Chhattisgarh Tarkash 2024: छत्तीसगढ़ में 4000 करोड़ की GST चोरी

Chhattisgarh Tarkash 2024: छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी, राजनीति और बड़ी घटनाओं पर केंद्रित वरिष्ठ पत्रकार संजय के. दीक्षित का 15 बरसों से निरंतर प्रकाशित लोकप्रिय साप्ताहिक स्तंभ तरकश

Update: 2024-03-09 22:30 GMT

तरकश, 10 मार्च 2024

संजय के. दीक्षित

छत्तीसगढ़ में 4000 करोड़ की GST चोरी

इस हेडिंग को पढ़कर आप हतप्रभ होंगे...चोरी वो भी चार हजार करोड़ की। जी, हम जीएसटी की बात कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में 20 हजार करोड़ रुपए जीएसटी से आता है। इसमें पांच हजार करोड़ पेट्रोल, डीजल से से आता है सेस के रूप में। 15 हजार करोड़ अदर बिजनेस से। चोरी अदर बिजनेस में ही होती है। जीएसटी के अफसर मानते हैं कि मोटे तौर पर 25 से 30 फीसदी चोरी होती है। 15 हजार करोड़ के 25 परसेंट के हिसाब से करीब चार हजार करोड़ बैठता है। ये चार हजार करोड़ में से तीन हजार करोड़ छत्तीसगढ़ के करीब 200 बड़े कारोबारियों की जेब में जा रहा है। ठीक ही कहा जाता है, ईमानदारी से ऐसा प्रोग्रेस नहीं होता, जैसा रायपुर में चल रहा। बहरहाल, इस तीन हजार करोड़ से छत्तीसगढ़ में हर साल मैकाहारा जैसे 10 अस्पताल बनाए जा सकते हैं पूरे सेटअप के साथ।

GST में 3 आईएएस

23 साल में पहली बार जीएसटी चोरी करने वाले बड़े लोगों के खिलाफ सरकार ने मुहिम छेड़ी है। छत्तीसगढ़ में रोज छापे पड़ रहे हैं। दो-से- चार करोड़ रुपए रोज सरेंडर किए जा रहे हैं। दुर्ग के एक गुटखा व्यापारी ने कल चार करोड़ मौके पर जमा कराया। इससे समझा जा सकता है कि किस स्तर पर चोरियां हो रही कि उनके लिए चार करोड़ रुपए कुछ भी नहीं। जीएसटी को मजबूत करने के लिए मंत्री ओपी चौधरी ने दिल्ली से मुकेश बंसल को बुलाकर सिकरेट्री बनाया है। रजत बंसल कमिश्नर हैं ही। फर्स्ट टाईम आईएएस प्रतीक जैन को ज्वाइंट कमिश्नर बनाया गया है। प्रतीक आईएएस में आने से पहले इंकम टैक्स में रहे हैं। सो, उन्हें टैक्स चोरी की बारीकियां की जानकारी है। कुल मिलाकर अब जीएसटी चौरी करने वाले बड़े लोगों की खैर नहीं। ओपी के पास खजाने की चाबी है। वे चाहेंगे भी कि ऐसे जीएसटी चोरों पर कार्रवाई कर खजाने के लोड को कम किया जाए।

उदार मंत्री, कलाकार पीएस

छत्तीसगढ़ के विष्णुदेव सरकार के एक मंत्रीजी बेचारे सहज और लो प्रोफाइल के हैं। मगर उनके डिप्टी कलेक्टर ओएसडी उतने ही बड़े कलाकार। मंत्री के यहां पोस्टिंग का जुम्मा-जुम्मा महीना गुजरा होगा कि खेल प्रारंभ कर दिया। करीब दसेक दिन से वे अफसरों को फोन लगाकर पूछ रहे...ट्रांफसर होने वाला है, तुमको कहां जाना है...आपको बस्तर भेजा जा रहा है...फलां जिले के लिए 20 पेटी लगेगा, वहां के लिए 15। मगर आचार संहिता की हडबड़ी में ओएसडी से एक रांग नंबर डायल हो गया। उन्होंने एक ऐसे अफसर को फोन लगा डाला, जो संघ से जुड़े हुए हैं। अफसर ने अपने पृष्ठभूमि के बारे में बताया तो ओएसडी लगे हाथ-पांव जोड़ने...अरे, मैं तो मजाक कर रहा था, पता करने की कोशिश कर रहा था कि मार्केट में कोई गड़बड़ी तो नही हो रही। बताते हैं, सात अधिकारियों से ओएसडी ने एडवांस में 70 पेटी पेशगी ले ली है। मंत्रियों के स्टाफ को लेकर इसी स्तंभ में हमने आगाह किया था कि ठोक बजाकर मंत्रियों के सहायक नियुक्त किए जाएं। सरकार को एकाध कौवा मारकर टांगना चाहिए। वरना, मंत्रियों के ऐसे खटराल सहायकों से नाहक सिस्टम बदनाम होगा।

