CG विधानसभा बजट सत्र 2026: बजट का बदला स्वरूप, फंड मैनेजमेंट वित्त मंत्री की बड़ी चुनौती, सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल और हेल्थ के साथ अब इन सेक्टरों पर बड़ा फोकस
CG Assembly Budget Session 2026: अविभाजित मध्यप्रदेश और वर्ष 2000 में राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ में बजट का मतलब होता था नए टैक्स, पुल-पुलिया, सड़क निर्माण और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार। बजट का स्वरूप अब बदल गया है। मंगलवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश होने वाले बजट में भी यही बदलाव दिखेगा।
इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News
रायपुर।24 फरवरी 2026| सरकारी बजट का खाका नपा-तुला और परंपरागत ही रहता आया है। राजस्व घाटे- लाभ के साथ सरकारी विभागों को दिए जाने वाले मदों पर ज्यादा फोकस रहता था। समय के साथ बजट में लगातार बदलाव आता गया और अब थीम आधारित बजट के साथ सर्वांगीण विकास पर फोकस होने लगा है। पहले बजट की राशि कम होती थी, इस कारण सीमित दायरे में प्लान पेश किए जाते थे। अब बजट की राशि 26 साल में 25 गुना से ज्यादा बढ़ गया है, इसके बाद फंड का मैनेजमेंट भी महत्वपूर्ण हो गया है।
प्रदेश के आर्थिक विकास और सामाजिक संतुलन का भी ख्याल रखा जा रहा है। इस कारण से बजट चालू वित्तीय वर्ष तक ही सीमित नहीं रह गया है। अब बजट का फंड दूरगामी प्लान पर खर्च किया जा रहा है। यही वजह है कि अब आज से दस साल पहले जैसे सरकारी विभागों में फंड खत्म करने की मारामारी नहीं दिखती। इससे पहले राजधानी से जिला तक फरवरी से मार्च तक चालू वित्तीय वर्ष में मिलने वाली राशि को ऐनकेनप्रकारेण खर्च करने दबाव दिखता था। सबसे बड़ी बात, अब विधायक अपने इलाके के लिए केवल पुल-पुलिया और सड़क की मांग नहीं करते, बल्कि अब वे शिक्षा के बड़े केंद्र बनाने या स्वास्थ्य सुविधा की बड़ी सौगात दिलाना चाहते हैं। यह बताता है कि विधायकों से बजट के लिए मिलने वाले प्रस्तावों में बड़ा परिवर्तन आ गया है।
सड़क पर राज्य की निर्भरता घटी
केंद्र में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ में भी केंद्र के फंड से गांव- गांव सड़कों का जाल बिछने लगा। इससे छत्तीसगढ़ सरकार पर नई सड़कों के लिए फंड देने का दबाव कम हो गया है। इसके बाद भी राज्य में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना चल रही है, जिसके जरिए गांवों में ग्रामीणों की सुविधा के लिए सड़कें बनाने का काम चल रहा है। साथ ही नेशनल हाइवे को राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग मेंटेन करता है, इसलिए इसकी चिंता भी राज्य के बजट में नहीं की जाती।
घर बना बजट का हिस्सा
बजट में एक बड़ा परिवर्तन यह आया है कि सरकारी संपत्तियों के निर्माण के अलावा अब जनता के मकान की चिंता की जाने लगी है। प्रधान मंत्री आवास के लिए वैसे तो 60 प्रतिशत फंड केंद्र सरकार से आता है, मगर राज्य को 40 फीसद फंड का बंदोबस्त करना होता है। एक जमाना था जब बजट में घर शब्द ही गायब था, जबकि यही प्राथमिकता बन गई है।
गांव और किसान पर फोकस
राज्य बजट में पहले सिंचाई से संबंधित परियोजनाओं के लिए फंड दिया जाता था। इसके अलावा कृषि विभाग को फसलों को प्रोत्साहन के लिए फंड मिलता था। इसमें बड़ा बदलाव यह आया है कि अब गांव और किसानों की चिंता की जाने लगी है। सिंचाई विभाग के जरिए नहरों और बांध के लिए फंड तो दिया ही जाता है, धान खरीदी के नाम पर सीधे किसानों की जेब में पैसा जा रहा है। इसने गांव की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। जबकि वर्तमान भाजपा सरकार ने महतारी वंदन के नाम पर महिलाओं को भी सीधी मदद देने का सिलसिला शुरू कर दिया है। यही कारण है कि सरकार के सामने इस करीब 30 हजार करोड़ रुपये वार्षिक खर्च को देखते हुए बजट में फंड मैनेजमेंट की बड़ी चुनौती मिली है।
ग्रामीण विकास और स्कूल शिक्षा को प्राथमिकता
शिक्षा का स्तर सुधरने और साक्षरता का प्रतिशत बढ़ने के बाद राज्य को बजट के फंड आवंटन में भी बदलाव करना पड़ा है। बजट का बड़ा हिस्सा शिक्षा विभाग को मिल रहा है। बीते बजट में ही शिक्षा विभाग को 22 हजार करोड़ से अधिक का फंड दिया गया। इसके कारण गांव- गांव में स्कूल भवन की तस्वीर बदल गई है और उच्च शिक्षा विभाग के जरिए कॉलेजों की संख्या बढ़ती चली जा रहा है। इसी तरह ग्रामीण विकास बजट में महत्वपूर्ण हो गया है। बीते बजट में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक का फंड ग्रामीण विकास पर खर्च किया गया, उम्मीद की जा रही है इसमें बढ़ोतरी होगी।