CG विधानसभा बजट सत्र 2026: 23.46 करोड़ का फर्जी भुगतानः विधानसभा में गूंजा अरपा नहर मुआवजा कांड, NPG.NEWS ने किया किया था घपले का भंडाफोड़, सदन में मंत्री बोले...
CG Vidhansabha Budget Session 2026: अरपा भैंसाझार नहर निर्माण में भूअधिग्रहण व भूअर्जन घाेटाला विधानसभा में गूंजा। बिल्हा के विधायक धरमलाल कौशिक ने 23.46 करोड़ के फर्जी भुगतान का मामला उठाया। विधायक ने राजस्व मंत्री से पूछा कि घोटालेबाजों पर क्या कार्रवाई की जा रही है। बता दें कि NPG.NEWS ने किया किया था घपले का भंडाफोड़ किया था।
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रायपुर।24 फरवरी 2026| अरपा भैंसाझार नहर निर्माण में भूअधिग्रहण व भूअर्जन घाेटाला विधानसभा में गूंजा। बिल्हा के विधायक धरमलाल कौशिक ने 23.46 करोड़ के फर्जी भुगतान का मामला उठाया। विधायक ने राजस्व मंत्री से पूछा कि घोटालेबाजों पर क्या कार्रवाई की जा रही है। बता दें कि NPG.NEWS ने किया किया था घपले का भंडाफोड़ किया था।
बिल्हा के विधायक धरमलाल कौशिक ने राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा से सवाल करते हुए पूछा,14 जुलाई, 2025 के उत्तर में अरपा भैंसाझार परियोजना में अनियमितता पाए जाने का उल्लेख किया गया है? इस परियोजना में किस-किस प्रकार की अनियमितता पाई गई है? इसमें कौन-कौन व किन-किन कारणों से दोषी पाए गये हैं तथा इनके विरूद्ध क्या-क्या कार्यवाही की गई है? यदि नहीं की गई तो क्यों व कब तक की जावेगी? इसमें किन-किन खसरों के संबंध में भुगतान संबंधी, असिंचित/पड़त/एक-फसली भूमि को दो-फसली बता कर किसको-कितना अधिक भुगतान किन-किन को किनके किनके द्वारा किये जाने संबंधी एवं अन्य किस-किस प्रकार की अनियमितता किस-किस के द्वारा की गई है तथा अनियमितता एवं अनियमित भुगतान करने किन-किन अधिकारियों/कर्मचारियों के द्वारा अनुंशसा की गई है? पदनाम व नामवार विवरण देवें?
विधायक कौशिक ने पूछा क्या घोटाले की ईओडब्ल्यू से जांच कराए जाने हेतु कार्यवाही प्रक्रियाधीन बताई गई है? क्या मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 12 मई 2025 को जल संसाधन विभाग की बैठक में परियोजना में हुई अनियमितता की जांच हेतु ईओडब्ल्यू को प्रकरण भेजने हेतु निर्देशित किया गया? यदि हाँ तो कब भेजा गया तथा उसमें किन-किन अनियमितताओं का उल्लेख किया गया तथा ईओडब्ल्यू में पंजीकरण की अद्यतन प्रगति क्या है?
मंत्री ने इस तरह दिया जवाब
विधायक कौशिक के सवालों का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा, 14 जुलाई 2025 के उत्तर में अरपा भैंसाझार परियोजना में अनियमितता पाए जाने का उल्लेख किया गया है। इस परियोजना में संरेखण एवं मुआवजा भुगतान में अनियमितता पाई गई है।
घोटाले की जांच को लेकर मंत्री ने कहा, राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ई.ओ.डब्ल्यू.) में कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 12 मई 2025 को जल संसाधन विभाग की बैठक में निर्देशानुसार परियोजना में हुई अनियमितता की जांच हेतु ई.ओ.डब्ल्यू. को प्रकरण प्रेषित किया गया है। छत्तीसगढ़ शासन, सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र क्रमांक GRNCOR/5038/2025-GAD-7 के माध्यम से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर ई.ओ.डब्ल्यू. में प्रारंभिक जांच क्रमांक 07/2025, 16-जुलाई -2025 को पंजीबद्ध कर जांच की जा रही है।
क्या है अरपा भैंसाझार भूअधिग्रहण घोटाला?
