कुत्ते के काटने से महिला की मौत: पागल कुत्ते के काटने से फैला रेबीज, जानिए रेबीज के लक्षण और बचाव के उपाय
महिला को कुत्ते के काटने पर जड़ी-बूटी से इलाज कराना उस वक्त महंगा पड़ गया, जब उसकी रेबीज के कारण मौत हो गई।
फोटो सोर्स- इंटरनेट, एडिट, npg.news
बलरामपुर 18 मार्च 2026, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र में रहने वाली एक महिला को कुत्ते के काटने पर जड़ी-बूटी से इलाज कराना उस वक्त महंगा पड़ गया, जब उसकी रेबीज के कारण मौत हो गई। डेढ़ महीने पहले कुत्ते के काटने पर महिला ने एंटी रेबीज इंजेक्शन न लगाकर जड़ी बूटी से इलाज कराया था और घाव भर जाने पर बेफिक्र हो गई थी। सोमवार को तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आज सुबह उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
पागल कुत्ते के काटने के बाद क्या हुआ ?
जानकारी के मुताबिक, मृतका की पहचान कमिला (34) के रूप मे हुई है, जो कि गम्हारडीह गांव की रहने वाली थी। डेढ़ महीने पहले वह अपने पति के साथ लकड़ी लेने जंगल गई थी, जहां उसे पागल कुत्ते ने काट लिया था। इस दौरान उन्होंने चिकित्सा उपचार छोड़कर जड़ी बूटी से इलाज का रास्ता चुना और घाव भर जाने के बाद बेफिक्र हो गई कि वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गई है।
चिकित्सकों ने क्या कहा ?
16 मार्च को तबीयत बिगड़ने पर उसे शंकरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां से उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। वहीं आज बुधवार सुबह साढ़े 10 बजे महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। चिकित्सकों ने भी महिला की मौत रेबीज फैलने से होने की पुष्टी की है।
दो दिन में रेबीज से दूसरी मौत
बता दें कि इससे पहले अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में सोमवार रात को महाराजगंज गांव में रहने वाले रमजीत राम (35) की रेबीज से मौत हो गई थी। नवंबर 2025 में उसे कुत्ते ने काट लिया था तब उसने चिकित्सकीय उपचार के बजाय जड़ी-बूटी से इलाज का रास्ता चुना और घाव ठीक होने पर लगा कि वह पूरी तरह से स्वस्थ है, लेकिन 15 मार्च को उसकी तबीयत बिगड़ गई और कुत्ते जैसी आवाजें निकालने लगा। इसके बाद परिजन उसे रामानुजगंज अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। यहां इलाज के दौरान सोमवार शाम को रमजीत की मौत हो गई। डॉक्टरों ने भी पुष्टी करते हुए बताया कि युवक की मौत रेबीज संक्रमण फैलने के कारण हुई है।
हर साल कितने लोगों की रेबीज से मौत होती है ?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में रेबीज से होने वाली मौतों में से 36% अकेले भारत में होती हैं। हमारे देश में हर साल 18,000 से 20,000 लोग रेबीज से अपनी जान गँवाते हैं। इनमें से 30 से 60 प्रतिशत पीड़ित 15 साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं, क्योंकि अक्सर उनके काटने की घटनाओं को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
रेबीज कैसे फैलता है ?
जब कोई रेबीज संक्रमित जानवर इंसानों को काट लेता है, तो उस जानवर की लार में मौजूद वायरस इंसानों में फैल जाता है। कभी-कभी रेबीज संक्रमित जानवर के खरोच मात्र से ही रेबिज फैल सकता है।
रेबीज के लक्षण क्या है ?
- बुखार
- घबराहट
- पानी पीने में दिक्कत
- सिरदर्द
- बुरे सपने
- बहुत ज़्यादा लार आना
रेबीज से बचने के उपाय क्या है ?
बता दें कि रेबीज को जड़ से खत्म करने के लिए कोई इलाज तो नहीं है पर डॉक्टर के मुताबिक कुछ ऐसे उपाय है, जिससे रेबीज को फैलने से रोका जा सकता है।
1. टीकाकरण: रेबीज (Rabies) की बीमारी से बचाव के लिए आप कुत्तों और पालतु जानवरों का नियमित टीकाकरण जरुर कराएं। अगर किसी को संक्रमित जानवर ने काटा है तो उन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) और रैबीज इम्यून ग्लोब्युलिन (RIG) लगवाना चाहिए।
2. घाव की तुरंत सफाई: संक्रमित जानवरों के काटने या फिर खरोचने पर घाव को कम से कम 15 मीनट तक साबुन और साफ पानी से धोए।
3. आवारा जानवरों से दूरी बना रखें: ध्यान रखें कि आप अवारा और संक्रमित जानवरों के संपर्क में न आएं।