संघ में बड़ा बदलावः प्रांत प्रचारक का पद समाप्त, छत्तीसगढ़ में बनेंगे दो संभाग! पढ़िये किस संभाग में कौन-कौन से जिले रहेंगे

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने अपने सांगठनिक ढांचे में बदलाव की कवायद शुरू कर दी है। देशभर के साथ छत्तीसगढ़ में भी प्रांत प्रचारक का पद समाप्त कर संगठन की सीमाएं बदली जा रही हैं। यह बदलाव कब होगा, स्पष्ट नहीं है। माना जा रहा है कि इस महीने या अगले वर्ष मार्च तक संघ का नक्शा बदल जाएगा।

Update: 2026-03-21 06:18 GMT

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रायपुर। 20 मार्च 2026| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हाल ही में हुए सम्मेलन में शताब्दी वर्ष में संगठन के ढांचे की समीक्षा की गई। उसमें संघ के विकेंद्रीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें माना गया है कि संघ के विकेंद्रीकरण से समाज सेवा या समाज सुधार के कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा और इससे मजबूती भी मिलेगी। संघ सूत्रों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अभी प्रांत प्रचारक टोपलाल वर्मा हैं और संघ प्रचारक के रूप में डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना काम कर रहे हैं। संघ ने प्रांत प्रचारक का पद नीतिगत रूप से खत्म करने का फैसला कर लिया है। माना जा रहा है कि वर्तमान प्रांत प्रचारक को नई जिम्मेदारी दी जा सकती है, यह जिम्मेदारी क्या होगी अभी तय नहीं है।

संघ सूत्रों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में केवल दो संभाग बनने की संभावना है। मध्यप्रदेश में तीन संभाग बनाए जाने की सूचना आ रही है। छत्तीसगढ़ में प्रशसानिक हिसाब से रायपुर, दुर्ग, बस्तर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग हैं। जबकि संघ के सांगठनिक ढांचे में दो संभाग ही बनने जा रहे हैं। एक संभाग में रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग को रखा जाएगा। जबकि दूसरे संभाग में बिलासपुर और सरगुजा संभाग की सीमाएं रहेंगी। यह भी कहा जा रहा है कि अभी रायपुर और बिलासपुर या सरगुजा में नियुक्त पदाधिकारियों में से ही किसी को संभाग प्रचारक की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

संभाग प्रचारक के बनने से संघ का विकेंद्रीकरण हो जाएगा। जमीनी स्तर पर संघ की गतितिधि तेज हो सकेगी और कार्यक्रमों का संचालन अधिक सुव्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। बताया गया है कि देशभर में अभी 46 प्रांत प्रचारक काम कर रहे हैं। नई व्यवस्था में देश में 85 से अधिक संभागों का निर्माण हो सकता है। इन सभी संभाग प्रचारक के पदों पर युवाओं को मौका दिए जाने की संभावना है। इसके बाद संघ की ओर से शाखाओं की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य संभाग प्रचारकों को दिया जाएगा। विशेषकर ग्रामीण स्तर पर संघ की शाखाएं बढ़ाने का उद्देश्य रखा जा सकता है। बीते एक साल में देश में 3943 नई शाखाएं प्रारंभ कर दी गई हैं। संगठन के विकेंद्रीकृत हो जाने का फायदा जल्द ही नजर आ सकता है।

समय के साथ बदलेगा संघ

संघ ने पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए समय के साथ कुछ नई व्यवस्था भी जोड़ने का फैसला किया है। यह ध्यान रखा जा रहा है कि संघ की मूल परंपरा पर कोई आंच न आए और इसके बाद नई चीजों को जोड़ा जाए। अभी संघ का फोकस सामाजिक समरसता, पर्यावरण, परिवार जागरुकता, नागरिक अनुशासन के साथ आत्मनिर्भरता पर है। इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रख कर शताब्दी वर्ष में कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

शताब्दी वर्ष का समापन इसी साल दशहरे के अवसर पर होगा। संघ ने अब सोशल मीडिया का उपयोग शुरू कर दिया है। इसके जरिए संघ की नीतियों और रीतियों का प्रभावी तरीके से प्रचार किया जा रहा है। यूट्यूबर्स के जरिए भी संघ देश और समाज हित में अपने संदेश देने का सिलसिला जारी रखा हुआ है। युवाओं को इससे अधिक से अधिक जोड़ा जाएगा।

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