Bilaspur High Court: 38 साल पुराने दवा केस में राज्य की अपील खारिज,निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट ने ठहराया सही
Bilaspur High Court: बिलासपुर हाई कोर्ट ने 38 वर्ष पुराने दवा प्रकरण में राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है।
सोर्स- इंटरनेट, एडिट- npg.news
14 February 2026|बिलासपुर। हाई कोर्ट ने 38 वर्ष पुराने दवा प्रकरण में राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल के सिंगल बेंच ने निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया है। निचली अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया था।
मामला वर्ष 1988 में खैरागढ़ स्थित पंडित मेडिकल स्टोर्स से लिए गए दवा नमूने से जुड़ा है। 16 मार्च 1988 को ड्रग इंस्पेक्टर ने पैराक्विन टैबलेट का नमूना लिया था, जिसे इंदौर की कंपनी एमएस पारस फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट द्वारा निर्मित बताया गया था। भोपाल स्थित सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट में दवा को मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद विक्रेता, थोक विक्रेता और निर्माता कंपनी के भागीदारों को आरोपी बनाते हुए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 के तहत मामला दर्ज किया था। मामले की सुनवाई करते हुए डोंगरगढ़ की अदालत ने वर्ष 2002 में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि, दवा का नमूना लेने और जांच की प्रक्रिया विधि अनुसार अपनाई गई थी। दवा की आपूर्ति श्रृंखला (निर्माता से विक्रेता तक) को प्रमाणित करने में गंभीर खामियां रहीं। जांच अधिकारी ने मूल बिल और दस्तावेज जब्त नहीं किए, केवल फोटोकॉपी प्रस्तुत की। आरोपियों को सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेट्री में दोबारा जांच कराने का वैधानिक अधिकार था, लेकिन दवा की अवधि समाप्त हो जाने के कारण यह संभव नहीं हो सका। इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दिया है।