भाजपा के लिए चुनौतियों का साल
छत्तीसगढ़ में 2023 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पसीना बहा रही भाजपा
छ त्तीसगढ़ की सियासत में साल 2023 बेहद अहम है। क्योंकि विदा होने से पहले ये साल सूबे के नए सत्ताधीश का चुनाव कर देगी। साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने पिछले साल से ही बिसात बिछानी शुरु कर दी है। छत्तीसगढ़ विधानसभा की 71 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है और वो काफी मजबूत स्थिति में है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जिस तरह से काम कर रहे हैं और उनका जो विजन छत्तीसगढ़ को लेकर है, उससे भाजपा के लिए चुनौती बहुत बड़ी है। भाजपा को ये समझ नहीं आ रहा है कि कांग्रेस के इस किले को वो कैसे ध्वस्त करेगी। बदलाव पर बदलाव कर रही भाजपा कांग्रेस से जितना लड़ रही है, उतना ही संघर्ष पार्टी के भीतर भी है। बीजेपी इस बार किसके चेहरे को लेकर चुनाव में उतरेगी। या फिर मोदी के कामकाज के सहारे चुनावी बैतरणी पार करने उतरने की तैयारी कर रही भाजपा सरकार बनाने की स्थिति में आती है, तो कौन होगा चेहरा, इन्हीं सवालों से जूझते हुए वो चुनावी मोड में आ गई है।
भाजपा के पास दोहरी चुनौती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की किसान और छत्तीसगढ़िया छवि के साथ उनकी बढ़ती लोकप्रियता को रोकना पहली चुनौती है, वहीं दूसरा मोदी सरकार के काम और योजनाएं को आम लोग पहुंचाने की चुनौती, जिसके दम पर वो चुनाव निकालने की बात कहती रही है। इन्हीं सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए पंद्रह सालों तक सत्ता में रहने वाली पार्टी 2018 की हार को भुलाते हुए 2023 में सत्ता में वापसी करना चाहती है, जिसकी तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है। पिछले चुनावों के कड़वे अनुभवों को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व अभी से चुनावी मोड में आ गया है। पार्टी ने सभी सांसदों और विधायकों को कमजोर बूथ को मजबूत करने का निर्देश दिया है। इसकी रिपोर्ट हर माह प्रदेश भाजपा कार्यालय को दी जाएगी। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष इसकी समीक्षा करेंगे। इस रिपोर्ट को केंद्रीय नेतृत्व और संघ के नेताओं को भी सौंपी जाएगी।
नए चेहरों की तलाश
पिछले दिनों हुई भाजपा की बैठक में ये बात सामने आई कि विधानसभा 2023 का चुनाव सीएम के चेहरे के बिना ही लड़ेगी। सभी को एकजुट होकर चुनाव की तैयारी में जुटने कहा गया है। पार्टी का सीएम कैंडिडेट कौन होगा, यह जीत के बाद ही तय किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष साव ने भी मीडिया से चर्चा में कहा कि पार्टी के जीत के बाद ही संगठन तय करेगा कि सीएम की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी। इस खबर के बाद पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के दोबारा सीएम फेस होने पर संशय की स्थिति निर्मित हो गई है। विधानसभा चुनाव के लिए नए चेहरों की तलाश भी शुरू हो गई है। हर विधानसभा में चार सदस्यीय टीम ग्राउंड लेवल पर पहुंच रही है। जो विधानसभा की स्थिति और संगठन के काम काज की जानकारी जुटा रही है। यही टीम विधानसभा क्षेत्र के युवा, मजबूत और प्रभावी नए चेहरों की जानकारी भी ले रही है। बैठक में छनकर सामने आए संकेतों से स्पष्ट है कि इस बार के चुनाव में भाजपा ज्यादातर विधानसभा में नए चेहरों पर दांव लगाएगी।
चुनाव तक बिंदुवार रोडमैप तैयार
