Mukul Roy Passes Away : दिग्गज नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन : 71 साल की उम्र में कोलकाता में ली आखिरी सांस

Mukul Roy Passes Away : बंगाल की राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का रविवार देर रात निधन हो गया. 71 साल की उम्र में उन्होंने कोलकाता के अस्पताल में आखिरी सांस ली. पिछले काफी समय से उनकी तबीयत खराब चल रही थी और कार्डियक अरेस्ट की वजह से उनका देहांत हुआ. मुकुल रॉय को तृणमूल कांग्रेस का आधार स्तंभ माना जाता था, जिन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर पार्टी को खड़ा करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी.

Update: 2026-02-23 02:33 GMT

Mukul Roy Passes Away : दिग्गज नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन : 71 साल की उम्र में कोलकाता में ली आखिरी सांस

Mukul Roy Passes Away : कोलकाता : बंगाल की राजनीति का एक बड़ा चेहरा और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय अब हमारे बीच नहीं रहे. रविवार देर रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में उनका निधन हो गया. वे 71 वर्ष के थे और पिछले काफी समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे. उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने इस दुखद खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि मुकुल रॉय को दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उनका निधन हो गया.

सियासी सफर ममता के चाणक्य से बीजेपी के दिग्गज तक

मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर बंगाल की गलियों से शुरू होकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक पहुंचा. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत यूथ कांग्रेस से की थी, लेकिन उनकी असली पहचान तब बनी जब उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस की नींव रखी. वे टीएमसी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और एक दौर में उन्हें ममता बनर्जी का दायां हाथ और पार्टी का सबसे बड़ा रणनीतिकार माना जाता था.

ममता बनर्जी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया. मुकुल रॉय दिल्ली में टीएमसी का चेहरा थे. साल 2006 में वे पहली बार राज्यसभा पहुंचे और 2009 से 2012 तक संसद के उच्च सदन में अपनी पार्टी का नेतृत्व किया. यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने रेल मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद भी संभाला.

दल-बदल और राजनीति के उतार-चढ़ाव

मुकुल रॉय की राजनीति में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 2017 में उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी टीएमसी को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. बीजेपी में जाते ही उन्होंने अपनी चुनावी रणनीति का लोहा मनवाया. 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में बीजेपी की 18 सीटें जीतने के पीछे मुकुल रॉय का बड़ा हाथ माना जाता है. उन्होंने टीएमसी के कई बड़े नेताओं को बीजेपी में शामिल कराने में मुख्य भूमिका निभाई थी.

2021 के विधानसभा चुनाव में वे बीजेपी के टिकट पर कृष्णनगर उत्तर सीट से विधायक भी चुने गए. हालांकि, चुनाव के ठीक बाद जून 2021 में वे अचानक फिर से टीएमसी में लौट आए. राजनीति के इस सफर में उनके ऊपर दल-बदल विरोधी कानून की तलवार भी लटकी और नवंबर 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें विधायक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था.

शुरुआती जीवन, शिक्षा और परिवार 

मुकुल रॉय का जन्म 17 अप्रैल 1954 को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा में हुआ था. उनके पिता का नाम जुगल किशोर रॉय और माता का नाम रेखा रॉय था. उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई कांचरापाड़ा में ही हुई, जिसके बाद उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी के सिटी कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की. बाद में उन्होंने मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी से लोक प्रशासन में एमए भी किया. पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव राजनीति की तरफ होने लगा था और उन्होंने यूथ कांग्रेस के जरिए समाज सेवा की शुरुआत की.

पारिवारिक स्थिति की बात करें तो मुकुल रॉय का जीवन काफी सादा रहा. उनकी शादी कृष्णा रॉय से हुई थी, जिनका कुछ साल पहले ही लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था. उनका एक बेटा है, जिनका नाम शुभ्रांशु रॉय है. शुभ्रांशु भी अपने पिता की तरह राजनीति में सक्रिय हैं और विधायक रह चुके हैं. मुकुल रॉय को राजनीति में एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता था, जो बहुत ही शांत स्वभाव के थे और अपने परिवार के साथ-साथ अपने कार्यकर्ताओं को भी एक सूत्र में बांधकर रखने की काबिलियत रखते थे.

इलाके में शोक की लहर

मुकुल रॉय पिछले कई महीनों से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण राजनीति से दूर थे. उनके निधन की खबर फैलते ही बंगाल के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है. टीएमसी और बीजेपी समेत तमाम दलों के नेताओं ने उनके निधन पर दुख जताया है. मुकुल रॉय को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा जो संगठन बनाने में माहिर थे और जिनकी पकड़ बंगाल के जमीनी कार्यकर्ताओं पर बहुत मजबूत थी.

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