प्राइवेट स्कूल पर DEO ने कसा शिकंजा, स्कूल के मेनगेट या सूचना पटल पर बोर्ड की संबद्धता लगाना जरुरी....
CG School Education News: छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले के कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने जिले में संचालित हो रहे प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। डीईओ ने निर्देश जारी कर कहा है, प्राइवेट स्कूलों को अपने मेनगेट और सूचना पटल पर जिस बोर्ड से मान्यता है,उसे चस्पा करना जरुरी है।
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बिलासपुर। 8 अप्रैल 2026| छत्तीसगढ़ बिलासपुर जिले के कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने जिले में संचालित हो रहे प्राइवेट स्कूलों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। डीईओ ने निर्देश जारी कर कहा है, प्राइवेट स्कूलों को अपने मेनगेट और सूचना पटल पर जिस बोर्ड से मान्यता है,उसे चस्पा करना जरुरी है। सीजी बोर्ड,सीबीएसई या फिर सीजीबीएसई, जिस बोर्ड से मान्यता है उसे साफतौर पर बताना होगा। सीजी बोर्ड से मान्यता लेकर सीबीएसई बोर्ड के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले प्राइवेट स्कूलों की पोल अब खुलेगी।
डीईओ ने अपने आदेश में लिखा है, विद्यालय में जो सूचना पटल या विद्यालय के गेट के सामने पर अपने स्कूल का मान्यता कोड अंकित करना एवं जिस बोर्ड से संबंध है जैसे सीबीएसई, आईसीएसई, सीजीबीएसई, माध्यमिक शिक्षा मण्डल आदि से संबंद्ध है, से संचालित है उसका भी संबंधता कोड डालना एवं सूचना पट लगाना अनिर्वाय होगा।
डीईओ ने जारी किया ये दिशा निर्देश
विद्यालय संचालक, प्राचार्य स्कूल में संचालित प्रत्येक कक्षा के लिये अनिवार्य पुस्तकों की सूची विद्यालय की परीक्षा परिणाम जारी होने के पूर्व ही अपने स्कूल की वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से अपलोड करेंगे एवं विद्यालयीन परिसर में सार्वजनिक पटल ,स्थान पर चस्पा करेंगे। विद्यालय संचालक,प्राचार्य द्वारा विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को पुरतकें एवं कांपिया, सम्पूर्ण यूनिफार्म आदि सम्बन्धित स्कूल, संरथा अथवा किसी एक दुकान, विक्रेता, संरथा विशेष से क्रय किये जाने हेतु बाध्य नहीं किया जावेगा। स्कूल के प्राचार्य, संचालक पुस्तकों की सूची की एक प्रति प्रवेशित अभिभावकों को प्रवेश के समय एवं परीक्षा परिणाम के समय आवश्यक रूप से उपलब करायेंगे।
- विद्यालय संचालक ,प्राचार्य विद्यार्थी एवं उनके अभिभावकों को सूचीबध पुस्तके परीक्षा परिणाम अथवा उसके पूर्व क्रय हेत् बाध्य नहीं करेंगे। अभिभावक पुस्तकों की उपलब्धता के आधार पर 15 जून 2026 तक प्रक्रम्य कर सकेंगे।
- विद्यालय जिस नियामक बोर्ड सीबीएसई.,आईसीएसई, सीजीबीएसई,माध्यमिक शिक्षा मण्डल आदि से सम्बद्ध है, उस संस्था के द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम एवं उस पाठ्यक्रम के अन्तर्गत नियामक संस्था अथवा उसके द्वारा विधिक रूप से अधिकृत एजेंसी (यथा एनसीईआरटी, छ.ग. पाठ्य पुस्तक निगम आदि) द्वारा प्रकाशित एवं मुद्रित पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य प्रकाशकों, मुद्रकों द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पुस्तकों को विद्यालय में अध्यापन हेतु प्रयुक्त किया जाना प्रतिबंधित रहेगा।
- विद्यालय संचालक, प्राचार्य सुनिश्चित करेंगे कि उक्त के अतिरिक्त अन्य विषयों जैसे नैतिक शिक्षा, सामान्य ज्ञान, कम्प्यूटर आदि की निजी प्रकाशकों, मुद्रकों की पुस्तकें क्रय करने हेतु बाध्य नहीं किया जायेंगा।
