CG के इस कॉलेज को मिली हाई कोर्ट से राहत, रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी के आदेश को किया रद्द, कोर्ट ने रजिस्ट्रार को नए सिरे से जांच की दी छूट और ये कहा...
Bilaspur High Court: अनियमितता और गड़बड़ी की शिकायत को स्वत: संज्ञान में लेते हुए रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी ने डीपी विप्र काॅलेज बिलासपुर की जांच पड़ताल का निर्देश दिया था। इसके लिए रजिस्ट्रार ने जांच अधिकारी की नियुक्ति कर दी थी।याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी द्वारा जारी जांच के आदेश को रद्द कर दिया है।
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Bilaspur High Court: बिलासपुर। अनियमितता और गड़बड़ी की शिकायत को स्वत: संज्ञान में लेते हुए रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी ने डीपी विप्र काॅलेज बिलासपुर की जांच पड़ताल का निर्देश दिया था। इसके लिए रजिस्ट्रार ने जांच अधिकारी की नियुक्ति कर दी थी। डीपी विप्र शिक्षण समिति व डीपी विप्र कॉलेज ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर रजिस्ट्रार फर्म एवं साेसायटी द्वार जारी आदेश को रद्द करने की मांग की थी। याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी द्वारा जारी जांच के आदेश को रद्द कर दिया है। हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने रजिस्ट्रार फर्म एवं साेसायटी को नए सिरे से स्पष्ट आदेश के साथ जांच की छूट भी दी है।
याचिकाकर्ता कॉलेज और शिक्षण समिति ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी द्वारा 22 फरवरी 2026 को नोटिस जारी करने और उसे जारी रखने की संपूर्ण कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने इसे मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था।
याचिका की सुनवाई जस्टिस एनके चंद्रवंशी के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने बताया कि याचिकाकर्ता शिक्षण समिति छत्तीसगढ़ सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1973 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत गठित एक सोसायटी है, जिसका पंजीकरण क्रमांक 2162 26 अप्रैल 1971 है। समिति डीपी विप्र के नाम से एक कॉलेज चलाती है। उन्होंने आगे बताया कि गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ और प्रोफेसर सुबीर सेन अध्यक्ष, गैर अनुदान, प्राप्त आशावादी महाविद्यालीन प्राध्यापक संघ द्वारा 09 दिसंबर 2025 को की गई शिकायत के आधार पर याचिकाकर्ताओं को नोटिस भेजा गया था, जिसके जवाब में उन्होंने विस्तृत उत्तर दिया और स्पष्ट किया कि उक्त कॉलेज के प्रबंधन और संचालन में कोई अनियमितता या अवैधता नहीं है। जवाब देने के बावजूद, रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी ने जांच का आदेश दिया गया है।
पढ़िए क्या है मामला और क्यों हुआ विवाद
कॉलेज प्रबंधन पर आरोप लगाया गया है, डीपी विप्र कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. आरपी पांडे को निलंबन की अवधि के लिए वेतन और सेवानिवृत्ति बकाया का भुगतान नहीं किया गया था। यह भी आरोप है कि एक ग्रेड-III कर्मचारी अरुण कुमार कश्यप को अवैध रूप से सेवा से हटा दिया गया था, हालांकि बाद में सरकार के आदेश के अनुसार उन्हें बहाल कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने रिट याचिका दायर करके उच्च न्यायालय का रुख किया, जो 17 वर्षों तक लंबित रही, जिससे उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। वकील ने आगे बताया कि विवादित आदेश अस्पष्ट है, क्योंकि इसमें उन विशिष्ट मुद्दों या बिंदुओं का उल्लेख नहीं है जिन पर जांच की जानी है। इसलिए, यह प्रार्थना की जाती है कि 23 फरवरी .2026 के विवादित आदेश को रद्द किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार के वकील ने दिया ये जवाब
राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कहा, शिकायत में याचिकाकर्ता महाविद्यालय के प्रबंधन के विरुद्ध विभिन्न आरोप लगाए गए हैं, विशेष रूप से वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में। उक्त शिकायत के आधार पर, रजिस्ट्रार ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया और 23 फरवरी 2026 का आदेश पारित किया, जिसमें समिति और महाविद्यालयों के कामकाज, गठन और वित्तीय स्थिति की जांच करना आवश्यक बताया गया है। साथ ही, प्राप्त शिकायतों और सूचना तथा छत्तीसगढ़ सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1973 की धारा 27 और 28 के उल्लंघन के संबंध में संस्थान द्वारा प्रस्तुत जानकारी की भी जांच करना आवश्यक है।
रजिस्ट्रार ने जांच करने के लिए एक जांच अधिकारी भी नियुक्त किया है।
पढ़िए रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी के आदेश में क्या है?