वो तीन मंत्री

रमन सरकार के 15 बरसों में ऐसा नहीं हुआ कि मंत्रियों के पीए लोगों ने करामात नहीं दिखाया। कई मंत्री ट्रांफसर, पोस्टिंग के चक्कर में काफी बदनाम हुए। मगर तब भी तीन मंत्री अपवाद थे। वह एआई का जमाना नहीं था लेकिन उन मंत्रियों का खुद का इंटेलिजेंस और कमांड इतना तगड़ा था कि उनके इशारे के बिना पत्ता नहीं हिलता था। तीनों मंत्री स्टाफ सलेक्शन में बड़ा सतर्क रहते थे। उन्हें उतने ही फ्रीडम दिया, जितना आवश्यक है। तीन में से दो मंत्री रायपुर और उसके आसपास के थे और तीसरे बिलासपुर संभाग के। इनमें से एक मंत्री ऐसे थे कि दौरे के समय पीए के मोबाइल लेकर चेक कर लेते थे कि किन लोगों के फोन आ रहे हैं और वे किनके संपर्क में हैं। तभी ये तीनों मंत्री ट्रांसफर, पोस्टिंग को लेकर कभी चर्चा में नहीं आए। बहरहाल, जब लहर गिनकर पैसा कमाने वाले पीए और पीएस हैं तो मंत्रियों को अतिरिक्त सजग रहना चाहिए।

ईओडब्लू के नए बॉस

राज्य सरकार ने पहली बार ईओडब्लू टीम की कंप्लीट सर्जरी की है। सरकार ने एक झटके में ढाई दर्जन अधिकारियों और इंस्पेक्टरों को सिंगल आदेश से वापिस बुलाकर करीब उतने ही पोस्टिंग कर दी। जाहिर है, सरकार ईओडब्लू में कुछ नया करने जा रही है। डीएम अवस्थी की जगह नए चीफ की नियुक्ति की चर्चा बड़ी तेज है। डीएम को ईओडब्लू के चीफ बने करीब सवा साल हो गए हैं। इस दौरान शराब घोटाले से रिलेटेड सिर्फ एक छापा पड़ा, जिसमें न कुछ मिलना था और न मिला। हालांकि, पहले टेन्योर में यही डीएम अवस्थी एक साल में 100 करोड़ की अनुपातहीन संपत्तियों को उजाकर किया था। मगर इस बार उनकी जरूर कोई मजबूरियां रही होगी, वरना...। खैर, सरकार अब जिसे ईओडब्लू का चीफ बनाने जा रही, वे निरपेक्ष भाव से काम करने वाले अफसर हैं। उन्हें इसका कोई मतलब नहीं कि फलां बड़ा तोप है, तो फलां बड़ा प्रभावशाली। पोस्टिंग से पहले ही उन्हें बता दिया गया है कि करप्शन का कोई टॉलरेंस नहीं रहेगा...भ्रष्टाचार के मामले में छत्तीसगढ़ की खराब हो गई छबि को दुरूस्त करना है।

आईएएस को एपीओ

राज्य सरकार ने 8 मार्च को सचिव लेवल के आईएएस अफसरों को नई पोस्टिंग की। इनमें राजस्व सचिव भुवनेश यादव से राजस्व, आपदा प्रबंधन और पुनर्वास लेकर उन्हें एपीओ कर दिया। एपीओ मतलब अवेटिंग पोस्टिंग आर्डर। भुवनेश को पोस्टिंग के लिए इंतजार करना होगा। चूकि सामने लोकसभा चुनाव है, सो उसके बाद ही उन्हें कोई विभाग मिलने की संभावना बनेगी। बहरहाल, ब्यूरोक्रेसी में भुवनेश को एपीओ करने की बड़ी चर्चा है। हर आदमी कारण टटोल रहा है। एपीओ करने की एक वजह तो यह बताई जा रही कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पिछले हफ्ते राजस्व विभाग ने बड़ी संख्या में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को ट्रांसफर किया। इसकी फाइल समन्वय में नहीं भेजी गई। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के अनुमोदन के बाद आदेश जारी हो गया। दरअसल, ट्रांसफर पर बैन है। समन्वय के अनुमोदन के बाद ही ट्रांफसर होते हैं। दूसरा, बड़ी संख्या में उठापटक होने से कनिष्ठ प्रशासनिक संघ ने सिस्टम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। चीफ सिकरेट्री से लेकर उपर तक इसकी शिकायत की गई। अब कलेक्टर से बड़ा पटवारी होता है तो फिर तहसीलदारों की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एक्स सीएम भूपेश बघेल के राजनांदगांव से चुनाव मैदान में उतरने से क्या वाकई वहां मुकाबल कड़ा हो गया है?

2. सिर्फ जीएडी और गृह विभाग में ही दबाकर क्यों ट्रांसफर हो रहे, बाकी विभागों के गड़बड़ अधिकारी कैसे बच जा रहे?

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