प्रदेश सरकार को घेरने के लिए भाजपा ने बिंदुवार रोड मैप बनाया है। इसमें सबसे अहम मुद्दे आदिवासी क्षेत्र में हो रहे धर्मांतरण, पीएम आवास के अटके किस्त और कांग्रेस मेनिफेस्टो के अधूरे काम हैं। इनको लेकर चुनाव तक अब भाजपा लगातार प्रदर्शन और आंदोलन करेगी। भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की रायपुर में हुई दो दिवसीय बैठक में केंद्रीय स्तर पर बनी चुनावी रणनीति को साझा की गई। प्रदेश भारी ओम माथुर, सह प्रभारी नितिन नवीन, पूर्व सीएम डॉ.रमन सिंह व प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव की मौजूदगी में रणनीति पर चर्चा हुई। जिला प्रभारी, संभागीय प्रभारी, विभिन्न मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष व जिलाध्यक्षों से आगामी रणनीति पर चर्चा हुई। इस बैठक के साथ ही भाजपा ने प्रदेश में चुनावी तैयारी का शंखनाद कर दिया है। शक्ति केंद्रों की बैठक में इसकी जानकारी ग्राउंड लेवल के कार्यकर्ताओं को दी जा चुकी है। पिछले दिनों कोरबा पहुंचे गृहमंत्री अमित शाह ने भी इस बैठक को लेकर तैयार किए गए एजेंडों व तैयार किए गए रोड मैप पर अंतिम सहमति दी। इसके बाद अब भाजपा ने अपने अभियान की शुरुआत कर दी है। पार्टी नेताओं ने माना कि विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत तय करने के लिए ग्राउंड लेवल से तैयारी शुरू करने की जरूरत है। सबसे अधिक फोकस बूथ लेवल पर करने की चर्चा हुई। बूथ के सभी पदाधिकारियों और शक्ति केंद्र प्रभारियों की पूरी सूची मोबाइल नंबर सहित संगठन के आला नेता अपने साथ ले गए हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि आगामी गतिविधियों की मानिटरिंग प्रदेश स्तर के नेता सीधे बूथ लेवल पर चर्चा कर करेंगे।
पिछड़ा वर्ग पर फोकस
भाजपा ने छत्तीसगढ़ में पिछड़ा वर्ग को फोकस करते हुए चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने पिछड़ा वर्ग के नेताओं को इसी कड़ी में पद और तवज्जो देकर इसकी शुरुआत भी कर दी है। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ ओबीसी आधारित राज्य है। उन्होंने यह भी कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल में ओबीसी वर्ग के 27 सांसदों को केंद्रीय मंत्री बनाकर पिछड़ों की हितैषी होने का सबूत दिया है। भविष्य में कांग्रेस को छत्तीसगढ़ से उखाड़ फेंकने में पिछड़ा वर्ग का अहम रोल होगा। पिछड़ा वर्ग युवा मोर्चा की बैठक को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने युवा मोर्चा को 4 मूलमंत्र देते हुए कहा कि लोक संपर्क, लोक संग्रह, लोक संस्कार व लोक नियोजन का कार्य करना है। मतलब आम जनता से मिलकर उनके समस्याओं को सुनकर उनको साथ लेकर, उनके हित के लिए संघर्ष करना है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने कहा कि युवा मोर्चा भाजपा भाजपा का वह शक्ति दंड है जिस की ताकत से हम इस झूठी कांग्रेस को सबक सिखाएंगे। पिछड़ा वर्ग मोर्चा के कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने कहा कि पिछड़ा वर्ग की सर्वाधिक संख्या इस प्रदेश में है। हम सभी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरीब कल्याण की सभी योजनाओं को जनता को बताना है।
हर लोकसभा की तैयारी भी साथ-साथ
हालांकि अभी पूरी भाजपा विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। लेकिन उसकी निगाह में 2024 में होने वाला आमचुनाव भी है। पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए हर लोकसभा क्षेत्र में तीन-तीन नेताओं की टीम छह महीने पहले से तैयार कर दी है। इसमें सरगुजा में बृजमोहन अग्रवाल, पुन्नुलाल मोहले, संजय श्रीवास्तव, रायगढ़ में अरुण साव, रामसेवक पैकरा, यशवंत जैन, कोरबा में नारायण चंदेल, गोमती साय, अनुराग सिंह देव, महासमुंद में ननकीराम कंवर, मोहन मंडावी, सौरभ सिंह, बिलासपुर में डॉ.रमन सिंह, गुहाराम अजगले, विजय शर्मा, जांजगीर-चांपा के लिए सरोज पांडेय, सुनील सोनी, किरण देव, रायपुर में धरमलाल कौशिक, केदार कश्यप, चुन्नीलाल साहु, दुर्ग में रामविचार नेताम, अजय चंद्राकर, भुपेंद्र सवन्नी, राजनांदगांव में नंदकुमार साय, विजय बघेल, ओपी चौधरी, कांकेर में रेणुका सिंह, प्रेम प्रकाश पांडेय,चंदुलाल साहु, बस्तर में विष्णुदेव साय,शिवरतन शर्मा और संतोष पांडेय को जिम्मेदारी दी गई है।