Union Budget 2026–27: कल 1 फरवरी को पेश होगा आम बजट, निर्मला सीतारमण का लगातार 9वां बजट, इन सेक्टर्स पर रहेगी नजर, जानिए क्या होगा आम आदमी पर असर?
Union Budget 2026 Date and Time: वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला एक अहम दस्तावेज होगा।
Union Budget 2026 Date and Time: वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला एक अहम दस्तावेज होगा। इस बार बजट को लेकर खास चर्चा इसलिए भी है क्योंकि रविवार, 1 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में इसे पेश करेंगी। यह उनका लगातार नौवां केंद्रीय बजट होगा जो भारतीय राजनीति और आर्थिक इतिहास में एक रिकॉर्ड माना जा रहा है।
आंकड़ों और घोषणाओं से आगे यह बजट सरकार की प्राथमिकताओं, राजकोषीय रणनीति और आने वाले वर्षों के विकास रोडमैप को स्पष्ट करेगा। इससे संकेत मिलेगा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, टैक्स और रोजगार जैसे क्षेत्रों में सरकार का फोकस कितना और किस दिशा में रहेगा।
क्यों खास है Union Budget 2026?
इस बार का Union Budget 2026 कई मायनों में अलग है। पहली बार ऐसा माना जा रहा है कि बजट रविवार को पेश होगा। इससे पहले आमतौर पर बजट कार्यदिवस में ही पेश किया जाता रहा है। 2017 तक बजट फरवरी के आखिरी दिन आता था लेकिन पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने परंपरा बदलते हुए इसे 1 फरवरी कर दिया ताकि बजट की घोषणाएं 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष के साथ ही लागू हो सकें। इस बार संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक प्रस्तावित है जिसमें बजट पर विस्तृत चर्चा और बहस होगी।
स्वतंत्र भारत का पहला बजट कब पेश हुआ था?
स्वतंत्र भारत का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। उस समय देश के पहले वित्त मंत्री आर. के. शनमुखम चेट्टी ने संसद में बजट रखा था। तब से लेकर आज तक केंद्रीय बजट भारत की आर्थिक नीति का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बना हुआ है।
बजट सत्र की शुरुआत कैसे होती है?
बजट की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होती है। संविधान के अनुच्छेद 87 के तहत राष्ट्रपति संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हैं। इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने भाषण में ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य, सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर दिया, जिसे बजट की प्राथमिकताओं का संकेत माना जा रहा है।
केंद्रीय बजट क्या होता है?
केंद्रीय बजट सरकार की आय और खर्च का सालाना लेखा-जोखा होता है। संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार सरकार को हर वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित आय और व्यय संसद के सामने रखना अनिवार्य है। इसे वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement) कहा जाता है। भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है।
राजस्व बजट और पूंजी बजट का फर्क
राजस्व बजट में सरकार की नियमित आय और रोजमर्रा के खर्च शामिल होते हैं। इसमें आयकर, जीएसटी जैसे कर, गैर-कर आय, वेतन, पेंशन, सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं का खर्च आता है। जब राजस्व खर्च, राजस्व आय से ज्यादा हो जाए, तो उसे राजस्व घाटा कहा जाता है।
वहीं पूंजी बजट सरकार के दीर्घकालिक निवेश से जुड़ा होता है। इसमें सड़क, रेलवे, अस्पताल, स्कूल, पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला खर्च शामिल है। जब कुल खर्च, कुल आय से ज्यादा हो जाता है, तो उसे राजकोषीय घाटा कहा जाता है।
आम आदमी के लिए क्यों अहम है बजट?
केंद्रीय बजट सिर्फ कागजी दस्तावेज नहीं है, इसका सीधा असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ता है। बजट में टैक्स स्लैब, छूट और दरों में बदलाव से आपकी टेक-होम सैलरी प्रभावित होती है। रोजमर्रा की चीजें कितनी महंगी या सस्ती होंगी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर कितना खर्च होगा, रोजगार के नए मौके बनेंगे या नहीं—ये सभी सवाल बजट से जुड़े होते हैं।
क्या होता है धन्यवाद प्रस्ताव?
राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद लोकसभा और राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया जाता है। इस पर चर्चा और मतदान के बाद सरकार की नीतियों को औपचारिक मंजूरी मिलती है। नए संसद भवन बनने के बाद यह संयुक्त प्रक्रिया वहीं आयोजित की जाती है।
Union Budget 2026-27 सिर्फ एक साल का हिसाब नहीं, बल्कि आने वाले समय की आर्थिक दिशा का संकेत है। इसलिए 1 फरवरी को पेश होने वाला यह बजट सरकार, उद्योग और आम नागरिक तीनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।