Personal Loan EMI: फ्लैट या रेड्यूसिंग रेट? लोन लेते समय कौन सा ऑप्शन आपके लिए रहेगा बेस्ट, समझें रेड्यूसिंग ब्याज दर का पूरा गणित
Personal Loan EMI: बैंक से पर्सनल लोन लेते समय फ्लैट और रेड्यूसिंग रेट का अंतर समझना जरूरी है। जानिए कैसे कम दिखने वाला फ्लैट रेट महंगा पड़ता है और सही इंटरेस्ट रेट कैसे चुनें।
Personal Loan Interest Rate: बैंक या NBFC से पर्सनल लोन (Personal Loan) लेते समय फ्लैट और रेड्यूसिंग रेट का फर्क समझना आपके लिए बेहद जरूरी है। कम ब्याज दर के लालच में अक्सर ग्राहक फ्लैट रेट चुनकर नुकसान कर बैठते हैं। फाइनेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक हमेशा रेड्यूसिंग बैलेंस मेथड (Reducing Rate) चुनना चाहिए क्योंकि यह ज्यादा ट्रांसपेरेंट और लंबी अवधि में सस्ता साबित होता है।
फ्लैट रेट (Flat Rate) क्या है और यह क्यों महंगा पड़ता है?
बैंक या फाइनेंस कंपनियां फ्लैट रेट में पूरे लोन अमाउंट और पूरी अवधि के लिए ब्याज एक ही बार में फिक्स कर देती हैं। आपकी EMI हर महीने प्रिंसिपल अमाउंट (मूलधन) को कम करती है लेकिन ब्याज हमेशा ओरिजिनल अमाउंट पर ही कैलकुलेट होता रहता है। मिसाल के तौर पर अगर आपने 2 लाख रुपये का लोन 12 परसेंट फ्लैट रेट पर लिया है, तो ब्याज हमेशा पूरे 2 लाख पर ही लगेगा। यही वजह है कि दिखने में सस्ता लगने वाला 12 फीसद का फ्लैट रेट असल में 22 से 24 प्रतिशत रेड्यूसिंग रेट के बराबर का खर्च निकालता है।
रेड्यूसिंग रेट (Reducing Rate) कैसे काम करता है?
रेड्यूसिंग रेट सिस्टम में ब्याज सिर्फ उसी रकम पर लगता है, जो आउटस्टैंडिंग (Outstanding) बची रहती है। आप जैसे-जैसे अपनी EMI चुकाते हैं, आपका प्रिंसिपल अमाउंट घटता जाता है और उसी के हिसाब से ब्याज का बोझ भी कम होता रहता है। बैंकिंग सेक्टर और रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार इसे सबसे फेयर और ट्रांसपेरेंट मॉडल माना जाता है।
फ्लैट वर्सेस रेड्यूसिंग: ब्याज का असल गणित समझें
सिर्फ ब्याज का प्रतिशत देखकर कभी भी लोन सस्ता या महंगा तय नहीं करना चाहिए। मान लीजिए कि आपने 1 लाख रुपये का लोन 3 साल के लिए लिया है। अगर फ्लैट रेट 12 प्रतिशत है तो 3 साल में आपको कुल 36,000 रुपये का ब्याज चुकाना होगा। वहीं दूसरी तरफ अगर रेड्यूसिंग रेट 16 फीसद भी है तो ब्याज घटती रकम पर लगने के कारण 3 साल में कुल ब्याज लगभग 26,000 रुपये ही बनेगा। यानी रेट ज्यादा दिखने के बावजूद रेड्यूसिंग मेथड आपकी जेब के लिए किफायती साबित होता है।
पर्सनल लोन लेते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान
लोन अप्रूव होने से पहले बैंक अधिकारियों से APR (Annual Percentage Rate) के बारे में जरूर पूछें क्योंकि यही लोन की असली लागत दिखाता है। इसके अलावा लोन एग्रीमेंट साइन करने से पहले प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोजर चार्ज और हिडन कॉस्ट (Hidden Cost) को भी कुल लागत में जोड़कर देखें। सही कैलकुलेशन के लिए हमेशा ऑनलाइन EMI कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें। फ्लैट रेट का विकल्प तभी चुनें जब लोन का अमाउंट बहुत छोटा (10 से 30 हजार रुपये) हो और उसे कुछ ही महीनों में चुकाना हो।