Jal Jeevan Mission Scam: पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल दिल्ली से गिरफ्तार, जानिए घोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी
IAS Subodh Agarwal Arrested: राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में एसीबी ने 50 दिन से फरार चल रहे पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। जानिए क्या है 960 करोड़ के फर्जी टेंडर का पूरा मामला।
IAS Subodh Agarwal Arrested: राजस्थान के मशहूर जल जीवन मिशन टेंडर घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। करीब 50 दिनों से पुलिस को चकमा दे रहे जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के पूर्व एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया। एसीबी की टीम ने उन्हें दिल्ली में ट्रेस करने के बाद हिरासत में लिया और फिर जयपुर लाकर फॉर्मल अरेस्टिंग की प्रक्रिया पूरी की।
5 राज्यों में चला 50 दिनों का सर्च ऑपरेशन
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि सुबोध अग्रवाल को पकड़ने के लिए राजस्थान समेत पांच अलग-अलग राज्यों में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा था। 17 फरवरी को जब एसीबी ने पहली बार उनके ठिकानों पर रेड की थी तब वे टीम के हाथ नहीं आए थे। इसके बाद उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया। लगातार फरारी काटने पर 13 मार्च को कोर्ट से उनकी गिरफ्तारी का वारंट हासिल किया गया। आखिरकार 9 अप्रैल को उन्हें दिल्ली से पकड़ लिया गया।
दिल्ली और हरियाणा के पॉश इलाकों में दी गई दबिश
पूर्व आईएएस की तलाश में एसीबी की करीब 40 टीमों ने राजस्थान के जयपुर, उदयपुर, बाड़मेर, जोधपुर, झालावाड़, कोटा और नागौर में जाल बिछाया था। जब वहां कामयाबी नहीं मिली तो सर्च ऑपरेशन को दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैलाया गया। जांच टीमों ने दिल्ली के न्यू मोती बाग और डिफेंस कॉलोनी जैसे पॉश इलाकों के साथ-साथ हरियाणा के सोहना में एक फार्महाउस पर भी छापेमारी की जिसके बाद आरोपी IAS को अरेस्ट किया जा सका।
क्या है 20 हजार करोड़ का जल जीवन मिशन घोटाला?
एसीबी की जांच में यह क्लियर हो चुका है कि इस घोटाले की जड़ें सिस्टम में बहुत गहराई तक फैली थीं। प्राइवेट फर्मों और PHED के सीनियर अधिकारियों के बीच एक मजबूत नेक्सस काम कर रहा था जिसने नियमों को ताक पर रखकर टेंडर पास किए। इस पूरे घोटाले के करीब 20,000 करोड़ रुपये का होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
फर्जी सर्टिफिकेट और 960 करोड़ के टेंडर
इस नेक्सस में शामिल महेश मित्तल की 'श्री गणपति ट्यूबवेल' और पदमचंद जैन की 'श्री श्याम ट्यूबवेल' ने 'इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड' के फर्जी एक्सपीरियंस और वर्क कम्पलीशन सर्टिफिकेट तैयार किए थे। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इन चहेती कंपनियों को करीब 960 करोड़ रुपये के बड़े ठेके दे दिए गए।
सुबोध अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने पद पर रहते हुए 50 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स के लिए 'साइट विजिट सर्टिफिकेट' अनिवार्य करने जैसे कुछ ऐसे नियम लागू किए जिनका सीधा मकसद सिर्फ चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाना था।
40 परसेंट तक महंगे प्रीमियम पर पास हुए ठेके
एसीबी के मुताबिक अधिकारियों और प्राइवेट कंपनियों की इस मिलीभगत के कारण टेंडरों में 30 से 40 प्रतिशत तक का असामान्य प्रीमियम वसूला गया। हैरानी की बात यह रही कि विभाग के उच्चाधिकारियों ने इन महंगे टेंडरों को बड़ी आसानी से अपनी मंजूरी भी दे दी। इस मामले में अब तक 10 से ज्यादा अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच के लिए SIT का गठन किया गया है।