अरपा-भैंसाझार नहर निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में पटवारी मुकेश साहू, कोटा के तत्कालीन एसडीएम आनंदरूप तिवारी के अलावा राजस्व अमला और जल संसाधन विभाग के अफसरों ने गजब का खेल किया है। एनपीजी के पास उपलब्ध दस्तावेजों में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे। पटवारी मुकेश साहू ने नहर के एलाइमेंट को ही कागजों में बदल दिया। नहर को 200 मीटर आगे खिसका दिया और व्यवसायी मनोज अग्रवाल पिता पवन अग्रवाल की बंजर जमीन से नहर निकलना बताते हुए 3 करोड़ 42 लाख रुपए का खेला कर दिया है।
मनोज अग्रवाल पिता पवन अग्रवाल की जिस जमीन पर नहर निर्माण होना बताया जा रहा है वह नहर से तकरीबन 200 मीटर दूर है। नहर का एलाइमेंट बदलकर 200 मीटर पहले बने नहर को कागजों में 200 मीटर दूर बता दिया और मनोज अग्रवाल के स्वामित्व वाली जमीन खसरा नंबर 1/4, 1/6 की कुल 29 डिसमिल जमीन का पहले अधिग्रहण किया और फिर मुआवजा प्रकरण बनाकर 3 करोड़ 42 लख रुपए का भुगतान कर दिया। जमीन की कीमत बढ़ाने के लिए बंजर जमीन को प्रष्टिवारी ने दोफसली बता दिया। झोपड़ी को कागज में मकान बना दिया।
किसान भटक रहे, व्यापारी को जबरिया मुआवजा मिल गया
राजस्व अधिकारी और सिंचाई अधिकारियों ने एक व्यापारी से मिलकर और खेल किया। जिन किसानों की जमीन नहर निर्माण की जद में आई और वर्तमान में नहर बन गया है उन किसानों को आजतलक मुआवजा नहीं मिल पाया है। ये किसान आज भी मुआवजा के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। अशोक कुमार संतोष कुमार की खसरा नंबर 4/1, 4/2 की 12 डिसमिल जमीन और तुलसीराम व अन्य किसानों की 17 डिसमिल जमीन का भुगतान नहीं किया गया।
बगैर प्रकाशन कर दिया भुगतान
मनोज अग्रवाल पिता पवन अग्रवाल की जिस 29 डिसमील जमीन का मुआवजा देने के लिए नहर का एलाइमेंट बदला गया है, उस जमीन का अधिग्रहण के लिए शासन स्तर पर राजपत्र में प्रकाशन भी नहीं हुआ है। राजस्व अमले और अफसरों ने एक मनोज अग्रवाल नाम के व्यापारी को फायदा पहुंचाने के लिए कागजों में पूरा खेल कर दिया और सरकारी खजाने को चूना लगा दिया।
हर बार दी अलग-अलग जानकारी, एक डिसमिल को बना दिया तीन और 15 को बना दिया 26 डिसमिल पटवारी ने बाद के प्रतिवेदन में खसरा नंबर 1/4 में अर्जित रकबा को 0.03 एकड़ एवं खसरा नंबर 1/6 को डायवर्टेट भूमि रकबा 0.26 एकड़ बताया है। तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (रा.) कोटा एवं अवार्ड पत्रक में हस्ताक्षर करने वाले सदस्यों द्वारा रिपोर्ट / तथ्यों का परीक्षण किये बगैर एवं बगैर विधिवत सूचना या प्रकाशन के अरपा-भैंसाझार परियोजना के अंतर्गत चकरभाठा वितरक नहर का अवार्ड पत्रक भू-अर्जन पत्रक-22 (मुआवजा देयक