Flight Ticket Hike: विदेश जाना हुआ महंगा! भारतीय एयरलाइंस ने बढ़ाए इंटरनेशनल टिकट्स के रेट, एविएशन सेक्टर में पैनिक

Flight Ticket Price: ईरान-इजरायल जंग और मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण जेट फ्यूल के दाम दोगुने हो गए हैं। भारतीय एविएशन कंपनियों ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का किराया 15 परसेंट तक बढ़ा दिया है।

Update: 2026-03-10 15:27 GMT

फोटो: AI जेनरेटेड 

नई दिल्ली 10 मार्च 2026। मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल जंग का सीधा असर अब आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है। भारतीय एयरलाइंस कंपनियों ने अपनी इंटरनेशनल फ्लाइट्स (International Flights) के किराए में करीब 15 परसेंट की भारी बढ़ोतरी कर दी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज रूट प्रभावित होने से क्रूड ऑयल और जेट फ्यूल के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। एविएशन कंपनियों का कहना है कि ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण उनके पास टिकट्स महंगे करने के अलावा कोई दूसरा ऑप्शन नहीं बचा है।

जेट फ्यूल के दाम हुए दोगुने, एयरलाइंस पर बढ़ा बोझ

एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च में जेट फ्यूल की हिस्सेदारी 30 से 40 पेसेंट तक होती है। 28 फरवरी को शुरू हुई ईरान-इजराइल जंग के बाद से ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह डिस्टर्ब हुई है। जंग से पहले जेट फ्यूल के दाम 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थे, जो अब तेजी से बढ़कर 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। वहीं, ब्रेंट क्रूड ऑयल 93 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर आ गया है जो एक दिन पहले 120 डॉलर तक पहुंच गया था।

40,000 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल, छोटी एयरलाइंस पर शटडाउन का खतरा

ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री इस वक्त 1970 के दशक के बाद के सबसे बड़े तेल संकट का सामना कर रही है। स्पार्टा कमोडिटीज की सीनियर एनालिस्ट जून गोह के अनुसार एविएशन सेक्टर में इस वक्त पैनिक की स्थिति है। अब तक दुनियाभर में 40,000 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल हो चुकी हैं। जर्मन बैंक 'डॉयचे बैंक' के एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे तो दुनिया भर में हजारों विमान ग्राउंडेड (खड़े) हो जाएंगे और कई छोटी एयरलाइंस बंद होने की कगार पर आ सकती हैं।

एशियाई एयरलाइंस सबसे ज्यादा खतरे में

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यूरोपीय या अमेरिकी एयरलाइंस के मुक़ाबले एशियाई एयरलाइंस ज्यादा खतरे में हैं। इसका मुख्य कारण उनके पास 'फ्यूल हेजिंग' (फ्यूचर के लिए फिक्स कीमत पर ईंधन लॉक करने का प्रोग्राम) की पुख्ता व्यवस्था का न होना है। वियतनाम की सरकारी मीडिया ने तो यहां तक चेतावनी दी है कि वहां भारी फ्यूल इंपोर्ट के चलते हवाई किराए में 70 प्रतिशत तक का उछाल आ सकता है।

कुछ कंपनियों को हो रहा फायदा

जहां ज्यादातर एयरलाइंस इस क्राइसिस में सर्वाइवल की लड़ाई लड़ रही हैं वहीं लुफ्थांसा (Lufthansa) जैसी कंपनियां इसे एक मौके की तरह देख रही हैं। लुफ्थांसा के CEO कार्सन स्पोह्र ने मीडिया को बताया कि उनकी कंपनी ने फ्यूल प्राइज को पहले ही हेज किया हुआ है। इसका फायदा उठाते हुए वे एशिया और अफ्रीका के रूट्स पर अपनी क्षमता बढ़ाने की प्लानिंग कर रहे हैं ताकि मिडिल ईस्ट की प्रभावित एयरलाइंस के मार्केट शेयर पर कब्जा किया जा सके।

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