CG Revenue Inspector Paper Leak: राजस्व निरीक्षक पेपर लीक, रूपये लेकर बांटा गया था प्रश्न पत्र, 100 से अधिकर अभ्यर्थियों को मिला, परीक्षा से पहले अलग-अलग होटलों में ठहराया गया...

CG Revenue Inspector Paper Leak: छत्तीसगढ़ में राजस्व निरीक्षक विभागीय परीखा 2024 में पेपर लीक प्रकरण में 3000 पृष्ठों की प्रथम चालान ईओडब्ल्यू-एसीबी ने कोर्ट में पेश की। मामले में सहायक सांख्यिकी अधिकारी और सहायक संख्यिकी अधिकारी आरोपी है।

Update: 2026-02-17 12:43 GMT

CG Revenue Inspector Paper Leak: रायपुर। राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 2024 पेपर लीक मामले में एसीबी-ईओडब्ल्यू की टीम ने सहायक सांख्यिकी अधिकारी विरेंद्र जाटव और सहायक संख्यिकी अधिकारी हेमंत कुमार कौशिक के खिलाफ 3000 पृष्ठों का प्रथम चालान पेश किया गया था। जांच में पाया गया कि आरोपियों ने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक कर चुनिंदा अभ्यर्थियों से रूपये लेकर उन्हें प्रतियां उपलब्ध करवाई थी। करीब 100 से अधिक अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र मिला था।

3000 पृष्ठों का प्रथम चालान पेश

दरअसल, राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण व एंटी करप्शन ब्यूरो में राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 2024 के पेपर लीक प्रकरण में अपराध क्रमांक 64/2025, धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी भा.द.वि. एवं धारा 7 (सी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (यथासंशोधित 2018) का दर्ज किया गया था। आरोपी विरेन्द्र जाटव (सहायक सांख्यिकी अधिकारी) व हेमंत कुमार कौशिक (सहायक सांख्यिकी अधिकारी) के विरुद्ध न्यायालय में आज 3000 पृष्ठों का प्रथम चालान प्रस्तुत किया गया।

रुपये लेकर बेचे थे प्रश्न पत्र

जाँच में पाया गया कि राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 7 जनवरी 2024 को आयोजित होना था, आरोपी विरेन्द्र जाटव ने वरिष्ठ अधिकारी के आवास पर प्रश्नपत्र टाइप किया। लेकिन परीक्षा शुरू होने के पहले ही आरोपियों द्वारा प्रश्नपत्र लीक कर चुनिंदा उम्मीदवारों इसकी प्रतियां रकम लेकर उपलब्ध करायी थी।

100 से अधिक अभ्यर्थियों को मिला था प्रश्नपत्र 

जाँच में सबूतों के आधार पर यह पुष्टि हुई कि 100 से अधिक अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र मिला था हुआ। विवेचना के दौरान प्रकरण में आरोपियों के विरुद्ध डिजिटल साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं, जिनसे यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपियों द्वारा विभिन्न माध्यमों से पटवारी अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया तथा उसके बदले राशि प्राप्त की गई थी।

अभ्यर्थियों को ठहराया गया था अलग-अलग होटलों में 

जाँच में यह भी पाया गया कि अलग-अलग जिलों के कुछ अभ्यर्थी समूह के रूप में परीक्षा देने आए थे, जिन्हें आरोपियों द्वारा अलग-अलग होटलों में ठहरने हेतु कहा गया। संबंधित होटलों में पहुंचकर उक्त अभ्यर्थियों को प्रश्न उपलब्ध कराए गए। आरोपियों द्वारा अभ्यर्थियों को प्रश्न पढ़कर नोट कराए गए तथा परीक्षा से पूर्व लिखे हुए प्रश्नों को जलाने के लिए कहा गया, ताकि साक्ष्य नष्ट हो सके। इस कार्य हेतु आरोपियों द्वारा अपने रिश्तेदारों का भी उपयोग किया गया, जो अलग-अलग होटलों में जाकर अभ्यर्थियों को परीक्षा में आने वाले प्रश्न नोट कराने की प्रक्रिया में आरोपियों के साथ शामिल रहे।

सीडीआर विश्लेषण में यह भी पाया गया कि परीक्षा से ठीक पूर्व रात्रि को कई अभ्यर्थियों की लोकेशन आरोपियों की लोकेशन के साथ समान पाई गई। इसके साथ ही आरोपियों द्वारा परीक्षा की पूर्व रात में रात भर अलग-अलग स्थानों, होटलों, फार्म हाउस एवं रिजॉट्स पर आवागमन कर उन स्थानों पर प्रश्न सामग्री उपलब्ध कराए जाने की पुष्टि भी उनके सीडीआर से प्राप्त टावर लोकेशन से होती है, जहां अभ्यर्थी ठहरे हुए थे।

इसके अतिरिक्त, विवेचना में यह तथ्य भी सामने आया है कि जो अभ्यर्थी एक साथ होटलों में ठहरे थे, उनके परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय समानता पाई गई। संबंधित अभ्यर्थियों के अंकों में समानता के साथ-साथ उनकी उत्तर-पुस्तिकाओं के परीक्षण में सही एवं गलत उत्तरों के पैटर्न में भी समानता पाई गई।

प्रकरण में वित्तीय लेनदेन (मनी ट्रेल) सहित अन्य संभावित संलिप्त अधिकारियों, राजस्व निरीक्षकों एवं व्यक्तियों की भूमिका की जांच जारी है। दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (8) के तहत् विवेचना जारी है।

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