पत्रक) में खसरा नंबर 1/4 अर्जित रकबा 0.03 एकड़ (सिंचित दोफसली/अन्य पहुंच मार्ग के साथ मकान निर्मित बताया जाकर) के विरुद्ध मुआवजा राशि रूपये 37,37,871/- एवं खसरा नंबर 1/6 अर्जित रकबा 0.26 एकड़ भूमि के विरूद्ध मुआवजा राशि रूपये 3,04,80,049/- मनोज अग्रवाल, पिता पवन अग्रवाल को भुगतान किया गया है। अभिलेख अवैधानिक रूप से सुधार किये जाने के कारण शासन को आर्थिक हानि हुई है और अनावश्यक रूप में मुआवजा के रूप में राशि रूपये 3,42, 17,920/- का भुगतान किया गया है।
दोगुना हुआ बजट, नहर लाइनिंग भी अधूरी
अरपा भैंसाझार परियोजना के लिए शुरुआत में 606 करोड़ का बजट रखा गया था। विलंब और अन्य कारणों के चलते निर्माण लागत बढ़ते ही गया। वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार ने बजट में बढ़ोतरी करते हुए इसे 1141.90 करोड़ कर दिया है। परियोजना के तहत 370.55 किलोमीटर नहर निर्माण होना है। वर्तमान में 229.46 किलोमीटर नहर बन पाया है।
धारा 19 के प्रकाशन के बगैर बदला मुआवजा ले आउट
जिस संबंधित विभाग के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाता है, उस दौरान राजस्व विभाग के अफसरों की टीम के साथ संबंधिव विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी मौके मुआयना करते हैं। इस दौरान राजस्व विभाग के अधिकारी दस्तावेजों के आधार पर बताते हैं कि किस-किस जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। मौका मुआयना और सहमति के बाद राजस्व विभाग द्वारा प्रमुख समाचार पत्रों में धारा 11 का प्रारंभिक प्रकाशन कराया जाता है। दावा आपत्ति मंगाई जाती है। आपत्तियों के निराकरण के बाद धारा 19 के तहत अंतिम संशोधन पत्रक जारी प्रकाशन किया जाता है। भू राजस्व संहिता की धारा 19 में जिन-जिन खसरा नंबर की जमीनों को परियोजना के लिए चिन्हित किया जाता है, उसका अधिग्रहण कर भूमि स्वामियों को मुआवजा दिया जाता है। अरपा- भैंसाझार परियोजना में धारा 19 में जिन खसरों का प्रकाशन नहीं हुआ था, उसका भी कागजों में अवैध ढंग से अधिग्रहण कर मुआवजा प्रदान कर दिया गया।
कलेक्टर की जांच में ये दोषी
जांच में दो तत्कालीन एसडीएम समेत पांच राजस्व कर्मी दोषी पाए गए।
1. तत्कालीन एसडीएम कोटा आनंदरुप तिवारी।
2. तत्कालीन एसडीएम कोटा कीर्तिमान सिंह राठौर।
3. नायब तहसीलदार मोहरसाय सिदार।
4. आरआई हुल सिंह।
5. पटवारी दिलशाद अहमद।
6. पटवारी मुकेश साहू सकरी।
सिंचाई विभाग के पांच अधिकारियों की इस केस में भूमिका रही। इन्हें भी जांच में दोषी पाया गया।
1. तत्कालीन ईई कोटा आरएस नायडू।
2. ईई कोटा एके तिवारी।
3. तत्कालीन एसडीओ कोटा राजेंद्र प्रसाद मिश्रा।
4. तत्कालीन एसडीओ तखतपुर आरपी द्विवेदी।
5. सब इंजीनियर तखतपुर आरके राजपूत।