Bilaspur High Court: कर्मचारियों की खबर: सहायक अनुसंधान अधिकारी के डिमोशन आदेश पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, पढ़िए क्या है आदेश में
Bilaspur High Court: हाई कोर्ट का यह फैसला कर्मचारियों के लिए राहत भरी है। जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच ने आदिम जाति विकास विभाग के उस आदेश पर रोक लगा है जिसमें सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर प्रमोशन करने के बाद डिमोशन कर दिया है। कोर्ट ने डिमोशन आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता मीनाक्षी भगत ने अधिवक्ता मतीन सिद्धीकी व नरेंद्र मेहेर के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.
Bilaspur High Court: बिलासपुर। हाई कोर्ट का यह फैसला कर्मचारियों के लिए राहत भरी है। जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच ने आदिम जाति विकास विभाग के उस आदेश पर रोक लगा है जिसमें सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर प्रमोशन करने के बाद डिमोशन कर दिया है। कोर्ट ने डिमोशन आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता मीनाक्षी भगत ने अधिवक्ता मतीन सिद्धीकी व नरेंद्र मेहेर के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
मीनाक्षी भगत ने अपनी याचिका में लिखा है कि उसकी नियुक्ति सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर वर्ष 2008 में हुई थी। विभाग द्वारा जारी वरिष्ठता सूची में उसका नाम वरीयता क्रम में प्रथम होने के कारण विभागीय पदोन्नति समिति ने उपयुक्त पाए हुए पदोन्नति की अनुशंसा की थी। डीपीसी की अनुशंसा के आधार पर आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग ने दिसंबर 2022 में उसकी पदोन्नति सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर किया था।
विभाग के अन्य अनुसंधान सहायकों ने उसकी पददोन्नति तथा डीपीसी की अनुशंसा को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के अलावा विभाग के समक्ष अभ्यावेदन पेश किया था। विभाग द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन का परीक्षण किया, परीक्षण उपरांत पाया कि वर्ष 2016 एवं 2020 में विभाग द्वारा सहायक अनुसंधान अधिकारी, सहायक नियोजन अधिकारी, सहायक सांख्यिकी अधिकारी की संयुक्त सूची तैयार की गई थी। दोनों संवर्ग की संयुक्त सूची तैयार कर अधिकारियों का चयन किया गया था । संयुक्त सूची तैयार करते हुए विभागीय पदोन्नति समिति DPC की बैठक 28 दिसंबर 2022 कोआयोजित करने का निर्णय लिया था जिसे आगे बढ़ाते हुए 11 दिसंबर 2025 को आयोजित की गई।
DPC की अनुशंसा को हाई कोर्ट में दी चुनौती
विभागीय पदोन्नति समिति ने मीनाक्षी भगत के नाम पर विचार किया। संवर्ग में पद रिक्त नहीं होने के कारण सहायक अनुसंधान अधिकारी से सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर डिमोशन कर दिया। डीपीसी की अनुशंसा को चुनौती देते हुए मीनाक्षी भगत ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और नरेंद्र मेहेर के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
अधिवक्ता मतीन ने कहा: विभागीय अफसरों ने प्राकृतिक न्याय सिद्धांत का उल्लंघन किया है
याचिका की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता मतीन सिद्धीकी ने कहा, याचिकाकर्ता मीनाक्षी भगत का प्रमोशन सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर दिसंबर 2022 में की गई थी। तब से लेकर आज तक वह इस पद पर नियमित रूप से कार्य करते हुए आ रही है। विभाग द्वारा बिना कोई सूचना के डिमोशन किया जाना प्राकृतिक न्याय सिद्धांत के विपरीत है। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी डिमोशन आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।