CG Teacher News: क्या छत्तीसगढ़ में खत्म होगा शिक्षक ई और टी संवर्ग का भेद, मंत्री बृजमोहन ने अफसरों से मांगी रिपोर्ट

CG Teacher News: स्कूल शिक्षा विभाग की कमान संभालने के बाद अफसरों की पहली बैठक में ही उन्होंने पूछ दिया था कि शिक्षक ई और टी को एक क्यों नहीं किया जा सकता। शिक्षा विभाग के जानकारों का ये भी कहना है कि डीपीआई के अधिकारियों ने एजुकेशन पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए दो वर्ग बना दिया।

Update: 2024-01-23 06:11 GMT

CG Teacher News: रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़ा एक पत्र एनपीजी के पास पहुंचा है जो इस बात का संकेत दे रहा है कि कद्दावर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की मंशा स्कूल विभाग में अलग-अलग चल रहे दो संवर्गों के उलझनो को सदा के लिए समाप्त कर देने का है और वह चाहते हैं कि विभाग में अलग-अलग चल रहे संवर्ग मर्ज होकर एक हो जाए। स्कूल शिक्षा विभाग की पहली बैठक में ही वे इस बात का संकेत दे चुके थे कि दोनों संवर्गों को एक होना चाहिए।


दरअसल पिछली सरकार ने बस्तर और सरगुजा संभाग में 12489 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी कर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी जिसमें से कुछ पदों पर अभी भी रिक्तियां हैं जिन्हें विभाग द्वारा भरा जाना प्रस्तावित है । इधर नए मंत्री के आते ही विभाग की तरफ से मंत्री के समक्ष नोट शीट के माध्यम से ई संवर्ग के पदों को टी संवर्ग में मर्ज करने की मांग की गई थी तो मंत्री ने नोट शीट पर अपना टीप अंकित करते हुए विभाग से यह पूछ लिया की एक ही संवर्ग में भर्ती क्यों नहीं की जा सकती और साथ ही उन्होंने एक ही संवर्ग में भर्ती का प्रस्ताव भी मांग लिया। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से संचालक लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र जारी कर इसके संबंध में विस्तृत प्रस्ताव सहित अभिमत प्रस्तुत करने को कहा गया है ।

आखिर क्यों है ई और टी संवर्ग का झमेला !

आज से कुछ सालों पहले तक टी संवर्ग वर्ग यानी ट्राईबल क्षेत्र में काम कर रहे शिक्षक एसी ट्राइबल के अंतर्गत माने जाते है बाद में विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था को एकीकृत करने के लिए यह प्रणाली समाप्त कर दी और ई और टी संवर्ग को स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत ही कर दिया लेकिन यह केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से किया गया। शिक्षकों के मामले में स्थानांतरण के लिए ई और टी की बाध्यता को यथावत रखा गया यानी ई संवर्ग के शिक्षक सिर्फ ई संवर्ग में स्थानांतरित हो सकते थे और टी के टी में। कुल मिलाकर दोनों संवर्ग एक ही मंत्री और एक ही विभाग के अधिकारियों के अंतर्गत आ गए। लेकिन इससे शिक्षकों को कोई लाभ नहीं मिला और उनके लिए व्यवस्था पूर्ववत ही रही। कांग्रेस की सरकार ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए यह निर्णय लिया की ट्राईबल क्षेत्र में नियुक्त शिक्षकों में से सहायक शिक्षक का स्थानांतरण केवल उसके जिले के अंदर ही हो सकेगा वही शिक्षक का स्थानांतरण केवल उस संभाग के अंतर्गत ही हो सकेगा। उदाहरण के लिए यदि कोई सुकमा जिले में सहायक शिक्षक है तो उसका स्थानांतरण केवल सुकमा जिले के अंतर्गत ही हो सकता है और यदि सुकमा जिले में कोई शिक्षक कार्यरत है तो उसका स्थानांतरण केवल बस्तर संभाग में ही हो सकता है।

आखिर क्यों बनी यह सारी व्यवस्था ?

दरअसल यह बात काफी लंबे समय से उठने आ रही है कि दोनों संवर्गों को एक कर दिया जाए लेकिन ट्राइबल क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का इस मसले को लेकर सरकार पर काफी दबाव रहता है और उनका अपना पक्ष यह है कि शहरी क्षेत्र के लोग नौकरी पाने के लिए ट्राइबल क्षेत्र में आ जाते हैं और उसके बाद ट्रांसफर का प्रयास करते रहते हैं यदि सरकार दोनों संवर्गों को एक कर देगी तो ट्राइबल के अधिकांश शिक्षक ट्रांसफर कराकर शहरी इलाकों में पहुंच जाएंगे और उनके क्षेत्र के स्कूल खाली रह जाएंगे यह वहां के जनप्रतिनिधियों का मानना है वहीं शिक्षक चाहते हैं कि वह अपने परिवार के पास पहुंच जाए कई शिक्षक तो ऐसे हैं जो विगत 20 सालों से ट्राईबल बेल्ट में फंसे हुए हैं क्योंकि स्थानांतरण का कोई नियम ही उनके लिए नहीं है यही वजह है कि शिक्षकों का कहना है कि ई और टी संवर्ग समाप्त किया जाए । दोनों ही पक्ष अपनी अपनी बातों को सही ठहराते हैं अब देखना होगा कि नए मंत्री इस पर क्या निर्णय लेते हैं और विभाग का क्या प्रस्ताव अभिमत सहित मंत्री जी के पास पहुंचता है फिलहाल इस पत्र ने विभाग में सरगर्मी तो बढ़ा ही दी है।

ट्राइबल का मलाई

ट्राइबल के स्कूलों को एजुकेशन में नही जाने के पीछे एक वजह यह भी है कि आदिवासी विभाग के पास इसका बड़ा बजट है। विभाग नही चाहता कि स्कूलों पर से उसका पूरा नियंत्रण खत्म हो जाए। आदिवासी इलाकों में बड़ी संख्या में आदिवासी हॉस्टल हैं। इसके लिए सरकार से तगड़ा फंड मिलता है। हॉस्टलों को अगर एजुकेशन को दे देंगे तो उनका नुकसान हो जाएगा। 

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