड परिवारों को वर्ष 2021-22 में 100 दिन का रोजगार प्रदान किया गया। इसके लिए योजना में कृषि कार्यों में जहां 60 फीसदी राशि खर्च की जानी थी, वहीं 79 फीसदी खर्च की गई, जबकि प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के तहत जल, जंगल, जमीन के संवर्धन व संरक्षण कार्यों में जहां 65 फीसदी राशि खर्च का लक्ष्य था, वहीं 84 फीसदी राशि खर्चकी गई। इस तरह से अब तक 2.10 लाख कार्य पूर्णकिए जा चुके हैं। पशु संवर्धन व पशुपालन के लिए 5,856 चारागाहों का निर्माण किया गया, जबकि आजीविका संवर्धन के लिए गौठानों के पास मत्स्य पालन तालाबों में स्वीकृत 1859 में 1318 कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

24 हजार करोड़ की सड़कों का जाल

प्रदेश में 24 हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत से सड़क-पुल-पुलियों का निर्माण कराया जा रहा है। राज्य की विशेष जरूरतों के अनुरूप मुख्यमंत्री सुगम सड़क योजना में 495 करोड़ रुपए की लागत से 735 किलोमीटर सड़कें, एडीबी लोन के माध्यम से 3 हजार 535 करोड़ रुपए की लागत से 869 किलोमीटर सड़कें, आदिवासी बहुल एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 1 हजार 637 करोड़ की लागत से 2 हजार 478 किलोमीटर सड़कें, छत्तीसगढ़ सड़क अधोसंरचना विकास निगम द्वारा 5 हजार 503 करोड़ रुपए की लागत से 3 हजार 169 किलोमीटर सड़कें तथा जवाहर सेतु योजना के माध्यम से 620 करोड़ रुपए की लागत से 94 पुलों का निर्माण कराया जा रहा है। 

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