बिहार में गजब घोटाला : नाबालिग के नाम पर आया PM आवास का पैसा, कागजों पर नाबालिगों को मिले पक्के मकान, जियो-टैगिंग में खुला भ्रष्टाचार का खेल
Bihar PMAYG Scam : बिहार पीएम आवास योजना में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जहां नाबालिगों के नाम पर पैसे बांट दिए गए और बिहार के घरों की लोकेशन दिल्ली-झारखंड में मिली. तकनीक और कागजों में हुई इस हेराफेरी ने सरकारी धन की बंदरबांट और सत्यापन प्रणाली की पोल खोल दी है.
बिहार में गजब घोटाला : नाबालिग के नाम पर आया PM आवास का पैसा, कागजों पर नाबालिगों को मिले पक्के मकान, जियो-टैगिंग में खुला भ्रष्टाचार का खेल
Bihar PM Awas Yojana Scam CAG Report : पटना : बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसे सुनकर सिस्टम पर सवाल उठना लाजिमी है. भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के ग्रामीण विकास विभाग में चल रहे खेल की पोल खोल दी है. रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि जिन बच्चों की उम्र अभी खेलने-पढ़ने की है, उनके नाम पर न सिर्फ पक्के मकान स्वीकृत कर दिए गए, बल्कि लाखों रुपये का भुगतान भी कर दिया गया.
जिंदा मां-बाप के होते हुए बच्चों को बना दिया बेघर
महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में बताया गया है कि पीएम आवास योजना के नियमों के मुताबिक नाबालिगों को घर आवंटित करने का कोई प्रावधान नहीं है. केवल विशेष परिस्थिति में, यदि माता-पिता दोनों की मृत्यु हो गई हो, तभी घर दिया जा सकता है. लेकिन बिहार में दो ऐसे मामले मिले जहां माता-पिता के जीवित रहते हुए भी नाबालिगों को पात्र बताकर 2.50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया. जो यह साफ बताता है कि जमीनी स्तर पर लाभार्थियों के सत्यापन में भारी फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार हुआ है.
हैरान करने वाली जियो-टैगिंग : घर बिहार में, लोकेशन दिल्ली की
योजना की पारदर्शिता के लिए घरों की जियो-टैगिंग की जाती है, लेकिन यहाँ तकनीक का भी मजाक बना दिया गया. महालेखापरीक्षक ने जांच में पाया कि 52 मामलों में घरों की लोकेशन उनके असली पते से काफी दूर पाई गई. सबसे अजीबोगरीब मामला तब सामने आया जब बिहार के तीन घरों की जियो-टैगिंग राज्य की सीमाओं को पार कर दिल्ली और झारखंड में मिली. बिहार से करीब 915 किलोमीटर दूर दिल्ली में लोकेशन दिखाना यह साबित करता है कि बिना घर बनाए या कहीं और की फोटो अपलोड करके सरकारी धन की बंदरबांट की गई है.
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही गरीबों की उम्मीद
यह रिपोर्ट गुरुवार को बिहार विधानसभा में पेश की गई, जिससे सदन में भी हड़कंप मच गया है. विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए कहा है कि जहां एक ओर असली गरीब आज भी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं, वहीं बिचौलिए और भ्रष्ट अधिकारी मिलकर कागजों पर ही घर बनाकर पैसा डकार रहे हैं. इससे पहले भी इस योजना में प्रति घर 20 हजार रुपये तक की रिश्वत मांगे जाने के आरोप लग चुके हैं. 2015 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना का मकसद गरीबों को पक्की छत देना था, लेकिन बिहार में जियो-टैगिंग और पात्रता के इन फर्जीवाड़ों ने पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर दिया है.
क्या हैं पीएम आवास योजना और किसे मिलता हैं इसका लाभ
प्रधानमंत्री आवास योजना केंद्र सरकार की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका मुख्य लक्ष्य देश के गरीब और बेघर नागरिकों को पक्की छत मुहैया कराना है. इस योजना के तहत सरकार उन लोगों को घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती है जो कच्चे मकानों में रहते हैं या जिनके पास रहने को घर नहीं है. योजना को दो भागों में बांटा गया है, ग्रामीण और शहरी. इसमें सरकार न केवल घर बनाने के लिए सीधे बैंक खाते में पैसे भेजती है, बल्कि शौचालय निर्माण और बिजली-पानी जैसे बुनियादी कनेक्शनों के लिए भी मदद दी जाती है.
इस योजना का लाभ मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग निम्न आय वर्ग और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को दिया जाता है. इसके लिए सबसे जरूरी शर्त यह है कि लाभार्थी या उसके परिवार के किसी सदस्य के पास देश में कहीं भी अपना पक्का मकान नहीं होना चाहिए. पात्रता तय करने के लिए सरकार सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करती है. इसमें प्राथमिकता बेघर लोगों, कच्चे कमरों वाले परिवारों, अनुसूचित जाति/जनजाति और उन परिवारों को दी जाती है जिनमें कोई वयस्क पुरुष सदस्य नहीं है या परिवार का मुखिया दिव्यांग है.