संस्था स्नातक महाविद्यालय शिक्षण समिति, डी.पी. विप्र महाविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1973 के अधीन पंजीयन कमांक-2162, 26 अप्रैल 1971 पर पंजीकृत संस्था है. जिस पर उक्त अधिनियम के समस्त प्रावधान प्रभावशील है।
उक्त समिति में प्राप्त शिकायतों के संस्था की ओर से प्राप्त उत्तर, शिकायतकर्ता के प्रतिउत्तर तथा सहायक रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं संस्थाएं, बिलासपुर संभाग से प्राप्त उनके पत्र 20 फरवरी 2026 के परीक्षण उपरांत समिति व संचालित महाविद्यालयों के कार्यकरण, गठन एवं वित्तीय स्थिति की जांच किया जाना आवश्यक है।
संस्था स्नातक महाविद्यालय शिक्षण समिति, डी.पी. विप्र महाविद्यालय, बिलासपुर, में स्थित है। अतः प्राप्त शिकायती पत्र के बिन्दुओं की जांच एवं संस्था के द्वारा प्रस्तुत अधिनियम की धारा-27 एवं 28 की जानकारी व उसके उल्लंघन की जांच हेतु ज्ञान प्रकाश साहू सहायक रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं संस्थाएं, बिलासपुर संभाग बिलासपुर को अधिनियम की धारा-32 (1) के तहत् स्वप्रेरण के तहत् जांच किये जाने हेतु जांच अधिकारी नियुक्त किया जाता है। जांच अधिकारी को जांच कार्य हेतु अधिनियम की धारा-32(3) की
शक्तियों प्राप्त होंगी। जांच अधिकारी उक्तानुसार जांच 21 दिन में पूर्ण कर जांच प्रतिवेदन इस कार्यालय को प्रस्तुत करेंगे।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा है?
याचिका की सुनवाई जस्टिस एनके चंद्रवंशी के सिंगल बेंच में हुई। जस्टिस चंद्रवंशी ने अपने फैसले में कहा है, 23 फरवरी 2026 के आदेश और ऊपर दिए गए दस्तावेजों की सूची में मौजूद अस्पष्टता को देखते हुए, यह समझना कठिन है कि किन तथ्यों, आरोपों, अनियमितताओं या अवैधताओं की जांच की जानी है। इसलिए, इस याचिका को लंबित रखने के बजाय, न्यायालय 23 फरवरी 2026 के विवादित आदेश और याचिकाकर्ता डीपी विप्र शिक्षण समिति व डीपी विप्र कॉलेज को जारी 27 फरवरी .2026 के अनुवर्ती नोटिस को रद्द करना उचित समझता है, तथा रजिस्ट्रार फर्म और सोसायटी, छत्तीसगढ़, को नए सिरे से आदेश पारित करने की स्वतंत्रता देता है।
नोटिस को रद्द करने के साथ ही रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी को दी ये छूट
जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने अपने फैसले में कहा है, 23 फरवरी 2026 का विवादित आदेश और 27 फरवरी 2026 का नोटिस दस्तावेजों की सूची सहित रद्द किए जाते हैं। हालांकि, रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी को यह स्वतंत्रता दी जाती है कि वह एक नया, तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश पारित करे, जिसमें जांच के विशिष्ट बिंदुओं, अनियमितता के कृत्य, अवैधता, प्रासंगिक अवधि आदि को स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किया जाए, ताकि संबंधित मुद्दों की उचित समझ, प्रतिक्रिया और निर्णय संभव हो सके।