गैस कंपनियों ने रायपुर-बिलासपुर के बड़े इलाके को बना दिया गांव, 25 दिन की जगह 45 दिन में सिलेंडर देने का नियम लागू

गैस कंपनियों ने रायपुर-बिलासपुर के बड़े इलाके को बना दिया गांव, 25 दिन की जगह 45 दिन में सिलेंडर देने का नियम लागू
X

इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

CG News: प्रदेशभर में रसोई गैस का संकट आने के बाद रायपुर, बिलासपुर जैसे कुछ बड़े शहरों की बड़ी आबादी अजीब परेशानी से जूझ रही है। सभी गैस कंपनियों ने इन शहरों के आउटर के उन इलाकों को गांव की सूची में डाल रखा है, जो बरसों पहले शहर बन चुके हैं। इसके कारण वहां के लोगों को 25 दिन में गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है, बल्कि गांव की तरह 45 दिन इंतजार करना पड़ रहा है।

रायपुर।23 मार्च 2026| रसोई गैस संकट आने से पहले सभी तरह के उपभोक्ताओं को 21 दिन बाद अगले गैस सिलेंडर के लिए बुकिंग शुरू करने की छूट दी। इससे सभी का काम सुचारु रूप से चल रहा था। अचानक ईरान-इजराइल युद्ध के बाद आए रसोई गैस संकट ने नियम को बदल दिया। हालात को देखते हुए सरकार के आदेश के बाद सभी गैस कंपनियां उपभोक्ताओं को श्रेणी के हिसाब से गैस सिलेंडर बुक करने की सुविधा दे रहे हैं। अब शहरों में 25 दिन और गांवों में 45 दिन बाद ही अगले गैस सिलेंडर की बुकिंग ली जाएगी। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि गांवों में गैस की खपत कम होती है, जबकि शहरों में हर परिवार की खपत ज्यादा है।

इस नए नियम पर बवाल तब शुरू हुआ है, जब रायपुर, बिलासपुर सहित प्रदेश के कुछ बड़े शहरों के एक हिस्से के उपभोक्ताओं को बताया गया कि उन्हें 25 दिन नहीं, 45 दिन बाद ही अगला गैस सिलेंडर मिल सकेगा। इसका कारण यह है कि शहरों में नगर निगम की सीमा तो बढ़ गई है, लेकिन गैस कंपनियों ने अपनी सूची में इसे संशोधित नहीं किया। यही कारण है कि रायपुर और बिलासपुर में नगर निगम में शामिल इलाकों के उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोनों ही शहरों में वार्ड की संख्या 70 तक पहुंच चुकी है, जबकि इससे पहले दोनों शहरों में क्रमश: 35 आौर 40 वार्ड ही थे। रायपुर में हीरापुर से सटे घरों, शंकरनगर से विधानसभा की ओर के इलाके और टिकरापारा से आगे बोरियाकला के आसपास के इलाके के लोगों को हलाकान होना पड़ रहा है। जबकि इसी तरह की स्थिति बिलासपुर में देवरीखुर्द, राजकिशोरनगर, सकरी, मोपका, कोनी और सिरगिट्टी में बनी हुई है। इन दोनों शहरों के ऐसे इलाकों को देखा जाए तो दो लाख से अधिक लोग परेशान हो रहे होंगे। गैस एजेंसियों के संचालकों का तर्क है कि गैस कंपनियों से जिस तरह उपभोक्ताओं को श्रेणियों में रखा गया है, उसी तरह ही गैस बुकिंग हो रही है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि गैस की बुकिंग ऑनलाइन होती है, इस वजह से मैनुअल कुछ नहीं किया जा सकता। जब तक गैस कंपनियों अपने वेबसाइट में में शहरी और ग्रामीण इलाकों को अपडेट नहीं करती हैं, तब तक इसका समाधान नहीं हो सकेगा। उपभोक्ताओं ने कलेक्टर से इस मामले में दखल देने को कहा है, जिससे गैस कंपनियों द्वारा इसे गंभीरता से लिया जा सके।

रायपुर में राज्य बनने के बाद नगर निगम की सीमा बदली गई थी। शहरी बसाहट में तब्दील हो चुके इलाकों को दावा- आपत्तियों के बाद नगर निगम में शामिल कर लिया गया था। इसमें टिकरापारा के आगे के कई गांव शामिल थे, इसी तरह पुराने विधानसभा और टाटीबंध की ओर भी यही परिवर्तन किया गया है। वहां नगर निगम की सुविधाएं मिलने लगी हैं और टैक्स भी जमा किया जा रहा है। बिलासपुर में वर्ष 2019 में 18 ग्राम पंचायतों को नगर निगम की सीमा में लाया गया। वहां ग्राम पंचायत की जगह अब शहर के वार्ड बन चुके हैं।

Tags

Next Story