CG की मंत्री ने कहा, मेरा खून ले लो,पर इलाज तो करो.....जिला अस्पताल की अव्यवस्था और स्टाफ की लापरवाही को लेकर मंत्री ने सीएस पर जताई नाराजगी
CG News: उत्तर छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला अस्पताल में अव्यवस्था और चिकित्सा स्टाफ की बेपरवाही से नाराज महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े नाराज हाे उठीं, नाराज मंत्री ने स्टाफ व चिकित्सक से कहा, मेरा खून ले लो, पर परेशान व बीमार मरीज का इलाज तो करो।

इमेज सोर्स- NPG News
सूरजपुर।31 मार्च 2026| सूरजपुर जिला अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिला के गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। जिला अस्पताल में इलाज में बरती जा लापरवाही की जानकारी मिलने पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अस्पताल पहुंचीं। लापरवाही और दुर्व्यवहार के मामले में उन्होंने सीएस और डॉक्टरों को फटकार लगाई। खून की व्यवस्था नहीं हो पा रही है तो, मेरा ब्लड ले लो और बीमार मरीज का इलाज करो।
गर्भवती महिला को गंभीर हालत में शनिवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद पता चला कि गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी है। ऑपरेशन कर मृत शिशु को निकालना जरुरी था, लेकिन अस्पताल में ब्लड की कमी बताते हुए उसका इलाज शुरू नहीं किया गया।
शिकायत मिली तो सीधे हॉस्पिटल पहुुंचीं मंत्री
सोमवार को मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को मरीज का इलाज शुरू न करने की शिकायत मिली, जिसके बाद वे शाम को सीधे अस्पताल पहुंचीं। मंत्री के पहुंचने पर सीएस डॉ. मरकाम सहित चिकित्सक अस्पताल में मौजूद थे।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इलाज में लापरवाही पर सीएस से नाराजगी जताई। अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के दुर्व्यवहार की शिकायत को लेकर उन्होंने अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई और कहा, इनके व्यवहार से पूरी चिकित्सा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। दरअसल, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। जब इसकी शिकायत भाजपा नेताओं से की गई, तो उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया।
नाराज मंत्री ने कहा-व्यवस्था सुधारें, यह बर्दाश्त नहीं
लक्ष्मी राजवाड़े ने सीएस से कहा, अस्पताल की व्यवस्था में सुधार किया जाए। पहले भी कई शिकायतें मिल चुकी हैं। मंत्री ने कहा, जरूरत पड़े तो मेरा ब्लड निकाल लो, लेकिन मरीज का इलाज तुरंत होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल में फैली बदबू और गंदगी पर भी अपनी नाराजगी जताई।
बता दें, सूरजपुर अस्पताल में इलाज में लापरवाही के आरोप पहले भी लग चुके हैं। इलाज न करने और हालत बिगड़ने पर अंबिकापुर रेफर करने की दो घटनाओं में प्रसूता और नवजात की मौत हो चुकी है।
