न्यूरो सर्जन ने छात्रा से की अश्लील हरकत: चेकअप के नाम पर उतरवाए कपड़े, मना करने पर किया ऐसा काम , जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान
Prayagraj News: न्यूरो सर्जन डॉ कार्तिकेय शर्मा पर चेकअप के नाम पर अपने क्लिनिक में छात्रा के कपड़े उतारकर छेड़छाड़ करने के आरोप लगे हैं।
फोटो सोर्स- इंटरनेट, ए़डिट, NPG.NEWS
प्रयागराज 3 अप्रैल 2026, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से न्यूरो सर्जन की शर्मनाक करतूत सामने आई है। यहां बुधवार को न्यूरो सर्जन डॉ कार्तिकेय शर्मा पर चेकअप के नाम पर अपने क्लिनिक में छात्रा के कपड़े उतारकर छेड़छाड़ करने के आरोप लगे हैं। शिकायत के बाद पुलिस ने गुरुवार को FIR दर्ज कर लिया है। यह पूरा मामला पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज सिटी जोन की सिविल लाइंस थाना क्षेत्र का है।
क्या है पूरा मामला ?
जानकारी के मुताबिक, न्यूरो सर्जन डॉ कार्तिकेय शर्मा (55) का क्लाइव रोड इलाके में घर है, जहां से वो अपना क्लिनिक भी चलाते हैं। वहीं धूमवगंज की रहने वाली 24 वर्षीय BA की छात्रा बुधवार को अपने भाई के साथ माइग्रेन के इलाज के लिए डॉ कार्तिकेय के क्लिनिक पर गई थी। भाई कोई जरूरी काम से उसे क्लिनिक में छोड़कर चला गया था और जब बाद में वो लौटा तो वहां हंगामा हो रहा था।
कब और कैसे की छेड़छाड़ ?
इस दौरान छात्रा ने अपने भाई को बताया कि उसे इलाज के लिए 74वां नंबर मिला था। रात साढे 10 बजे नंबर आने पर जब वो डॉक्टर के कैबिन में गई, तो उसने ये कहकर दरवाजा बंद कर दी कि उसे चेकअप करनी है। इसके बाद चेकअप के नाम पर उसके ऊपर के कपड़े उतारने लगे और छेड़खानी करने लगे। इसके बाद उसने नीचे के कपड़े उतारने को कहा तो छात्रा ने मना कर दिया, जिसके बाद वो जबरदस्ती करने लगे और धमकी भी दी। छात्रा के रोने के बाद डॉ पीछे हट गए और फिर छात्रा किसी तरह से कैबीन से बाहर निकली, जिसके बाद लोगों ने भी डॉक्टर को घेर लिया।
ACP ने मामले में क्या कहा ?
वहीं सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम भी मौके पर पहुंच गई और फिर छात्रा के साथ ही उसके परिजनों को भी अपने साथ थाने ले गई। ACP सिविल लाइंस विद्यूत गोयल ने बताया कि छात्रा की शिकायत पर पुलिस मौके पर पहुंची। जांच पड़ताल की और डॉक्टर से भी पूछताछ की। फिलहाल तहरीर के आधर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की छानबीन कराई जा रही है।
आरोप बेबुनियाद- डॉ. कार्तिकेय शर्मा
इस मामले में 55 वर्षीय डॉ. कार्तिकेय शर्मा ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि वे केवल छात्रा के पेट का परीक्षण (Examine) कर रहे थे। डॉक्टर ने तर्क दिया कि छात्रा पिछले कई सालों से उनसे इलाज करा रही है और वह 'साइकोसिस' (अवसाद) की मरीज है। उन्होंने यह भी कहा कि फीमेल स्टाफ केवल 3 मिनट के लिए दूसरे मरीज को इंजेक्शन लगाने गई थी, तभी यह गलतफहमी पैदा हुई।