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साइबर क्राइम: नाराज सीजेआई ने कहा: साइबर अपराधियों को एक अलग काल कोठरी में रखा जाना चाहिए, ऐसे अपराधियों को नहीं बख्शा जाना चाहिए

Supreme Court News: साइबर क्राइम से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ में चल रही है। मामले की सुनवाई के दौरान नाराज सीजेआई ने कहा...

साइबर क्राइम: नाराज सीजेआई ने कहा: साइबर अपराधियों को एक अलग काल कोठरी में रखा जाना चाहिए, ऐसे अपराधियों को नहीं बख्शा जाना चाहिए
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Radhakishan Sharma

दिल्ली। 3 अप्रैल 2026|साइबर क्राइम से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ में चल रही है। मामले की सुनवाई के दौरान नाराज सीजेआई ने कहा, हो सकता है, किसी हत्यारे को रिहाई देकर उसे सुधारा जा सकता है,साइबर क्राइम से जुड़े अपराधियों काे बख्शा नहीं जाना चाहिए। इनको तो जेल के भीतर अलग काल कोठरी में रखा जाना चाहिए।

अदालत के सामने मौजूद आरोपी का ज़िक्र करते हुए सीजेआई ने कहा, जिसका कथिततौर पर साइबर धोखाधड़ी का इतिहास रहा है, ऐसे साइबर अपराधी को एक अलग कोठरी में रखा जाना चाहिए। ऐसे अपराधियों से निपटने का यही एकमात्र तरीका है।

पढ़िए क्या है मामला

सूरज श्रीवास्तव ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें हाई कोर्ट ने IPC की धारा 420/120B और IT अधिनियम की धारा 66D के तहत दर्ज एक मामले में ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया था। सूरज श्रीवास्तव 12 मई 2025 से जेल में है और उसके खिलाफ पहले से ही 3 आपराधिक मामले दर्ज है। मौजूदा मामले में उसने

शिकायतकर्ता को पार्ट-टाइम नौकरी दिलाने के बहाने 6,55,700 रुपये की धोखाधड़ी की। इसके लिए उसने 5 बैंक खाते खोले, जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए और कुछ रुपये UPI से भी ट्रांसफर कराया। याचिका की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ में हुई।

जमानत खारिज करने के साथ हाई कोर्ट ने की थी ये टिप्प्णी

याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, साइबर अपराध 'खामोश वायरस' की तरह हैं, जो चुपके से समाज को नुकसान पहुंचा रहा है। इस अपराध से समाज को आर्थिक नुकसान से कहीं ज़्यादा बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। इस आदेश के खिलाफ सूरज श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। यह याचिका एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के माध्यम से दायर की गई। मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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