Chaitanya Baghel Bail:ब्रेकिंग न्यूज़: पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल को हाई कोर्ट से मिली जमानत, शराब घोटाले में आरोपी

Chaitanya Baghel Bail: शराब घोटाला में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। हाई कोर्ट ने चैतन्य बघेल को ईओडब्ल्यू-एसीबी और ईडी मामलों में जमानत दी है।

Update: 2026-01-02 11:33 GMT

Chaitanya Baghel Bail: बिलासपुर। शराब घोटाला में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है। हाई कोर्ट ने चैतन्य बघेल को ईओडब्ल्यू-एसीबी और ईडी मामलों में जमानत दी है। बता दें कि चैतन्य बीते 6 महीने से जेल में बंद हैं। चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने 18 जुलाई को मनी लॉन्ड्रिंग PMLA के आरोपों में गिरफ्तार किया था।

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। याचिका में सीबीआई और ईडी की जांच कीअधिकारिता पर सवाल उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई से इंकार करते हुए उन्हें हाई कोर्ट जाने की सलाह दी थी। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा था कि पीएमएलए कानून की वैधानिकता को चुनौती देनी है तो अलग से याचिका दायर करनी पड़ेगी। बता दें कि ईडी ने 18 जुलाई की सुबह भिलाई स्थित बघेल निवास पर छापा मारकर चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन के दिन ही गिरफ्तार किया था। उन पर शराब घोटाले से जुड़े फंड के प्रवाह और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप है।

तीन दिन पहले ED ने दायर किया है सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट , चैतन्य को बताया सिंडिकेट का अहम हिस्सा

तीन दिन पहले ED ने स्पेशल कोर्ट में सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर किया था। इसमें खुलासा किया कि 2019 से 2023 के बीच चार साल के अंतराल में आबकारी विभाग में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट ने राज्य की शराब नीति को अपने फायदे के लिए मनमाफिक तरीके से लागू किया। अपने हिसाब से कानून बनाया। शराब की बिक्री के लिए छत्तीसगढ़ के 15 जिलो को टारगेट किया। इन्हीं 15 जिलो में नकली होलोग्राम के जरिए बड़ी मात्रा में शराब की बिक्री कराई गई। सिंडिकेट के इस घोटाले में छत्तीसगढ़ की शराब निर्माता कंपनियों ने बढ़चढ़कर साथ निभाया। इसके एवज में करोड़ो रुपये डिस्टलर्स ने बनाए। सिंडिकेट में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी, कवासी लखमा, चैतन्य बघेल, सौम्या चौरसिया और निरंजन दास शामिल हैं। पूरा नेटवर्क अवैध कमीशन, बिना हिसाब की शराब बिक्री और लाइसेंस के जरिए वसूली पर आधारित था।

ED ने घोटाले को अंजाम देने के लिए एक संगठित आपराधिक गिरोह बनाने का खुलासा किया है। सिंडिकेट ने अवैध कमीशन और बेहिसाब शराब की बिक्री सहित एक बहुस्तरीय तंत्र के माध्यम से व्यक्तिगत लाभ के लिए राज्य की शराब नीति का दुरुपयोग किया। घोटालों को अंजाम देने के लिए इस तरह के तरीके अपनाए।

ईडी ने चार्जशीट में अनिल टुटेजा (सेवानिवृत्त आईएएस), तत्कालीन संयुक्त सचिव जैसे वरिष्ठ अधिकारी, और तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास (आईएएस) नीति में हेरफेर करने और गिरोह के बेरोकटोक संचालन को सुनिश्चित करने में केंद्रीय भूमिका निभा रहे थे। सीएसएमसीएल के प्रबंध निदेशक अरुण पति त्रिपाठी (आईटीएस) को अवैध वसूली को अधिकतम करने और भाग-बी के अभियानों के समन्वय का कार्य सौंपा गया था। इसके अतिरिक्त, जनार्दन कौरव और इकबाल अहमद खान सहित 30 क्षेत्रीय आबकारी अधिकारियों पर "प्रति मामले निश्चित कमीशन" के बदले बेहिसाब शराब की बिक्री में सुविधा प्रदान करने का आरोप लगाया गया था।

तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा और चैतन्य बघेल (तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र) पर अपने व्यापार, रियल एस्टेट परियोजनाओं में नीतिगत सहमति देने और पीओसी प्राप्त करने, उपयोग करने में उनकी भूमिका के लिए आरोप लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया को अवैध नकदी के प्रबंधन और अनुपालन करने वाले अधिकारियों की नियुक्तियों के प्रबंधन के लिए एक प्रमुख समन्वयक के रूप में पहचाना गया था।

सिंडिकेट का नेतृत्व अनवर ढेबर कर रहे थे। उनके सहयोगी अरविंद सिंह. छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड, भाटिया वाइन मर्चेंट्स और वेलकम डिस्टिलरीज सहित निजी निर्माताओं ने जानबूझकर शराब के अवैध निर्माण में भाग लिया और भाग-ए और भाग-बी कमीशन का भुगतान भी किया। सिद्धार्थ सिंघानिया (नकदी संग्रह) और विधु गुप्ता (नकली होलोग्राम आपूर्ति) जैसे सहायक भी उक्त धोखाधड़ी में प्रमुख निजी भागीदार पाए गए।

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