- विद्यालय संचालक, प्राचार्य विक्रेता द्वारा पुस्तकों के सेट की कीमत बढ़ाने हेतु अनावश्यक सामग्री जो निर्धारित पाठ्यक्रम से संबंधित नहीं है, का समावेश सेट में नहीं किया जावेगा। कोई भी विक्रेता किसी भी कक्षा के पूरे सेट को क्रय करने की बाध्यता नहीं रखेगा।
- किसी भी बैग, पुस्तक अथवा काॅपी पर विद्यालय का नाम मुद्रित नहीं किया जाएगा तथा इन पर चढ़ाने वाले कवर पर विद्यालय नाम को मुद्रित नहीं किया जायेगा।
- कोई भी विद्यालय दो से अधिक प्रकार की युनिफार्म निर्धारित नहीं करेगा। ब्लेजर, स्वेटर इसके अतिरिक्त होगा। विद्यालय प्रशासन द्वारा युनिफार्म का निर्धारण इस प्रकार किया जावेगा कि कम से कम 03 वर्ष तक उसमें परिवर्तन न हो परिवर्तन होने की स्थिति में पालक को कम से कम छ. माह के पूर्व सूचित किया जावेगा ।
- विद्यालय में जो सूचना पटल या विद्यालय के गेट के सामने पर अपने स्कूल का मान्यता कोड अंकित करना एवं जिस बोर्ड से संबंध है जैसे सी.बी.एस.ई./आई.सी.एस.ई./ सी.जी.बी.एस.ई./ माध्यमिक शिक्षा मण्डल आदि से संबंद्ध है, से संचालित है उसका भी संबंधता कोड डालना एवं सूचना पट लगाना अनिर्वाय होगा।
- विद्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन 2020 में दिये गये निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा तथा विद्यालय द्वारा उक्त आदेशों की अवहेलना किये जाने पर शाला के प्राचार्य / संचालक स्वयं जवाबदार होगें।
- यह निर्देश जिले के समस्त विद्यालय अपने नोटिस बोर्ड पर उक्त सूचना चस्पा करें। विद्यालय के प्राचार्य उक्त आदेशों की जानकारी प्रबंधक की प्रथम बैठक में सविस्तार रखना सुनिश्चित करें।
इसीलिए कलेक्टर ने जारी किया फरमान
निजी स्कलों के संचालकों द्वारा छात्रों एवं उनके पालकों को निर्धारित दूकानों से ही (यूनिफार्म), जूते, टाई, किताबें, कापियां आदि खरीदने के लिये बाध्य किया जाता है, जिससे विद्यार्थियों एवं उनके पालकों में रोष व्याप्त होता है। साथ ही दूसरी और गरीब वर्ग के पालकों को इससे अत्यन्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस तथ्य से भी अवगत कराया गया कि निजी विद्यालय एवं स्टेशनरी यूनिफार्म विक्रेता के द्वारा पुस्तकों का अत्यधिक मूल्य तय करते हैं एवं अन्य सामग्री खरीदने के लिए पालकों को बाध्य किया जाता है, इसके दूष्परिणाम यह होते है कि सामग्री एक तो महंगी होती है तथा यदि कोई पालक कक्षा के पूरे सेट में खरीदते हुये केवल कुछ कापी-किताबे खरीदना चाहे तो उसे केवल उतनी कापी-किताबे न देते हुये, पूरा सेट खरीदने हेतु इसलिये बाध्य किया जाता है, कई बार सेट की कीमत बढ़ाने हेतु अनावश्यक पाठ्यक्रम से जो सामग्री संबंधित नहीं है जैसे डिक्शनरी एटलस, आर्ट/क्राफ्ट चुक, ड्राईंग बुक, क्रेयॉन्स, वाटर कलर्स आदि का भी समावेश कर दिया जाता है।
संचालकों द्वारा बनाये गये एकाधिकार को खत्म करने तथा विभिन्न माध्यमों से प्राप्त सुझावों से यह समाधान हो गया है, बिलासपुर शहर एवं जिले के निजी स्कलों द्वारा की जा रही इस एकाधिकारी प्रवत्ति से लोक प्रशान्ति विक्षुब्ध न हो तथा इसका निवारण अत्यन्त वांछनीय होने से, इसे रोकने हेत् कार्यवाही की जाना आवश्यक प्रतीत होता है। साथ ही विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार चूंकि अधिकांश निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है, अतः विनियमन की कार्यवाही तत्काल की जाना आवश्यक है।