Bilaspur High Court News: हाई कोर्ट ने कहा: परिवार को दहेज जैसे झूठे केस में फंसाना मानसिक क्रूरता, पति को दी तलाक की मंजूरी
Bilaspur High Court News: पत्नी ने पति सहित परिवार के सदस्यों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करा दिया था। पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा,परिवार को दहेज जैसे झूठे केस में फंसाना मानसिक क्रूरता है।
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9 February 2026|बिलासपुर। पत्नी ने पति सहित परिवार के सदस्यों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करा दिया था। पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा,परिवार को दहेज जैसे झूठे केस में फंसाना मानसिक क्रूरता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने पति को विवाह विच्छेद की अनुमति देते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया है
पति की याचिका पर जस्टिस संजय के अग्रवाल व जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा, पति और उसके परिवार पर दहेज प्रताड़ना का झूठा केस दर्ज कराना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इस टिप्पणी के साथ डिवीजन बेंच ने पति को तलाक की अनुमति दे दी है। धमतरी निवासी धर्मेंद्र साहू का विवाह 28 अप्रैल 2009 को संध्या साहू के साथ हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था। विवाह के बाद उनकी दो बेटियां हुई। 10 अप्रैल 2017 को पत्नी ने पति, देवर और सास के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए धारा 498 ए के तहत एफआईआर दर्ज करा दी थी। अपराध दर्ज कराने के बाद अपने मायके चली गई और फिर वापस ससुराल नहीं लौटी है। दहेज प्रताड़ना संबंधी मामला धमतरी कोर्ट में मामला चला। पति व ससुराल वालों पर लगाई दहेज प्रताड़ना के आरोप को पत्नी अदालत में साबित नहीं कर पाई। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने पति व उसके परिजनों को दहेज प्रताड़ना के आरोप से बरी कर दिया।
अदालत के फैसले के बाद पति ने फैमिली कोर्ट में मामला प्रस्तुत किया और क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की। मामले की सुनवाई के बाद धमतरी के बाद धमतरी के फैमिली कोर्ट ने मामला खारिज कर दिया था। फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए पति ने हाई कोर्ट में विवाह विच्छेद की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने माना कि पति के प्रति पत्नी का व्यवहार क्रूर था। इसी आधार पर 2009 में हुई शादी को भंग करने का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने पत्नी को भविष्य में स्थायी गुजारा भत्ता के लिए अलग से आवेदन करने की छूट दी है।
हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि पति और उसके बुजुर्ग परिजनों ने 5 साल तक आपराधिक मुकदमें का सामना किया। गिरफ्तारी की आशंका और समाज में प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचना पति के लिए गंभीर मानसिक आघात जैसा है। डिवीजन बेंच ने अपनेन फैसले में कहा, जब किसी व्यक्ति को झूठे आरोपों के कारण मुकदमे से गुजरना पड़ता है और वह अंततः बरी हो जाता है, तो यह नहीं माना जा सकता कि उसके साथ क्रूरता नहीं हुई है। इस टिप्पणी के साथ पति की याचिका को डिवीजन बेंच ने स्वीकार करते हुए तलाक की अनुमति दे दी है।