लिंगियाडीह बस्ती विवाद: नगर निगम ने हाई कोर्ट से कहा, बेदखली के 15 दिन पहले जारी करेंगे नोटिस, विस्थापितों को पीएम आवास में करेंगे शिफ्ट, किसी को नहीं होने देंगे बेघर
Bilaspur High Court News: लिंगियाडीह बस्ती को तोड़ने के खिलाफ बस्तीवालों की ओर से दो अलग-अलग याचिका दायर की गई है। सभी याचिकाओं पर आज हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। नगर निगम की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, बेदखली की कार्रवाई करने के 15 दिन पहले सभी को नोटिस जारी किया जाएगा। अधिवक्ता ने कोर्ट को यह भी बताया, कार्रवाई के दौरान विस्थापित होने वालों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों में शिफ्टिंग की योजना है। किसी को बेघर नहीं होने देंगे। याचिकाकर्ताओं ने उसी जगह पर राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत स्थाई पट्टे की मांग की है।
Bilaspur High Court
Chhattisgarh Bilaspur High Court: बिलासपुर। लिंगियाडीह बस्ती को तोड़ने के खिलाफ बस्तीवालों की ओर से दो अलग-अलग याचिका दायर की गई है। सभी याचिकाओं पर आज हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। नगर निगम की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, बेदखली की कार्रवाई करने के 15 दिन पहले सभी को नोटिस जारी किया जाएगा। अधिवक्ता ने कोर्ट को यह भी बताया, कार्रवाई के दौरान विस्थापित होने वालों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों में शिफ्टिंग की योजना है। किसी को बेघर नहीं होने देंगे। याचिकाकर्ताओं ने उसी जगह पर राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत स्थाई पट्टे की मांग की है।
लिंगियाडीह बस्ती में निवासरत लोगों ने 2019 के सर्वे के आधार पर बनी राजीव गांधी आश्रय योजना में उन्हें पट्टा दिए जाने वाले निर्णय का हवाला देते हुए, योजना के तहत पैसा जमा करने के आधार पर स्थाई पट्टा की मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है, यहां निवासरत हम सभी लाेगों के अलावा अन्य लोग भी लंबे समय से यहां रह रहे हैं। तकरीबन 40 से 50 वर्ष से लोग हम सब निवासरत हैं। समय-समय पर राज्य व केंद्र शासन की योजनाओं के तहत उन्हें लाभ दिया जाता रहा है। याचिकाकर्ताओं ने इसे आधार बनाते हुए कोर्ट से मांग की, बस्ती में रहने वाले सभी लोगों को स्थाई पट्टा दिलाने की गुहार लगाई। पिंकी देवांगन और सावित्री साहू के साथ तकरीबन 36 लोगों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से यह बताया गया, नगर निगम द्वारा उन सभी लोगों को राजीव गांधी आश्रय योजना के बजाय प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए बाध्य किया जा रहा है। बेदखली के लिए नगर निगम अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। याचिका के अनुसार निगम की नोटिस से बस्तीवासियों में यह भय है, निगम कभी भी हम सभी लोगों के मकान पर बलपूर्वक बुलडोजार चला देगा।
कोर्ट ने नगर निगम के वकील से मांगी ये जानकारी
याचिकाकर्ताओं की बातों और बस्ती वालों में बन रहे भय के वातावरण के बीच जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने नगर निगम की ओर से पैरवी करने के लिए उपस्थित अधिवक्ता रणवीर सिंह मरहास से वस्तु स्थिति की जानकारी मांगी और पूछा, क्या नगर निगम द्वारा मकान तोड़ने के लिए कोई नोटिस जारी किया गया है। अधिवक्ता मरहास ने कोर्ट को बताया, निगम द्वारा फिलहाल ऐसी कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है।
शपथ पत्र के साथ ये दी जानकरी
नगर निगम के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, इसके पहले भी निगम ने शपथ पत्र पेश करते हुए आश्वस्त किया है, बेदखली से पहले लोगों को कानून के अनुरुप 15 दिन का नोटिस दिया जाएगा। निगम ने जो नोटिस जारी किया है, वह मकान तोड़ने के संबंध में नहीं है। नगर निगम के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, कार्रवाई के दौरान विस्थापित होने वाले लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए मकान में शिफ्टिंग की योजना है।
मकानों को तोड़कर निगम बनाएगी कमर्शियल काम्पलेक्स
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया, नगर निगम रिहायशी क्षेत्र के मकानों को तोड़कर एक कमर्शियल काम्पलेक्स बनाना चाहती है, जो मास्टर प्लान के अनुकूल भी नहीं है। याचिकाकर्ताओं को घर होने के अलावा लिंगियाडीह क्षेत्र में उनका जीवनयापन जुड़ा हुआ है, लिहाजा इस क्षेत्र में स्थाई पट्टा मिलना चाहिए। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता के जवाब के बाद कोर्ट ने पूछा,ऐसे कितने लोग हैं, जिन्होंने पट्टा जारी करने के लिए स्पष्ट मांग पत्र दिया है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने बताया, सावित्री साहू एवं अन्य व पिंकी देवांगन एवं अन्य की याचिका में 12 व्यक्तियों के द्वारा ऐसे आवेदन दिए गए हैं। हाई कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं के आवेदन जमा कर रिकॉर्ड में लाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याचिका की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है।